महात्मा गांधी, भगत सिंह, पी. श्रीरामुलु, इरोम शर्मिला, अन्ना हजारे… और अब सोनम वांगचुक। यह सूची लंबी है, वजहें अलग-अलग हैं लेकिन विरोध जताने और अपनी बात सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने का तरीका एक ही है- अनशन करना।

सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य ठीक नहीं था और उनका वजन लगातार गिर रहा था। इसे देखते हुए पुलिस ने शनिवार सुबह उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के आरोप को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में वांगचुक पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे।

महात्मा गांधी ने 18 बार की भूख हड़ताल

महात्मा गांधी विरोध दर्ज कराने के लिए अनशन करने के समर्थक थे। गांधी ने अलग-अलग वजहों से 18 बार अनशन किया। उनका सबसे लंबा उपवास 21 दिन तक चला। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता, छुआछूत के खिलाफ और बिना किसी आरोप के अंग्रेजों द्वारा हिरासत में लिए जाने के विरोध में अनशन किया।

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आंध्र प्रदेश की मांग को लेकर श्रीरामुलु का अनशन

गांधीजी के भूख हड़ताल के विचार का उनके अनुयायियों पर गहरा असर पड़ा, जिनमें स्वतंत्रता सेनानी पी. श्रीरामुलु प्रमुख थे। श्रीरामुलु ने आंध्र राज्य के गठन में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अक्टूबर 1952 में तेलुगु भाषी लोगों के लिए अलग राज्य की मांग करते हुए भूख हड़ताल शुरू की। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने श्रीरामुलु की मांग का विरोध किया था। 58वें दिन श्रीरामुलु का निधन हो गया था।

श्रीरामुलु के निधन के बाद हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए और केंद्र सरकार को आंध्र प्रदेश बनाने की घोषणा करनी पड़ी। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर अजय गुडावर्थी के अनुसार, गांधी अनशन को सिर्फ सरकार पर दबाव बनाने का जरिया नहीं मानते थे।

116 दिनों बाद भगत सिंह ने तोड़ा अनशन

आजादी से पहले देश में भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त और जतींद्रनाथ दास को 1929 में जेल की हालत सुधारने के लिए भूख हड़ताल करने के लिए याद किया जाता है। उन्हें जॉन सॉन्डर्स की हत्या के मामले में जेल में रखा गया था। उन्होंने मांग की कि उन्हें राजनीतिक कैदियों का दर्जा दिया जाए और खाने-पीने, कपड़ों, साफ-सफाई से जुड़ी रोजमर्रा की चीजें और किताबें एवं अखबार मिलने के मामले में उनसे बराबरी का व्यवहार किया जाए। जतींद्रनाथ दास की 63 दिनों के अनशन के बाद मृत्यु हो गयी थी।

भगत सिंह ने 116 दिनों बाद अपना अनशन तोड़ा लेकिन ऐसा उन्होंने दूसरे भारतीय कैदियों के लिए जेल में अहम सुधार सुनिश्चित करने के बाद ही किया।

इरोम शर्मिला ने की थी सबसे लंबी भूख हड़ताल

भूख हड़ताल की इस कड़ी में इरोम शर्मिला भी शामिल हैं। इरोम शर्मिला ने ‘सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम ‘ (अफस्पा) के विरोध में 16 साल तक भूख हड़ताल की थी। दुनिया में सबसे लंबी भूख हड़ताल का रिकॉर्ड उनके नाम है। उन्हें नाक में लगी ट्यूब के जरिये जबरन लिक्विड रूप में भोजन दिया जाता था। इसे फोर्स-फीडिंग कहा जाता है।

इरोम शर्मिला ने पांच नवंबर, 2000 को अपनी भूख हड़ताल शुरू की थी। नौ अगस्त, 2016 को अपना अनशन खत्म करने से पहले उन्हें भारत के अलग-अलग राज्यों में कई बार गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने ‘अफस्पा’ के बारे में राजनीतिक अलख जगाई लेकिन अपनी मूल मांगें वह नहीं मनवा सकीं। 2017 में वह मणिपुर के विधानसभा चुनाव में उतरीं लेकिन उन्हें 100 से भी कम वोट मिले।

अन्ना हजारे ने 11 दिन तक की थी भूख हड़ताल

भ्रष्टाचार-रोधी कानून बनाने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे अगस्त 2011 में दिल्ली में भूख हड़ताल पर बैठे थे। यह भूख हड़ताल 11 दिनों तक चली। उनकी भूख हड़ताल को काफी समर्थन मिला।

जीडी अग्रवाल ने 111 दिन तक किया अनशन

2018 में पर्यावरणविद जीडी अग्रवाल ने गंगा नदी के अविरल प्रवाह तथा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली परियोजनाओं को बंद करने की मांग को लेकर 111 दिन का अनशन किया था। इस अनशन के कारण 68 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

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सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसे लेकर उनकी पत्नी गीतांजलि अंग्मो का रिएक्शन आया है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।