हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को हार का सामना करना पड़ा है। टीएमसी की हार ने ममता बनर्जी के वफादार पार्टी कार्यकर्ताओं को उनका कड़ा आलोचक बना दिया है। भ्रष्टाचार या कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चुप्पी साधने वाले नेता अब खुलकर बोल रहे हैं। उन पर हो रही तमाम आलोचनाओं में सबसे बड़ी आलोचना कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या की है, जिसके विरोध में कोलकाता की महिलाएं सड़कों पर उतर आई थीं।

इस मुद्दे पर बोलने वाले नए नेता तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सुखेन्दु शेखर रॉय हैं। जिन्होंने अन्य बातों के अलावा पार्टी के विघटन की भविष्यवाणी भी की। NDTV को दिए एक इंटरव्यू में रॉय ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगी। राष्ट्रीय राजनीति में भी इस पार्टी ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है। अब कोई भी पार्टी तृणमूल के साथ हाथ नहीं मिलाएगी।

आरजी कर हत्याकांड के संबंध में उन्होंने कहा कि आरजी कर हत्याकांड को जिस तरह से संभाला गया, वह गलत था। दोषियों को बचाने का स्पष्ट प्रयास किया गया। इसके लिए पुलिस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि आरजी कर का मुद्दा और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों ने उन्हें पहली बार यह संकेत दिया कि लोगों की भावनाएं पार्टी के खिलाफ थीं।

उन्होंने आगे कहा कि पार्टी इस बात को समझने में नाकाम रही। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेताओं ने भ्रष्टाचार का जो पहाड़ खड़ा किया है, वह अकल्पनीय है, और ममता बनर्जी उसे नियंत्रित करने में विफल रहीं। उन्होंने आगे कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने हिंदू धर्म पर अपनी टिप्पणियों से लोगों को नाराज कर दिया है। ममता ने हिंदू धर्म के बारे में जो कहा, उसे ‘गंदा धर्म’ कहना गलत है। यह हमारी राजनीतिक विचारधारा के खिलाफ है। इन सब बातों को देखते हुए उन्होंने संकेत दिया कि हार अपरिहार्य थी और इसके लिए जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष स्तर तक के हर नेता को जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।

हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि इसका मार्ग I-PAC द्वारा प्रशस्त किया गया था, जो चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर द्वारा शुरू किया गया संगठन है। तृणमूल के लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी, जो पार्टी में दूसरे नंबर पर हैं और जिनके उदय का कई लोगों ने विरोध किया था। उन्होंने पार्टी के चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार करने के लिए I-PAC को नियुक्त किया था। 2018 में जब I-PAC को नियुक्त किया गया था, तब पार्टी की वरिष्ठ नेताओं ने इसका काफी विरोध किया था, लेकिन 2021 में पार्टी की शानदार जीत ने आलोचकों को चुप करा दिया था। हालांकि, इस बार आलोचनाएं और भी तीखी हैं। रॉय ने कहा कि I-PAC को पार्टी को बर्बाद करने के लिए खुली छूट दी गई थी।

उन्होंने कहा कि आई-पैक पर कई आरोप लगे हैं। कई नेताओं का कहना है कि आई-पैक की वजह से ही ममता बनर्जी तक पहुंच मुश्किल हो गई थी। यह भी आरोप लगे हैं कि आई-पैक पार्टी के पदों को रिश्वत के बदले बेच रही थी।

तृणमूल सांसद काकोली घोष, जिन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे पत्र में इसी तरह के आरोप लगाए थे। उन्होंने आई-पैक के बारे में लिखा, “यदि किसी पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर अलोकतांत्रिक, संदिग्ध प्रभाव हावी हो जाता है, तो मुझे नहीं लगता कि यह पार्टी के आदर्शों और विरासत के लिए अच्छा है।”

पत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार, शिक्षकों की नियुक्ति, शासन और वित्त में अनियमितताओं और कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में डॉक्टर की मौत तथा मामले को दबाने के आरोपों का भी जिक्र किया गया है। जिसके बारे में उन्होंने लिखा है कि इससे लोगों में असंतोष और अविश्वास पैदा हुआ है। उन्होंने लिखा कि मैंने भी नैतिक आघात महसूस किया है।

तृणमूल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी ने एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ममता बनर्जी ने भ्रष्टाचार के सभी पहलुओं को नजरअंदाज किया। और इस परिणाम के लिए ममता और अभिषेक बनर्जी दोनों जिम्मेदार हैं। पार्टी के पूर्व महासचिव ने आगे कहा कि पार्टी जनता से अलग-थलग पड़ गई थी। वहीं, तृणमूल ने अब सार्वजनिक आलोचना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। पार्टी प्रवक्ता रिजु दत्ता को छह साल के लिए निलंबित कर दिया गया है।

शिवसेना जैसा होगा TMC का हाल? हारने के बाद लगातार पार्टी छोड़ रहे नेता, क्या ममता कर पाएंगी डैमेज कंट्रोल

 पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन हुए दो हफ्ते से ज्यादा का समय बीत चुका है। राज्य में तीन कार्यकाल तक अपना एकछत्र राज चलाने वाली पूर्व सीएम ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी चुनाव हारने के बाद से चुनौतियों का सामना कर रही है, क्योंकि लगातार उसके नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। पार्षद से लेकर मेयर और सांसद तक टीएमसी के संगठन की आलोचना के साथ ही ममता बनर्जी के हारे हुए खेमे को अलविदा कह रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर।