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साध्वी प्रज्ञा को कोर्ट ने नहीं दी क्लीन चिट, फिर भी NIA ने कहा- पुख्ता सबूत नहीं

एनआईए ने यह भी कहा कि प्रज्ञा की उम्मीदवारी के खिलाफ याचिका पर उसे कुछ नहीं कहना है।

Author April 24, 2019 8:13 AM
भाजपा नेता साध्वी प्रज्ञा ठाकुर। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

मुंबई के स्पेशल कोर्ट ने भले ही प्रज्ञा सिंह ठाकुर को क्लीनचिट देने को खारिज करते हुए उनके खिलाफ 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोप तय किए हों, लेकिन सरकारी अभियोजन एजेंसी एनआईए ने कोर्ट में मंगलवार को कहा कि ठाकुर के खिलाफ केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। ब्लास्ट में मारे गए सैयद अजहर के पिता निसार अहम सैयद बिलाल की ओर से दाखिल याचिका पर जवाब देते हुए एनआईए ने अपना रुख एक बार फिर दोहराया। मालेगांव धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 101 लोग घायल हो गए थे। बिलाल ने अपनी याचिका में मांग की थी कि मामले के मुख्य आरोपियों में से एक प्रज्ञा को चुनाव लड़ने से रोका जाए क्योंकि इस मामले में अभी भी ट्रायल चल रहा है। बता दें कि बीजेपी ने प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से उम्मीदवार बनाया है।

एनआईए ने कहा कि प्रज्ञा की उम्मीदवारी के खिलाफ याचिका पर उसे कुछ नहीं कहना है। एनआईए की ओर से कहा गया, ‘यह मामला चुनाव और निर्वाचन आयोग से जुड़ा हुआ है। इस मामले पर कुछ कहना एनआईए के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता क्योंकि चुनाव लड़ने का मामला केस से नहीं जुड़ा हुआ है। यह फैसला सिर्फ चुनाव आयोग द्वारा लिया जाना चाहिए। इसलिए इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।’ एजेंसी ने कोर्ट से कहा, ‘हालांकि, यहां यह जिक्र करना उचित होगा कि एनआईए की ओर से 13 मई 2016 को चार्जशीट दाखिल की गई थी। एनआईए ने 10 आरोपियों के खिलाफ केस चलाने की सिफारिश की थी। यह भी बताया था कि आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (और 5 लोगों) के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले…जो उनके खिलाफ मामला चलाने लायक नहीं हैं।’

स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अविनाश रसल ने कहा कि ठाकुर को क्लीनचिट देने वाले पैराग्राफ को केस के बैकग्राउंड में जोड़ा गया था। जब उनसे पूछा गया कि प्रज्ञा के खिलाफ आरोप तय होने का जिक्र एनआईए के जवाब में क्यों नहीं है, इस पर रसल ने कहा, वह आगे चलने वाले प्रज्ञा के खिलाफ मुकदमे में सबूत रखेंगे। बता दें कि अगर अभियोजन एजेंसी की फाइनल रिपोर्ट कोर्ट स्वीकार नहीं करती है तो एजेंसी का दायित्व होता है कि वह आरोपी के खिलाफ सभी सबूत पेश करे। उधर, हत्या, आपराधिक साजिश और यूएपीए की धाराओं के तहत मुकदमे का सामना कर रहीं ठाकुर ने बिलाल की याचिका को राजनीतिक एजेंडे से प्रभावित बताते हुए सिरे से खारिज किया है। प्रज्ञा ने कहा है कि जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो उन्हें केस लंबित होने की दशा में चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराता हो।

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