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जीप के बोनट से बांधकर ‘मानव ढाल’ बनाने वाले मेजर को ‘सेना प्रमुख’ सम्मान

‘मानव ढाल’ के प्रकरण में भाजपा सांसद व अभिनेता परेश रावल ने सोशल मीडिया पर यह टिप्पणी कर विवाद खड़ा कर दिया कि किसी पत्थरबाज के बजाय लेखिका अरुंधति रॉय को सेना की जीप से बांधना चाहिए।

Author श्रीनगर/ नई दिल्ली | May 23, 2017 01:02 am
सेना की जीप पर बंधे कश्मीरी फारूक दार की ये तस्वीर वायरल हो गई थी। (वीडियो स्क्रीन ग्रैब)

कश्मीर में सुरक्षा बलों के काफिले को पत्थरबाजों से बचाने के लिए एक स्थानीय कश्मीरी युवक को जीप के बोनट से बांधकर ‘मानव ढाल’ बनाने वाले मेजर लीतुल गोगोई को सेना ने सम्मानित किया है। उन्हें आतंकवाद और घुसपैठ रोधी अभियानों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए यह सम्मान दिया गया है। दूसरी तरफ, ‘मानव ढाल’ के प्रकरण में भाजपा सांसद व अभिनेता परेश रावल ने सोशल मीडिया पर यह टिप्पणी कर विवाद खड़ा कर दिया कि किसी पत्थरबाज के बजाय लेखिका अरुंधति रॉय को सेना की जीप से बांधना चाहिए। रॉय हाल के दिनों में कश्मीर घाटी में सेना की कार्रवाई की मुखर आलोचक रही हैं। बहरहाल, कश्मीर घाटी में पत्थरबाजों की भीड़ पर काबू पाने में मेजर गोगोई के तरीके को सेना ने एक तरह से स्वीकृति प्रदान कर दी है। सेना प्रमुख का प्रशस्ति पत्र शौर्य या विशिष्ट व्यक्तिगत प्रदर्शन या कामकाज के प्रति समर्पण के लिए दिया जाता है। तीनों सेनाओं के प्रमुख अपने अधिकारियों और सैनिकों में से चुने गए अफसरों को इस तरह के सम्मान देते हैं। सेना ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि मेजर गोगोई को सीओएएस कमेंडेशन (सेना प्रमुख का प्रशस्ति पत्र) प्रदान किया गया है। सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने एक बयान में कहा, ‘मेजर लीतुल गोगोई को आतंकवाद विरोधी अभियान में निरंतर प्रयास करने के लिए सेना प्रमुख के ‘कमेंडेशन कार्ड’ से नवाजा गया है।’

53 राष्ट्रीय राइफल्स के मेजर गोगोई के लिए यह पुरस्कार उनकी कार्रवाई के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। सेना ने कहा है कि ‘मानव ढाल’ मामले में कोर्ट आॅफ इंक्वायरी (सीओआइ) अंतिम चरण में है। मेजर गोगोई को सम्मानित करते हुए उनके उल्लेखनीय प्रदर्शन समेत सभी कारकों और सीओआइ से उभरने वाले सभी तथ्यों को ध्यान में रखा गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि पथराव करने वालों से जवानों को बचाने के लिए शख्स को जीप से बांधने के उनके फैसले को सेना का समर्थन है। सेना के एक अधिकारी के अनुसार, ‘मेजर का कोर्टमार्शल तो दूर की बात है, इस अधिकारी के लिए तो अनुशासनात्मक कार्रवाई का ही सवाल नहीं उठता।’  कश्मीरी युवक फारुक अहमद डार को जीप के बोनट से बांधकर पत्थरबाजों को नियंत्रित करने की घटना नौ अप्रैल की है। उस दिन श्रीनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान कराए जा रहे थे। 53 राष्ट्रीय राइफल के मेजर गोगोई बडगाम में अपने साथी सैनिकों, चुनावी ड्यूटी के लिए तैनात 12 अधिकारियों, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के नौ सैनिकों और दो पुलिसकर्मियों के पांच वाहनों वाले काफिले का नेतृत्व कर रहे थे। इस काफिले को पत्थरबाजों ने घेर लिया था। सुरक्षा कर्मियों पर पत्थर बरसाए जाने लगे। भीड़ से अपने काफिले को बचाने के लिए मेजर गोगोई ने प्रदर्शनकारियों में शामिल कश्मीरी युवक को जीप की बोनट से बांधकर मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जारी कर जम्मू -कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तीखी टिप्पणी की थी। वीडियो वायरल होने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। स्थानीय लोगों के आक्रोश को देखते हुए सेना ने मेजर और सुरक्षा बलों के अन्य अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट आॅफ इंक्वॉयरी बिठाई थी। सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने मेजर के इस फैसले की सराहना की। उन्होंने मेजर द्वारा मौके पर लिए गए फैसले को सही ठहराते हुए इसे पत्थरबाजी से निपटने का बेहतर तरीका बताया। इस बीच, अरुंधति राय पर निशाना साधते हुए परेश रावल ने ट्वीट किया, ‘थलसेना की जीप पर पत्थरबाज को बांधने की बजाय अरुंधति रॉय को बांधें।’ रावल के इस ट्वीट पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्यों न उस शख्स को बांधा जाए जिसने पीडीपी-भाजपा गठबंधन कराया? बाद में भाजपा ने विवाद शांत कराने के लिए केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी को मैदान में उतारा, जिन्होंने कहा कि भाजपा नेता देश के किसी व्यक्ति के खिलाफ दिए जाने वाले हिंसक संदेश का समर्थन नहीं करते। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने रावल का ट्वीट नहीं देखा है। ऐसे में मेरा जवाब पूरी तरह सही और जानकारी आधारित नहीं होगा।

