प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रविवार को गोवा में एक डिजिटल अरेस्ट केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत दो लोगों को गिरफ्तार किया। ED ने कहा कि जांच में साइबर फ्रॉड करने वालों के पूरे भारत में फैले एक संगठित नेटवर्क का पता चला है, जिनके अकाउंट्स पर 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 163 से ज़्यादा FIR दर्ज हैं और कुल मिलाकर 400 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान हुआ है।

प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के सेक्शन 19 के तहत गिरफ्तार किए गए फहीम मोइन हुसैन सईद और नईम मुईन सईद को सोमवार को गोवा की एक कोर्ट में पेश किया गया। यह जांच पिछले साल गोवा के साइबर-क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से जुड़ी है, जिसमें एक लोकल महिला को कथित तौर पर एक डिजिटल अरेस्ट केस में 2.6 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया था। यह घटना 21 मई, 2025 और 2 जून, 2025 के बीच हुई थी, और पैसे उन अकाउंट्स में ट्रांसफर किए गए थे जिन्हें पीड़ित को गलत तरीके से सीक्रेट सुपरविज़न अकाउंट्स बताया गया था।

कैसे हुआ खुलासा?

ED ने कहा कि जांच से पता चला है कि पैसा एक संगठित सिस्टम में आया, जो साइबर फ्रॉड से मिली कमाई को (जो बैंकिंग क्रेडिट के तौर पर मिली थी) पहले कैश में और उसके बाद फॉरेन करेंसी में बदलने के लिए मौजूद था। इस मकसद के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लाइसेंस वाली कंपनियों का इस्तेमाल पूरी तरह से मनी चेंजर के तौर पर किया गया।

कैसे काम करता था नेटवर्क?

ED ने कहा, “जांच से पता चला है कि जिन कंपनियों के ज़रिए पैसे भेजे गए, वे कम पैसे वाले लोगों के नाम पर बनाई गई थीं, जिनमें कर्मचारी, ड्राइवर और एक कमरे वाले घरों में रहने वाले लोग शामिल थे। इन सभी को डायरेक्टर के तौर पर दिखाया गया था, जबकि कंपनियों के अकाउंट और कामकाज दूसरों के कंट्रोल में रहे। पीड़ित के पैसे कुछ ही घंटों में पहले लेयर के डॉर्मेंट और नए खुले अकाउंट्स के ज़रिए ट्रांसफर कर दिए गए और 400 से ज़्यादा बेनिफिशियरी अकाउंट्स में बांट दिए गए। इस निशान से कमोडिटी, ट्रेडिंग, ट्रैवल और फॉरेक्स एंटिटीज के एक इंटरकनेक्टेड नेटवर्क का पता चला, जिन्होंने मिलकर 27,850 करोड़ रुपये से ज़्यादा के बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन किए और लगभग 2,904 करोड़ रुपये कैश जमा किए। इसमें कई जगहों पर 61,448 बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीन ट्रांज़ैक्शन के ज़रिए 584.70 करोड़ रुपये शामिल हैं।”

ED ने कहा कि जांच से पता चला है कि इन कंपनियों के अकाउंट्स पर 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 330 पीड़ितों की शिकायतें और 163 FIR दर्ज हैं। इनमें कुल मिलाकर 417.49 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। ED ने कहा, “उनमें से 101 शिकायतों में, एक ही पीड़ित का पैसा एक ही नेटवर्क की दो या ज़्यादा कंपनियों में ट्रांसफर किया गया।” एजेंसी ने कहा कि 17 जुलाई और 21 अगस्त को मुंबई और गोवा में 20 से ज़्यादा जगहों पर PMLA एक्ट के सेक्शन 17 के तहत तलाशी ली गई। एजेंसी ने कहा कि 3.25 करोड़ रुपये कैश ज़ब्त किए गए हैं, साथ ही डिजिटल डिवाइस, रिकॉर्ड और कानूनी रजिस्टर भी ज़ब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

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Cyber Fraud in Digial India: डिजिटलीकरण की तेज़ रफ्तार ने भारत को आर्थिक और समाजिक रूप से जोड़ने में अभूतपूर्व भूमिका निभाई है। 86% से ज्यादा घर अब इंटरनेट से जुड़े हुए हैं। पूरी खबर के लिए यहाँ क्लिक करें।