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जब पागल कुत्तों की हत्या को गांधीजी ने ठहराया था जायज, बताया था ‘न्यूनतम हिंसा’

मशहूर कपड़ा व्यवसायी अंबालाल साराभाई एक बार रैबीज संक्रमित पागल कुत्तों की समस्या से काफी परेशान हो गए थे। उन्होंने ऐसे कुत्तों को मारने का हुक्म दे दिया था, जिसपर काफी विवाद हो गया था। अंबालाल ने इस मसले पर महात्मा गांधी से मुलाकात कर उन्हें अपनी परेशानियों से अवगत कराया था।

महात्मा गांधी का जन्म दो अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अहिंसा को पुजारी माना जाता है। लेकिन, एक बार गांधीजी ने रैबीज से संक्रमित पागल कुत्तों की हत्या को जायज ठहराया था। उन्होंने इसे न्यूनतम हिंसा करार दिया था। दरअसल, अक्टूबर, 1926 में मशहूर कपड़ा व्यवसायी अंबालाल साराभाई मिल परिसर में रैबिज संक्रमित खतरनाक कुत्तों की समस्या से बेहद परेशान हो गए थे। साराभाई ने इससे तंग आकर ऐसे 60 कुत्तों को मारने आदेश दे दिया था। इस पर हंगामा मच गया था। परेशान अंबालाल साराभाई ने तब साबरमती आश्रम जाकर गांधीजी से मिले और उन्हें अपनी समस्या के बारे में बताया। उन्होंने अहिंसा के पुजारी को कुत्तों को मारने का हुक्म देने की भी जानकारी दी थी। साराभाई ने गांधीजी को कहा था, ‘मुझे जब सरकार, नगर निगम और महाजनों की ओर से इस मसले पर कोई सलाह नहीं मिली तब इस पर (कुत्तों को मारने) आना पड़ा।’ गांधीजी ने उसी महीने प्रकाशित ‘यंग इंडिया’ में इस मुद्दे पर एक लेख लिखा था।

महात्मा गांधी ने लेख में लिखा था, ‘इस बात में कोई दो राय नहीं कि हिंदुत्व में जीवित प्राणी की हत्या को पाप माना गया है। मेरी समझ में हर धर्म इस सिद्धांत से सहमत होगा। समस्या तब आती है जब कोई व्यक्ति इसे व्यवहार में लाने में जुट जाता है। हमलोग कीटाणुनाशकों के इस्तेमाल से कीटाणुओं को मारना अपना कर्तव्य समझते हैं। यह हिंसा है फिर भी यह दायित्व है। रैबिज संक्रमित कुत्तों को खत्म करना न्यूनतम हिंसा है। जंगलों में रहने वाला इन कुत्तों को समाप्त नहीं कर सकता है। शहरों में रहने वाले लोग प्राणियों की रक्षा के लिए जिम्मेदार हैं। ऐसे में संक्रमित कुत्तों को मारना दायित्वों का टकराव है। यदि वह कुत्ते को मारता है तो वह पाप करेगा और यदि वह ऐसा नहीं करता है तो वह उससे ज्यादा गंभीर पाप होगा।’ बता दें कि हाल के दिनों में केरल में आवारा कुत्तों को मारने पर बवाल मच गया था। कुत्तों ने कई लोगों को काटकर घायल कर दिया था। कुछ मामलों में तो पीड़ित की जान भी चली गई थी। देश के कई हिस्सों में कुत्तों की समस्या बेहद गंभीर हो जाती है। ऐसे में उसे मारने को लेकर काफी विवाद होता है।

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