ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के लिए टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के ‘अहंकार’ और दीघा में जगन्नाथ मंदिर के लिए ‘धाम’ टैग के दुरुपयोग को जिम्मेदार ठहराया है। ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी सरकार के दो साल पूरे होने के अवसर पर शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए माझी ने यह बात कही।

एक सवाल के जवाब में माझी ने कहा, ”पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अहंकार के साथ काम किया था और ‘जगन्नाथ धाम’ के नाम का दुरुपयोग करने का प्रयास किया था। भगवान जगन्नाथ सब कुछ बर्दाश्त करते हैं लेकिन अहंकार नहीं। ममता बनर्जी के मामले में भी यही हुआ और वहां सरकार बदल गई।”

शुभेंदु दीघा मंदिर से ‘धाम’ टैग हटाने पर सहमत हो गए थे- माझी

माझी ने कहा कि उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान प्रचार किया था और उन्हें भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के साथ विभिन्न अवसरों पर दीघा ‘जगन्नाथ धाम’ मुद्दे पर चर्चा करने का अवसर मिला था। माझी ने कहा, ”शुभेंदु अधिकारी दीघा मंदिर से ‘धाम’ टैग हटाने पर सहमत हो गए थे। जैसे ही मैंने पत्र भेजा, उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार कर लिया।” पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 9 जून को घोषणा की थी कि राज्य सरकार दीघा में राज्य-पोषित जगन्नाथ मंदिर और सांस्कृतिक गतिविधि परिसर से ‘धाम’ का प्रतीक चिन्ह हटा देगी, जिसका उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले साल अप्रैल में किया था।

ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी ने कहा कि उनकी सरकार ‘ओड़िया अस्मिता’ की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पुरी का जगन्नाथ मंदिर सनातन हिंदुओं के चार प्रमुख धामों में से एक है। उन्होंने दावा किया कि जब ममता बनर्जी ने इसका दुरुपयोग किया तो लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। माझी ने कहा, ”कुछ लोग हमारे धर्म के खिलाफ हैं। वे हमारी परंपराओं और संस्कृति को तोड़ने का प्रयास करते हैं।

इस्कॉन की रथयात्राओं पर आपत्ति

इस्कॉन कई ऐसे कार्य कर रहा है जिन पर शंकराचार्य और पुरी के गजपति महाराजा दोनों ने आपत्ति जताई है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने भी इस्कॉन द्वारा समय से पहले निकाली जाने वाली रथयात्राओं पर आपत्ति दर्ज कराई है।” गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव पुरी के मानद राजा हैं और उन्हें जगन्नाथ मंदिर का प्रथम सेवक माना जाता है। इससे पहले, देव ने आरोप लगाया था कि इस्कॉन ने 70 देशों में असमय रथ यात्रा कार्यक्रमों का आयोजन किया था। उन्होंने इस्कॉन द्वारा की जा रही इस विसंगति में हस्तक्षेप की मांग करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी पत्र लिखा है।

यह भी पढ़ें: टीएमसी के पतन के बीच बीजेडी को मजबूत करने में जुटे नवीन पटनायक

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस बिखर रही है, वहीं पड़ोसी राज्य ओडिशा में बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने अपनी पार्टी को व्यवस्थित करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें

(इनपुट-भाषा)