राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कथित जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व कांग्रेस मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार किया है। यह मामला फर्जी पूर्णता प्रमाणपत्र (Completion Certificates) और करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडरों से जुड़ा हुआ है।

राजस्थान एसीबी ने गुरुवार तड़के पूर्व कांग्रेस मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार किया। इससे करीब एक महीने पहले इसी मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया गया था।

अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी जल जीवन मिशन घोटाले के मामले में जोशी को गिरफ्तार किया था। वह करीब सात महीने जेल में रहे थे। इसके बाद दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली थी। महेश जोशी को सुबह करीब 5:30 बजे जयपुर स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया। पिछली कांग्रेस सरकार में जोशी लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) मंत्री थे जबकि सुबोध अग्रवाल अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर रहते हुए PHED का प्रभार संभाल रहे थे।

महेश जोशी पर क्या हैं आरोप

एसीबी के अनुसार, एक फर्म मालिक ने कथित तौर पर भारतीय रेलवे कंस्ट्रक्शन इंटरनेशनल लिमिटेड (IRCON) द्वारा जारी फर्जी पूर्णता प्रमाणपत्र और अवॉर्ड लेटर को निविदा दस्तावेजों के साथ जमा किया था ताकि जल जीवन मिशन के तहत ठेके हासिल किए जा सकें। आरोप है कि यह सब लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (Public Health Engineering Department) के वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया।

जब PHED के एडिशनल चीफ इंजीनियर ने फर्म को जारी सर्टिफिकेट वेरिफाई किए तो IRCON बेंगलुरु के कार्यालय ने उन्हें नकली करार लिया। बाद में खुलासा हुआ कि इन फर्जी पूर्णता प्रमाणपत्रों (fake completion certificates) के जरिए करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल कर करोड़ों रुपये का कथित भ्रष्टाचार किया गया।

सुबोध अग्रवाल और जोशी के अलावा एसीबी इस मामले में 10 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर चुकी है। ये लोग सरकारी इंजीनियर और अधिकारी हैं। इनमें दिनेश गोयल, के डी गुप्ता, सुभांशु दीक्षित, सुनील शर्मा, निरिल कुमार, विशाल सक्सेना, अरुण श्रीवास्तव, डी के गौड़, महेंद्र प्रकाश सोनी और एक अन्य शख्स मुकेश पाठक शामिल हैं।

इसके अलावा तीन अन्य आरोपियों के खिलाफ भी स्टैंडिंग वारंट हैं जो कथित तौर पर अभी फरार हैं। इन वारंट को एक अदालत द्वारा जारी किया गया है। ये तीनों सरकारी अधिकारी -मुकेश गोयल, जितेंद्र शर्मा और एक अन्य शख्स संजीव गुप्ता शामिल हैं।

11 करोड़ की नकदी और सामान जब्त

ईडी ने सबसे पहले इस मामले की जांच के लिए PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत सितंबर 2023 में जयपुर, अलवर, नीमराना, बहरोर और शाहपुरा में अलग-अलग जगहों पर तलाशी की थी। अब तक 70 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की जा चुकी है और करीब 11 करोड़ रुपये की वैल्यू के नकदी और सामान जब्त किए गए हैं।

2023 में ईडी की छापेमारी से कई महीने पहले बीजेपी नेता किरोड़ी लाल मीणा (तत्कालीन राज्यसभा एमपी) ने दावा किया था कि PHED में 20000 करोड़ का घोटाला हुआ है। उन्होंने दावा किया था कि महेश जोशी, एसीएस सुबोध अग्रवाल और कई अन्य लोग इसमें शामिल हैं।

24 अगस्त 2023 को पहली जांच मई 2024 में भी सीबीआई ने इस घोटाले के संबंध में एक FIR दर्ज की थी। मई 2024 में सीबीआई ने भी इस घोटाले के संबंध में एफआईआर दर्ज की थी। यह कार्रवाई 24 अगस्त 2023 को दर्ज की गई प्रारंभिक जांच पूरी होने के लगभग आठ महीने बाद की गई।