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महात्मा गांधी के पड़पोते बोले, आरएसएस का विरोध करना होगा वर्ना हम गांधी के कार्यकर्ता ही कहने के लायक नहीं रहेंगे

'मैं आरएसएस से नफरत नहीं करता। लेकिन आरएसएस से मेरा विरोध है...उस विचार से मेरा विरोध है जो इस देश को बांटता फिर रहा है...मैं ऐसा नहीं कर रहा हूं कि दूसरे ऐसा नहीं करते। हम उनका भी विरोध करते हैं। विरोध करना होगा वर्ना हम गांधी के कार्यकर्ता ही कहने के लायक नहीं रहेंगे।'

महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी। (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा को देश को बांटने वाला बताया है। पोरबंदर में महात्मा गांधी की पत्नी, कस्तूरबा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर दो दिवसीय कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए तुषार गांधी ने यह बात कही।

आरएसएस की विचारधारा से लड़ने का आह्वान करते हुए तुषार ने आगे कहा ‘गांधीवादियों की एकमात्र निष्ठा महात्मा गांधी द्वारा परिकल्पित भारत के प्रति हो सकती है। गांधीवादी निष्पक्ष रहते हैं, लेकिन वर्तमान समय में आरएसएस गांधी के आदर्श विचारधाराओं को चुनौती दे रहा है।’

उन्होंने आगे का ‘मैं आरएसएस से नफरत नहीं करता। लेकिन आरएसएस से मेरा विरोध है…उस विचार से मेरा विरोध है जो इस देश को बांटता फिर रहा है…मैं ऐसा नहीं कर रहा हूं कि दूसरे ऐसा नहीं करते। हम उनका भी विरोध करते हैं। विरोध करना होगा वर्ना हम गांधी के कार्यकर्ता ही कहने के लायक नहीं रहेंगे।’

तुषार गांधी ने कहा ‘गांधीवादियों को लोकतंत्र की रक्षा में अपनी भूमिका निभानी होगी। लोग आएंगे और जाएंगे। हम एक मजबूत लोकतंत्र हैं इसलिए हमें डरने की जरूरत नहीं। हमने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी बहिष्कार किया था जब वह एक तानाशाह की तरह बर्ताव करने लगी थीं। लेकिन अब इस तरह के विचारों में कमी आई है इसलिए हमें फिर से इसे मजबूत करना होगा।’

तुषार ने आरएसएस को दक्षिणपंथी संगठन बताते हुए महात्मा गांधी की हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा ‘मैंने अपनी किताब ‘लेट्स किल गांधी’ में नथुराम गोडसे को आरएसएस के दिशा-निर्देशों पर ही महात्मा गांधी का हत्यारा करार दिया है। लेकिन आरएसएस हमेशा से इसका विरोध करता रहा है।’

उन्होंने आगे कहा ‘हमें कस्तूरबा गांधी के योगदान को भी नहीं भूलना चाहिए। भारत छोड़ों आंदोलन के दौरान 1942 में कस्तूरबा गांधी को गिरफ्तारी कर लिया गया। बाद में उन्हें पुणे की जेल में भेज दिया गया जिसके बाद वह शहीद हो गईं। लेकिन हम उन्हें एक शहीद का दर्जा नहीं देते।’

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