‘मानव ढाल’ वाले मामले को लेकर तब से ही सोशल मीडिया पर बहस जारी है। लेखिका अरुंधति रॉय कश्मीर में सेना की तैनाती और कार्रवाइयों की मुखर आलोचक रही हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय कई लोगों ने रावल के इस ट्वीट की निंदा की। कुछ लोगों ने उन पर हिंसा भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया। जब एक समर्थक ने सुझाव दिया कि बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका अरुंधति की बजाय एक महिला पत्रकार के साथ ऐसा ही सलूक किया जाना चाहिए, तो रावल ने जवाब दिया, ‘हमारे पास काफी विकल्प हैं।’ कई दक्षिणपंथी समर्थकों ने रावल की टिप्पणियों का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि अरुंधति देशविरोधी हैं। उधर, कांगे्रस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने परेश रावल की टिप्पणी पर कहा कि मामला यह नहीं है कि किसी ने किसी के बारे में क्या कहा। मैं और बहुत से लोग रॉय की बहुत सारी बातों से बिलकुल सहमत नहीं हैं। लेकिन मैं आपके असहमत होने के अधिकार का समर्थन करता हूं। आज भारत से असहमति के इस अधिकार को खत्म किया जा रहा है।
’सैन्य काफिले को पत्थरबाजों से बचाने के लिए एक स्थानीय कश्मीरी को जीप पर बांध कर ‘मानवढाल’ के रूप में इस्तेमाल करने पर चर्चा में आए थे मेजर लीतुल गोगोई  ’मानव ढाल मामले में गठित कोर्ट आॅफ इंक्वॉयरी ने जांच के बाद मेजर के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने की सिफारिश की थी। सेना के एक अधिकारी ने कहा कि मेजर का कोर्टमार्शल तो दूर की बात है, इस अधिकारी के लिए तो अनुशासनात्मक कार्रवाई का ही सवाल नहीं उठता। परेश रावल ने यह कह कर छेड़ा विवाद कि सेना की जीप से पत्थरबाजों के बजाय अरुंधति रॉय को बांधा जाए, कांग्रेस ने कहा कि असहमति के अधिकार का गला घोंट रही भाजपा

पुलवामा में मैच से पहले बजा पीओके का राष्ट्रगान

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में एक क्रिकेट मैच की शुरुआत से पहले पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का राष्ट्रगान बजाया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने वाले इस वीडियो को बहुत से लोग देख रहे हैं। पुलिस ने इसकी जांच शुरू की है। पुलवामा जिला स्टेडियम में रविवार को बनाए गए वीडियो में दोनों टीमों शाइनिंग स्टार्स पंपोर और पुलवामा टाइगर्स के सदस्यों को एक क्रिकेट टूर्नामेंट के अंतिम मैच की शुरुआत से पहले पंक्ति में खड़ा दिखाया गया और इस दौरान पृष्ठभूमि में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का राष्ट्रगान सुनाई दे रहा था। सोशल मीडिया पर इसे खूब देखे जाने के बाद पुलिस ने इस पर संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की।  एक अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लिया है और जांच शुरू कर दी है।

मैदान के चारों तरफ कथित रूप से कुछ मृत आतंकवादियों के पोस्टर भी लगाए गए जबकि मैच के बाद बांटे गए पुरस्कार के नाम भी कुछ मृत आतंकवादियों के नाम पर रखे गए थे।पुलवामा स्टेडियम, जहां क्रिकेट मैच खेला जा रहा था, उस डिग्री कालेज के समीप स्थित है जो घाटी में छात्रों के प्रदर्शन के केंद्र में रहा है। इस घटना से डेढ़ महीने पहले एक वीडियो सामने आया था जिसमें पाकिस्तानी टीम की यूनीफार्म पहने दो स्थानीय क्रिकेट टीमें मैच शुरू होने से पहले पाकिस्तान का राष्ट्रगान गाते दिख रही थी। इस वीडियो के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने कार्रवाई की थी।

 

 

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