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पीएम मोदी को सचिवों का ‘RSS’ से उलट सुझाव – इंग्लिश सभी स्कूलों में जरूरी करो, हर ब्लॉक में इंग्लिश स्कूल खोलो

सचिवों के एक समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुझाव दिया है कि आने वाले अप्रैल से देश के सभी सेकेंड्री स्कूलों में इंग्लिश पढ़ाई जानी जरूरी कर देनी चाहिए।

Author January 15, 2017 7:41 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (PTI Photo by Subhav Shukla)

सचिवों के एक समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुझाव दिया है कि आने वाले अप्रैल से देश के सभी सेकेंड्री स्कूलों में इंग्लिश पढ़ाई जानी जरूरी कर देनी चाहिए। इसके अलावा देश के सभी यानी 6,612 ब्लॉक में कम से कम एक सरकार द्वारा चलाया जाने वाला इंग्लिश मीडियम स्कूल खोलने की सलाह भी दी गई है। पीएम को ये सुझाव शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास विभाग के सदस्यों द्वारा दिए गए। अधिकारियों द्वारा इंग्लिश के साथ-साथ साइंस पर भी जोर देने के लिए कहा गया है। कहा गया है कि साइंस और इंग्लिश छठी से ऊपर के सभी स्कूलों में पढ़ाई जानी जरूरी होनी चाहिए। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने पिछले साल अक्टूबर में सचिवों के 10 ग्रुप्स बनाए थे। इन सभी को केंद्र सरकार के काम पर नजर रखने, उसकी नीतियों को देखने और उनके प्रभाव के बारे में बताने का काम सौंपा गया था। साथ ही कुछ नए आईडिया देने के लिए भी सभी सचिवों को कहा गया था।

अभी क्या है व्यवस्था: फिलहाल सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन (सीबीएसई) से मान्यता प्राप्त स्कूलों में ही आठवीं तक के स्टूडेंट्स को इंग्लिश पढ़ाई जानी जरूरी है। लेकिन 9वीं से 12वीं तक सीबीएसई बोर्ड में भी इंग्लिश पढ़ना जरूरी नहीं है। तब स्टूडेंट्स हिंदी या फिर इंग्लिश में से किसी एक को चुन सकते हैं।

संघ की बात होगी अनसुनी ? दरअसल इससे पहले शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (SSUN) नाम के संगठन ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा था कि सभी स्कूलों में उच्च स्तर के लिए प्राथमिक भाषा के रूप में हिंदी पढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही कहा गया था कि इंग्लिश पढ़ना किसी के लिए किसी भी स्तर पर जरूरी नहीं होना चाहिए। SSUN राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से मान्यता प्राप्त संस्थान है।

मिले कुछ और भी सुझाव: सचिवों द्वारा पीएम को कुछ और भी सुझाव दिए गए हैं। कहा गया है कि किसी थर्ड पार्टी द्वारा सालाना सर्वे करवाकर यह भी देखा जाना चाहिए कि सरकरी नीतियों को क्या प्रभाव पड़ रहा है।

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