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कठुआ: सुप्रीम कोर्ट से बोला मुख्य आरोपी सांझीराम- मैं गैंगरेप पीड़िता के दादा जैसा

सांझीराम ने कोर्ट से कहा कि वह पीड़िता बच्ची के दादा की तरह हैं। उन्हें पुलिस अफसरों ने झूठा फंसा दिया है। सांझीराम और सभी आठ आरोपी पीड़िता बच्ची के साथ इंसाफ चाहते हैं। इसके अलावा उनकी मांग है कि मामले की जांच निष्पक्ष एजेंसी करे।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस के लिए ताशी)

जम्मू के कठुआ जिले में आठ साल की मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के बाद मुख्य आरोपी सांझीराम ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह बेकसूर है। इस मामले के असली गुनाहगारों को पकड़ने के लिए जांच सीबीआई से करवाई जानी चाहिए। बकरवाल समुदाय की आठ साल की बच्ची का अपहरण कथित तौर पर लोगों के ग्रुप ने जनवरी में किया था। आरोप है कि उसे कई दिनों तक बंधक बनाकर गैंगरेप किया गया। इसके बाद उसका सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी गई। लेकिन जब इस कांड की भयावहता की खबर पिछले महीने अप्रैल में पूरे देश मे फैली तो सनसनी फैल गई। पिछले महीने, देश भर में फैले गुस्से ने सरकार को मजबूर कर दिया कि वह बच्चों से बलात्कार करने वालों के लिए निर्धारित सजाओं में मृत्युदण्ड भी शामिल करें।

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य आरोपी सांझीराम और उसके बेटे विशाल ने अपने हलफनामे में सीबीआई जांच की मांग को दोहराया है। उनका तर्क है कि जम्मू कश्मीर की महबूबा मुफ्ती की सरकार के दो मंत्रियों ने भी मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। हालांकि अब वह ये मांग छोड़ चुके हैं। भाजपा नेताओं ने बाद में कहा था कि दो मंत्रियों को अपने अविवेक ​के लिए दंड मिलेगा, लेकिन सीबीआई जांच की मांग करने में आखिर बुराई क्या है? सांझीराम ने कोर्ट से कहा कि वह पीड़िता बच्ची के दादा की तरह हैं। उन्हें पुलिस अफसरों ने झूठा फंसा दिया है। सांझीराम और सभी आठ आरोपी पीड़िता बच्ची के साथ इंसाफ चाहते हैं। इसके अलावा उनकी मांग है कि मामले की जांच निष्पक्ष एजेंसी करे, जिससे आरोपियों के साथ अन्याय न हो। मामले के सभी आठ आरोपियों ने केस की सुनवाई चंडीगढ़ कोर्ट में ट्रांसफर करने का विरोध भी किया है।

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उन्होंने कहा कि मामले के 221 गवाह हैं। उन सभी के लिए कठुआ से 265 किमी दूर स्थित चंडीगढ़ में गवाही देने के लिए जाना मुश्किल होगा। उसने कहा कि पीड़िता के परिवार को गांव में कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि केस के ट्रायल को ट्रांसफर करने का कोई आधार नहीं बनता है। इसके बावजूद उसने दावा किया कि मामले के आरोपियों को जान का खतरा है और पीड़ित पक्ष को भय का अनुमान लगाकर मामले की सुनवाई चंडीगढ़ भेजना गलत है। सांझीराम ने यह भी कहा कि पीड़ित पक्ष की वकील दीपिका सिंह राजावत जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। ट्रायल कोर्ट की वकील नहीं है इसलिए उन्हें दी गई सुरक्षा भी हटाई जाए।

दीपिका सिंह राजावत ने इससे पहले अपनी जान के खतरे के बारे में कहा था। उन्होंने कहा, मैं नहीं जानती कि मैं कितने दिन तक जिन्दा रहूंगी। मेरे साथ रेप हो सकता है, मेरी आत्मसम्मान को ठेस पहुंच सकती है। मेरी हत्या हो सकती है, मुझे नुकसान पहुंचाया जा सकता है। मुझे कल धमकियां दी गई हैं कि हम तुम्हें माफ नहीं करेंगे। मैं कल सुप्रीम कोर्ट को बताऊंगी कि मैं खतरे में हूं। ये बातें मिस राजावत ने पिछले महीने उस वक्त कही थीं जब पीड़िता के पिता ने सु्प्रीम कोर्ट से मामले की सुनवाई कठुआ कोर्ट में करवाने के लिए कहा था।

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