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Lynching पर पीएम मोदी को चिट्ठी लिखने वाले छात्रों पर बड़ा फैसला, यूनिवर्सिटी ने वापस लिया निष्कासन

छात्रों को निष्कासित करने से जुड़ा लेटर 9 अक्टूबर को जारी हुआ था। इसमें कहा गया था कि धरना देने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई 2019 विधानसभा चुनाव के लिए लागू 'मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन' और 'न्यायिक प्रक्रिया में दखल' की वजह से की गई।

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महाराष्ट्र के वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV) ने चार दिन पहले चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का हवाला देते हुए धरना देने और पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखने वाले छह छात्रों को निष्कासित कर दिया था। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रविवार को इस फैसले को वापस ले लिया। बता दें कि इससे पहले, वर्धा के कलेक्टर विवेक भीमनवार ने कहा था कि यूनिवर्सिटी के पास मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू करने का अधिकार नहीं है।

निष्कासित छात्रों को वापस लेने का फैसला रविवार को एक अहम बैठक में लिया गया। इसमें वाइस चांसलर रजनीश शुक्ला, एक्जीक्यूटिव रजिस्ट्रार कादर नवाज खान, सभी विभागों के डीन, प्रॉक्टर और हॉस्टलों के पांच वॉर्डन शामिल हुए। यूनिवर्सिटी की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘9 अक्टूबर को जारी लेटर में तकनीकी विरोधाभास के मद्देनजर और छात्रों व रिसर्चरों को न्याय देने के लिए, छह छात्रों का निष्कासन का फैसला वापस लिया जाता है।’

बता दें कि द इंडियन एक्सप्रेस ने शनिवार को इस बारे में खबर भी छापी थी। छात्रों को निष्कासित करने से जुड़ा लेटर 9 अक्टूबर को जारी हुआ था। इसमें कहा गया था कि धरना देने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई 2019 विधानसभा चुनाव के लिए लागू ‘मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन’ और ‘न्यायिक प्रक्रिया में दखल’ की वजह से की गई।

छात्रों ने पीएम मोदी को जो चिट्ठी भेजी थी, उसमें जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म करने के फैसले का विरोध किया गया था। इसके अलावा, मॉब लिंचिंग की घटनाओं, रेप के आरोपियों को कथित तौर पर बचाए जाने, सरकारी उपक्रमों के बेचे जाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कथित तौर पर दबाए जाने आदि का विरोध किया गया था। जिन 6 छात्रों को निकाला गया, उनमें से तीन दलित जबकि बाकी तीन ओबीसी समुदाय से ताल्लुक रखते थे।

वाइस चांसलर शुक्ला ने कहा कि निष्कासन वापस लेने का फैसला छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। धरना देने की जिस घटना के बाद ऐक्शन लिया गया, उसकी भी जांच करने के लिए एक इंक्वायरी कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में अध्यापकों से लेकर यूनिवर्सिटी अफसर तक होंगे।

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