कल्याण बनर्जी ने हाल ही में काकोली घोष दस्तीदार को लोकसभा चीफ व्हिप पद से हटा दिया था। इसके बाद बारासत से टीएमसी की सांसद दस्तीदार ने रविवार को जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC की नियुक्ति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इसने पार्टी में ‘अराजकता’ फैलाई और उसे ‘बर्बाद’ कर दिया। दस्तीदार ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वह सांसद पद से भी इस्तीफा दे सकती हैं। उनके बेटे ने भी इसकी पुष्टि की।
पश्चिम बंगाल में टीएमसी अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को अपना इस्तीफा लिखा। इसमें दस्तीदार ने अपनी बारासत सीट पर पार्टी के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी से अपील की कि वे अनुभवी पार्टी कार्यकर्ताओं पर भरोसा करें ना कि ‘बाहरी सलाहकारों’ पर। वह कल्याण बनर्जी के बाद दूसरी बड़ी TMC नेता हैं जिन्होंने पार्टी की हार के लिए I-PAC को जिम्मेदार ठहराया है।
उन्होंने कहा, ”अगर किसी ने विनाश की जड़ में काम किया है, तो वह वही संगठन (I-PAC) है। उसने सब कुछ पूरी तरह बर्बाद कर दिया है… मैंने उन्हें नियुक्त नहीं किया था। जिन्होंने नियुक्त किया है, वे ही इसके बारे में बात कर सकते हैं। लेकिन उन छोटे बच्चों ने हमें परेशान किया, हमारे कार्यकर्ताओं को परेशान किया… मैं पिछले 40-45 वर्षों से राजनीति में हूं।”
चार दशक की वफादारी के बदले उन्हें यह ‘इनाम’
काकोली घोष दस्तीदार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एक कंसल्टेंसी फर्म की 22-23 साल की एक युवती जिसने पार्टी को नुकसान पहुंचाया है, उन्हें धमकाती थी और यह बताती थी कि क्या करना है और कैसे करना है। उन्होंने अपने पत्र में ममता बनर्जी से अपील करते हुए कहा कि यदि पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ काम किया जाए तो पार्टी की छवि बेहतर होगी। उन्होंने यह भी कहा कि ‘फ्लाई-बाय-नाइट एजेंसियों’ के जरिए मुश्किल काम पूरे नहीं किए जा सकते।
उन्होंने पश्चिम बंगाल की शासन व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हाल के समय में अपराध और भ्रष्टाचार की घटनाओं ने जनता में चिंता बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही, अनुशासन और जनता के प्रति जिम्मेदारी पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
लोकसभा में चीफ व्हिप पद से हटाए जाने के एक दिन बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि 1976 से परिचय और 1984 से साथ का सफर रहा है और चार दशक की वफादारी के बदले उन्हें यह ‘इनाम’ मिला है।
इस पोस्ट के बाद उनके पार्टी में भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
सांसद के तौर पर दे सकती है इस्तीफा
सांसद के बेटे बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने बताया कि उनकी मां ने टीएमसी की महिला विंग के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया है और वह जल्द ही सांसद पद से भी इस्तीफा दे सकती हैं। बता दें कि बैद्यनाथ खुद टीएमसी से जुड़े नहीं हैं और उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि ममता बनर्जी सरकार से जुड़े कथित घोटालों ने उनके परिवार की प्रतिष्ठा पर असर डाला है।
उन्होंने कहा कि बारासत संसदीय क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से टीएमसी केवल एक में ही जीत पाई जबकि छह सीटें हार गईं। उन्होंने बताया कि बीते 5 से 10 वर्षों में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ जिम्मेदारी लेते हुए उनकी मां ने यह रुख अपनाया है।
ममता बनर्जी के साथ पारिवारिक संबंधों पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अब व्यक्तिगत निष्ठा पार्टी की समस्याओं को ढक नहीं सकती।
उन्होंने कहा कि काकोली घोष अभी भी ममता बनर्जी के करीब हैं लेकिन सवाल यह है कि कोई इन परिस्थितियों को कितने समय तक सह सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्थ चटर्जी के कार्यकाल में नौकरियां बेची गईं और कई लोग बेरोजगार रह गए जबकि ज्योति प्रिया मल्लिक को राशन घोटाले में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने आरजी कर मामले का भी जिक्र किया और कहा कि इन सभी घटनाओं का असर उनके परिवार को भी झेलना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि उनका परिवार शिक्षित और सम्मानित है। ऐसे में इतने भ्रष्टाचार के आरोपों वाले शासन को लंबे समय तक सहना मुश्किल है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार पर भी उंगलियां उठती रही हैं और व्यक्तिगत रिश्ते के कारण उनकी मां अब तक चुप रही हैं।
बीजेपी में शामिल होने की संभावना पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह बीजेपी में जाने का मुद्दा नहीं है बल्कि भ्रष्टाचार का हिस्सा न बनने का सवाल है। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने भ्रष्टाचार के खिलाफ रुख अपनाने का फैसला किया है। इस बीच पार्टी नेतृत्व से बढ़ते मतभेदों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में उन्हें Y श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है। यह सुरक्षा खुफिया ब्यूरो की खतरे के आकलन रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाई गई। इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं।
