पुडुचेरी को 1962 में केंद्र शासित क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद कई दशकों तक उसकी राजनीति को उसके पड़ोसी राज्य तमिलनाडु की राजनीति की नकल माना जाता रहा। विधानसभा सीट के लिहाज से देश का सबसे छोटा राज्य भले ही पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में चर्चा का विषय न हो, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव बेहद अहम है। इसके परिणाम बड़े राजनीतिक संकेत देने वाले होंगे।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह चुनाव तय करेगा कि क्या सत्तारूढ़ गठबंधन अपनी पकड़ बनाए रखता है या विपक्ष एकजुट होकर सत्ता में वापसी कर पाता है। जहां यह चुनाव कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती है, वहीं राजग के लिए दक्षिण में विस्तार का अवसर भी है।
पुडुचेरी का इतिहास इसे देश के अन्य राज्यों से अलग बनाता है। वर्ष 2006 से पहले इसे पांडिचेरी के नाम से जाना जाता था। लगभग 138 वर्षों तक यह फ्रांसीसी उपनिवेश रहा और 1 नवंबर 1954 को भारत में शामिल हुआ। 16 अगस्त 1962 को इसे आधिकारिक रूप से केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा मिला।
चारों जिले अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित
इसकी एक अनोखी विशेषता यह भी है कि इसके चार जिले पुडुचेरी और कराईकल (तमिलनाडु), यानम (आंध्र प्रदेश) और माहे (केरल) भौगोलिक रूप से अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित हैं। इसकी बिखरी हुई भौगोलिक संरचना प्रशासन और राजनीति दोनों को विशिष्ट बनाती है। 2011 की जनगणना के अनुसार, यहां की जनसंख्या लगभग 13.94 लाख है, जिसमें 68 फीसद शहरी और 32 फीसद ग्रामीण आबादी है।
2024 में कांग्रेस जीती लोकसभा चुनाव
पुडुचेरी की राजनीतिक परिदृश्य की बात करें, तो वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने यहां की एक मात्र सीट जीतकर अपनी मौजूदगी मजबूत दिखाई, जहां वी वैथिलिंगम सांसद बने। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के ए नमस्सिवयम दूसरे स्थान पर रहे। 2021 के विधानसभा चुनाव में आल इंडिया एनआर कांग्रेस के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 30 में से 16 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इस गठबंधन के नेता एन रंगासामी चौथी बार मुख्यमंत्री बने।
एन रंगासामी पुडुचेरी की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा
एन रंगासामी पुडुचेरी की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा हैं। उन्होंने वर्ष 2011 में कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई और तब से स्थिर नेतृत्व का विकल्प बने हुए हैं। वे पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग भी लगातार उठाते रहे हैं। वहीं, विपक्ष की ओर से वी नारायणसामी के नेतृत्व में सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) चुनौती पेश कर रहा है, जिसमें कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम, सीपीआइ, सीपीआइ (एम) और वीसीके जैसे दल शामिल हैं।
एनडीए में एआइएनआरसी, भाजपा, अन्नाद्रमुक, पीएमके और एलजेके शामिल हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन अपेक्षाकृत मजबूत और संगठित नजर आता है। वहीं, एसपीए गठबंधन में कांग्रेस और द्रमुक के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान देखने को मिली है, जिससे विपक्ष की स्थिति कमजोर पड़ सकती है।
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