तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सामने सोमवार को एक और संकट खड़ा हो गया। टीएमसी के बागी गुट ने दावा किया कि उसके साथ 28 में से कम से कम 20 लोकसभा सांसद हैं वे एक अलग गुट बनाने और भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल होने जा रहे हैं।

यह पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका है, जो पहले ही पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधायकों पर से कंट्रोल खो चुकी हैं। काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी गुट ने 20 सासदों के सपोर्ट का दावा किया, लेकिन उनमें से कम से कम 14 मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पश्चिम बंगाल चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर पर हुई बैठक में शामिल हुए। हालांकि ममता बनर्जी के करीबों लोगों ने बागियों की संख्या 12 बताई है।

कौन-कौन सांसद हुए बागी?

बागी गुट ने दावा किया कि बैठक में शामिल होने वाले लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदर, अरूप चक्रवर्ती, जून मालिया, दीपक अधिकारी, कालीपद सारेन, जगदीश बसुनिया, असित मल, एमडी अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, और पार्थ भौमिक हैं। बागियों ने छह और लोगों के साथ का दावा किया है।

सुबह सुखेंदु ने दिया इस्तीफा

दिल्ली में जहां एक ओर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी विपक्षी INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल हुए, तो दूसरी ओर बागी नेताओं ने लोकसभा में टीएमसी को तोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया। टीएमसी को पहला झटका सुबह तब लगा जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के मुताबिक, एक और राज्यसभा सांसद के इस्तीफा देने की संभावना है।

राज्यसभा से सुखेंदु राय के इस्तीफे को चेयरमैंन सीपी राधाकृष्णन ने मंजूरी दे दी है। इस्तीफे की वजह पूछे जाने पर सुखेंदु ने कहा पार्टी पर हमला बोलते हुए इंडियन एक्सप्रेस से कहा, पार्टी में लंबे समय से बने हुए हालात की वजह से उन्होंने इस्तीफा दिया है।” क्या किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगे, इस सवाल पर कहा, “मैंने राजनीति में 59 साल बताए हैं, इसलिए सोचने और पुरानी बातों पर विचार करने के बाद सही समय पर फैसला लूंगा।”

बागी लोकसभा सांसद और सुखेंदू एक फाइव-स्टार होटल में मिले और फिर बीजेपी के पश्चिम बंगाल चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर गए। इसके बाद सुवेंदु अधिकारी भी भूपेंद्र यादव के मोतलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास पर पहुंचे।

भूपेंद्र के आवास पर हुई बागियों की बैठक

बारासात की सांसद काकोली घोष ने कहा कि टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि टीएमसी सांसदों का यह गुट औपचारिक रूप से एनडीए का समर्थन करेगा और पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेगा। हालांकि ओम बिरला के ऑफिस के सूत्रों ने कहा कि उन्हें सांसदों से अभी तक कोई पत्र नहीं मिला है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि काकोली घोष ने पार्टी के चीफ व्हिप के तौर पर पत्र पर साइन किए हैं। बागियों के मुताबिक, भले ममता बनर्जी के निर्देश पर कल्याण बनर्जी को उनकी जगह चीफ व्हिप बनाया गया था, लेकिन यह बदलाव जरूरी संसदीय प्रक्रिया के जरिए पूरा नहीं किया गया था। इसी कारण बारासात की सांसद चीफ व्हिप का पद अपना बता रही हैं।

बर्धमान पूर्व की सांसद शर्मिला सरकार ने दावा किया कि गुट ने पत्र सौंप दिए हैं। उन्होंने कहा, “हमने एक मीटिंग की, हम अलग बैठक चाहते हैं। मैं दीदी का सम्मान करती हूं। मैं काम करना चाहती थी, लेकिन नहीं कर पाई। काकोली दी की अगुवाई में यह अलग गुट बना है।”

उन्होंने कहा, “हम 20 सांसद हैं। हमने सीएम सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी में भूपेंद्र यादव के घर पर बैठक की। बंगाल के विकास के लिए हमें एनडीए का समर्थन करने की आवश्यकता है। काकोली दी ने पत्र सौंपा है। अभी तक वही गुट का नेतृत्व कर रही हैं।”

ममता गुट ने दावे को बताया गलत

इधर ममता के करीबी लोगों ने कहा कि बागियों के पास दो-तिहाई सांसदों का समर्थन नहीं है, जो दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों से बचने के लिए आवश्यक है। टीएमसी के बर्धमान-दुर्गापुर से सांसद कीर्ति आजाद ने एक पोस्ट में कहा, “भाजपा के डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट की झूठी और मनगढंत कहानी में 20 सांसदों के होने का दावा किया जा रहा है। असलमें भूपेंद्र यादव के घर हुई बैठक में 13 सांसद शामिल नहीं हुए थे जिनमें 12 लोकसभा से और एक राज्यसभा सांसद थे। इनके अलावा किसी और ने इस पर सहमति नहीं दी है।”

कीर्ति आजाद ने काकोली के चीफ व्हिप पर के दावे को गलत बताया। उन्होंने अध्यक्ष ओम बिरला को 20 मई को भेजे गए उस पत्र की कॉपी भी शेयर की, जिसमें टीएमसी संसदीय दल की चेयरपर्सन ममता बनर्जी ने कल्याण बनर्जी को चीफ व्हिप नियुक्त करने के फैसले की जानकारी दी थी।

उनकी पार्टी की सहयोगी महुआ मोइत्रा ने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए उनसे इस्तीफ़ा देने को कहा। उन्होंने कहा, “ये सांसद 2024 में TMC के टिकट पर जीते थे। जनादेश NDA के लिए नहीं था… अपनी सीटों से इस्तीफ़ा दें और BJP के टिकट पर चुनाव लड़ें। देखते हैं कि आप कितने बड़े हीरो हैं।”

उनकी पार्टी की सहयोगी महुआ मोइत्रा ने बागी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, “ये सांसद 2024 में टीएमसी के टिकट पर जीते थे। जनादेश एनडीए के लिए नहीं था, अपनी सीटों से इस्तीफा दें और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ें देखते हैं कि आप कितने बड़े हीरो हैं।”

दलबदल कानून के नियमों से बचने के लिए बागियों को कितने सांसद चाहिए?

बागी गुट को दल-बदल कानून से बचने के लिए कम से कम 19 सांसदों के समर्थन की जरूरत है। अगर 20 सांसद का समर्थन एनडीए को मिल जाता है तो संसद में भाजपा को बड़ी बढ़त मिलेगी और सदन में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी का खिताब टीएमसी खो देगी।

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तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को पार्टी की आंतरिक फूट के चलते नया झटका लगा है। विधायकों के बाद अब लोकसभा के 20 सांसदों ने भी पार्टी का अलग गुट बना लिया है। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि 20 सांसदों ने लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला को लिखे एक पत्र में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का समर्थन की बात कही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें