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बजाज ग्रुप को ऑटो पार्ट्स बेचकर अरबपति बन गये ये बिजनेसमैन

महात्मा गांधी स्वतंत्रता सेनानी जमनालाल बजाज को अपना 'पांचवां बेटा' मानते थे। जमनालाल बजाज ने ही 1926 में बजाज ग्रुप की स्थापना की थी। जमनालाल बजाज के बाद उनके पुत्र राहुल बजाज ने बजाज ग्रुप को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

Rahul bajaj, Anurang Jain, Tarang jain, Mahatma Gandhi, Mahatma Gandhi great grandsons, bajaj, bajaj group, bajaj scooter Billionaire, Business news, jansatta, Hindi newsउद्योगपति राहुल बजाज के भांजे अनुराग और तरंग जैन ने बिजनेस की दुनिया में अपना मुकाम हासल किया। (तस्वीर में दिख रहे हैं उद्योगपति राहुल बजाज, Source-Indian express)

महात्मा गांधी के ‘पांचवें पुत्र’ जमनालाल बजाज के परिवार में दो और शख्सियतों ने बिजनेस की दुनिया में अपना झंडा गाड़ा है। ये दोनों शख्स हैं अनुराग जैन और तरंग जैन। रिश्ते में भाई अनुराग और तरंग ने ऑटो पार्ट्स व्यवसाय में बड़ी कामयाबी हासिल की है और अरबपतियों की लिस्ट में शामिल हो गये हैं। खास बात ये है कि इन दोनों ने अपने रिश्तेदार और बजाज ग्रुप को ही अपने ऑटो पार्टस सप्लाई किये और आज अरबपति बन गये हैं।

बता दें कि जंग ए आजादी के दौरान महात्मा गांधी स्वतंत्रता सेनानी जमनालाल बजाज को अपना ‘पांचवां बेटा’ मानते थे। जमनालाल बजाज ने ही 1926 में बजाज ग्रुप की स्थापना की थी। जमनालाल बजाज के बाद उनके पुत्र राहुल बजाज ने बजाज ग्रुप को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाया। बजाज स्कूटर बनाने वाली दुनिया की टॉप कंपनियों में शामिल है। 78 साल के राहुल बजाज ही इस वक्त बजाज ग्रुप के कर्ता-धर्ता हैं। अनुराग और तरंग जैन रिश्ते में राहुल बजाज के भांजे हैं। इस लिहाज से ये दोनों युवा बिजनेसमैन महात्मा गांधी के परपोते भी कहे जा सकते हैं।

अंग्रेजी वेबसाइट ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अनुराग जैन एंड्युरेंस टेक्नॉलजीज लिमिटेड से जुड़े हैं, और तरंग जैन वैरोक ग्रुप से जुड़े हैं। ये दोनों ही कंपनियां ऑटो पार्टस का निर्माण करती हैं और बजाज ग्रुप को अपने सामान की सप्लाई करती हैं। इन दोनों कंपनियों ने बजाज ग्रुप जैसे बड़ी फर्म से हाथ मिलाकर अपनी किस्मत बदल ली। ब्लूमबर्ग बिलियनर्स इंडेक्स के मुताबिक अनुराग जैन की नेटवर्थ 1.1 बिलियन डॉलर है, जबकि तंरग की नेटवर्थ भी 1.1 बिलियन डॉलर है। हालांकि बदलते जमाने के साथ कदमताल करते हुए ये कंपनियां अब बाइक बनाने वाली दूसरी कंपनियों से भी अपने पार्ट्स को बेचने के लिए समझौता कर रही हैं। अनुराग और तरंग के पिता नरेश चन्द्र जैन पहले बजाज ग्रुप को इलेक्ट्रिक स्विच की सप्लाई करते थे। 1985 में उन्होंने इस काम को छोड़ दिया और बेटे अनुराग के साथ काम करने लगे। इसके बाद इन कंपनियों ने और भी तरक्की की।

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