ताज़ा खबर
 

मालदीव ने भारत को द‍िया एक और झटका, कहा- हटाइए अपने आदमी और सैन्‍य हेल‍िकॉप्‍टर

चीन के दुलार में उसका और ज्यादा ध्यान खींचने के लिए मालदीव ने भारत को झटका दिया है। भारत दशकों से हिंद महासागर द्वीप श्रृंखला स्थित छोटे देशों स्थिरता बनाए रखने के लिए सेना समेत तमाम तरीके की मदद देता आ रहा है। शुक्रवार (10 अगस्त) को मालदीव के राजदूत ने दिल्ली में कहा कि भारत जून में खत्म चुके एक अनुबंध को देखते अपने तैनात किए जवानों और सैन्य हेलिकॉप्टरों वहां से हटा ले।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

चीन के दुलार में उसका और ज्यादा ध्यान खींचने के लिए मालदीव ने भारत को झटका दिया है। भारत दशकों से हिंद महासागर द्वीप श्रृंखला स्थित छोटे देशों स्थिरता बनाए रखने के लिए सेना समेत तमाम तरीके की मदद देता आ रहा है। शुक्रवार (10 अगस्त) को मालदीव के राजदूत ने दिल्ली में कहा कि भारत जून में खत्म चुके एक अनुबंध को देखते अपने तैनात किए जवानों और सैन्य हेलिकॉप्टरों वहां से हटा ले। चीन समर्थित मालदीव की अबदुल्ला यामीन सरकार का यह व्यवहार भारत के लिए अपमान सरीखा देखा जा रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट् के मुताबिक हिंद महासागर द्वीप श्रृंखला में पड़ने वाले मालदीव में भारत और चीन के बीच बराबरी से मुकाबला जारी है। बीजिंग की ओर से इलाके में सड़कें, पुल और बड़े हवाई-अड्डे बनाए जा रहे हैं ताकि मालदीव का ध्यान भारत की तरफ से अलग किया जा सके, जोकि दशकों से वहां सैन्य और नागरिक सहायता देता आ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने मालदीव में इस वर्ष राजनीतिक प्रतिद्वंदियों पर यामीन की तरफ से की गई कार्रवाई और थोपे गए आपातकाल का विरोध किया था और राष्ट्रपति यामीन के कुछ प्रतिद्वंदियों ने सैन्य हस्तक्षेप के लिए नई दिल्ली से गुहार भी लगाई थी, जिससे मालदीव सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई थीं। इस तरह के तनाव उन कार्यक्रमों पर असर डाल रहे हैं जिनके जरिये भारत ने इलाके के छोटे देशों को विशेष आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा करने, सर्वेक्षण करने और समुद्री डाकुओं से लड़ने के लिए सुरक्षा सहायता दी है। भारत में मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद ने रॉयटर्स को बताया कि भारत की तरफ से उपलब्ध कराए गए दो सैन्य हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल मेडीकल सहायता के लिए बचाव कार्यों में किया गया था लेकिन जिस प्रकार द्वीपों ने अब खुद के पर्याप्त संसाधन जुटा लिए हैं तो उनकी और जरूरत नहीं रह गई है।

मोहम्मद ने कहा, ”पहले वे बहुत उपयोगी थे लेकिन पर्याप्त बुनियादी ढांचे, सुविधाओं और संसाधनों के विकास के साथ हम अब ऐसी स्थिति में है कि मेडीकल सहायता के लिए बचाव कार्य अपने आप कर सकते हैं।” मोहम्मद ने कहा कि हालांकि भारत और मालदीव अब भी द्वीपों के विशेष आर्थिक क्षेत्र में हर महीने संयुक्त गश्ती कर रहे हैं। भारत से दक्षिण-पश्चिम में 400 किलोमीटर (250 मील) पर मालदीव चीन और मध्य एशिया के बीच दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्ते के करीब है। हेलिकॉप्टरों के साथ भारत ने मालदीव में सेना के 50 जवान तैनात किए थे, जिनमें पायलट और रखरखाव दल शामिल है और उनकी वीजा अवधि खत्म हो गई है लेकिन नई दिल्ली ने द्वीप श्रृंखला से उन्हें अभी वापस नहीं बुलाया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App