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सेना ने मांग नहीं थी फिर भी दे दिया गया 97 लाख रुपये का ऑर्डर, पीएसी ने जताया अफसोस

संसद की लोक लेखा समिति ने अपनी एक रिपोर्ट में अफसोस जताया है कि सेना द्वारा नाइट्रोजन गैस उत्पादन संयंत्र की मांग नहीं किए जाने के बाद भी मोबाइल गैस संयंत्र के विकास के लिए 97.33 लाख रूपये का आर्डर दिया गया।

Author December 19, 2018 5:56 PM
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे

संसद की लोक लेखा समिति ने अपनी एक रिपोर्ट में अफसोस जताया है कि सेना द्वारा नाइट्रोजन गैस उत्पादन संयंत्र की मांग नहीं किए जाने के बाद भी मोबाइल गैस संयंत्र के विकास के लिए 97.33 लाख रूपये का आर्डर दिया गया। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे की अध्यक्षता वाली इस समिति की यह रिपोर्ट बुधवार को संसद में पेश की गयी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना द्वारा मांग नहीं होने के बाद भी ‘‘युद्धक वाहन अनुसंधान एवं विकास स्थापना’’ (सीवीआरडीई) ने 97.33 लाख रूपये की लागत से मोबाइल गैस संयंत्र के विकास के लिए आर्डर दिया।

समिति ने कहा कि गैस संयंत्र का विकास अनावश्यक था क्योंकि जीईएम प्रेशर सिस्टम नामक कंपनी द्वारा पहले ही इस संयत्र का विकास किया जा चुका था। जुलाई 2010 में इसकी आपूर्ति रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) को कर दी गयी थी। समिति ने कहा कि सेना के मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन को युद्ध परिस्थिति में तैयार रखने के लिए नाइट्रोजन गैस बहुत आवश्यक एवं अहम है। समिति ने निराशा जतायी कि जीईएम प्रेशर सिस्टम का तीन साल तक उपयोग नहीं किया गया क्योंकि सेना के लिए खरीद के बावजूद डीआरडीएल द्वारा इसका उपयोग नाइट्रोजन उत्पादन संयंत्र में निष्पादन मूल्यांकन और स्थिरता के लिए किया जा रहा था।

रिपोर्ट के अनुसार सेपा ने शुरूआत में कहा था कि उन्हें गैस संयंत्र की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उनके नाइट्रोजन गैस सिलेंडरों को आयुध कारखानों के माध्यम से पुन: भरा जा रहा था। वे खरीदे गए गैस संयंत्र को प्राप्त करने के इच्छुक नहीं थे क्योंकि उनके पास पर्याप्त संसाधन मौजूद थे।
समिति ने कहा कि डीआरडीएल सेना के बख्तरबंद ब्रिगेड की विशिष्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए एक नोडल एजेंसी है और उस पर अर्जुन टैंक के लिए नाइट्रोजन गैस प्रणाली विकसित करने का जिम्मा है। लेकिन विकास संबंधी अनिवार्यताओं के कारण गैस संयंत्र को एक निजी विक्रेता से अनुसंधान एवं विकास परियोजना के रूप में खरीदा गया था।

समिति ने चिंता जतायी कि सेना द्वारा परीक्षण के लिए गैस संयंत्र की स्वीकृति दबाव के तहत दी गयी प्रतीत होती है क्योंकि मेकेनाइज्ड फोर्स के महानिदेशक ने कहा था कि सीवीआरडीई ने उन्हें ‘‘नो कॉस्ट, नो लाइबिलिटी (कोई लागत नहीं, कोई दायित्व नहीं)’’ आधार पर गैस संयंत्र की पेशकश की थी।
समिति ने सिफारिश की कि सेना को संकल्पना चरण से ही अंतिम उत्पाद के निर्माण के लिए उचित शृंखला स्थापित करने की खातिर अपनी स्पष्ट आवश्यकताओं को निर्धारित करना चाहिए।

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