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शिवाजी मेमोरियल के लिए कई झूठ बोलकर महाराष्ट्र सरकार ने ली मंजूरी- RTI से खुलासा

फरवरी 2015 में MoEF की मंजूरी की मांग करते हुए गेटवे ऑफ इंडिया से दूरी 2 किलोमीटर बताई गई थी, जो कि वास्त में 12 किलोमीटर थी।

Author Updated: October 1, 2019 11:17 AM
अरब सागर में शिवाजी के मेमोरियल के लिए बना कॉन्सेप्ट प्लान वाली तस्वीर। (फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

दक्षिण मुंबई में अरब सागर में शिवाजी का भव्य स्मारक बनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कई दांव-पेच का इस्तेमाल किया है। राज्य सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) ने केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय (MoEF) ने इजाजत हासिल करने की प्रक्रिया में कई गलत रास्ता अपनाया है। यह खुलासा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को मिली जानकारी से हुआ है। उदाहरण के लिए, राज्य पीडब्ल्यूडी ने प्रस्तावित साइट की दूरी नरीमन पॉइंट और राजभवन के बीच चट्टानी आउटक्रॉप (Outcrop) को बताया है। फरवरी 2015 में MoEF की मंजूरी की मांग करते हुए गेटवे ऑफ इंडिया से दूरी 2 किलोमीटर बताई गई थी, जो कि वास्त में 12 किलोमीटर थी।

शिवाजी का स्मारक न सिर्फ सत्ताधारी पार्टी बीजेपी-शिवसेना के लिए राजनीतिक रूप से अहम है, बल्कि विपक्षी दलों के लिए भी काफी राजनीतिक अहमियत रखता है। यही वजह है कि सरकार इसे आनन-फानन में किसी भी तरह अंजाम देने की जुगत में लगी है। गौरतलब है कि पीडब्ल्यूडी द्वारा विचार के लिए प्रस्तावित वैकल्पिक स्थल गंभीर विकल्प नहीं थे, क्योंकि वे या तो हेरिटेज साइट्स (एलीफेंटा गुफा) हैं, जहां निर्माण की अनुमति नहीं है या नौसैनिक क्षेत्र (ओएस्टर रॉक) जो नागरिकों के लिए सीमा से बाहर हैं, या उबड़ खाबड़ इलाकों वाले हैं।

इसके अलावा, पीडब्लूडी ने इस साइट के लिए एक पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) रिपोर्ट शुरू की थी, जो कि एमओईएफ से महीनों पहले हरी झंडी चाहती थी। पीडब्ल्यूडी द्वारा महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिरकरण (MCZMA) के जरिए MoEF के विचार के लिए भेजे गए ईआईए के दो वैकल्पिक साइट किसी भी तीन वैकल्पिक साइटों की सूची में नहीं थे। MoEF ने MCZMA द्वारा पहले से भेजी गई चार विकल्पों की सूची पर विचार-विमर्श न करके पहले से तय EIA पर आधारित परियोजना को मंजूरी दे दी।

यह सब राज्य सरकार के पत्राचार के बीच हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री से लेकर एमओईएफ तक शामिल थे। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “भूमिपूजन” को अंतिम रूप देने की अनुमति देने पर जोर दिया गया था। संरक्षण अधिनियम ट्रस्ट (CAT) द्वारा दायर एक विशेष अवकाश याचिका पर जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद प्रतिमा पर काम फिलहाल रुका हुआ है।

आरटीआई के तहत द इंडियन एक्सप्रेस को मिले दस्तावेजों के मुताबिक, MoEF ने 11 दिसंबर 2014 को एक ड्राफ्ट अधिसूचना जारी करने के बाद, सीआरजेड- IV क्षेत्रों में स्मारक/ ऐतिहासिक स्थल के निर्माण एवं रख-रखाव की अनुमति दी। इस दौरान राज्य पीडब्ल्यूडी को प्रस्तावित CRZ क्षेत्र में प्रतिमा स्थापित करने के लिए जरूरी तर्क, वैकल्पिक डिटेल और विभिन्न मांपदंडों को पेश करने के लिए कहा गया था। PWD को “वेटेज मैट्रिक्स’ के सभी विकल्पों को MCZMA के सक्षम पेश करना था, जो MoEF की सूची से विशेष साइट को प्रस्तावित करता।
केंद्रीय मंत्रालय तब इसे एक इन-हाउस विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के समक्ष रखता है, जो मंत्रालय द्वारा निर्धारित संदर्भ (ToR) की शर्तों के तहत ईआईए तैयार करने के लिए सरकार से अनुमति देने के लिए कहता है। ToR के अनुपालन का पता लगाने के बाद अंतिम मंजूरी दी गई है।

20 जनवरी 2015 को, पीडब्ल्यूडी ने प्रत्येक के लिए एक ‘वेटेज मैट्रिक्स’ के साथ नौ संभावित साइटों की एक सूची प्रस्तुत की। पीडब्ल्यूडी की सूची में वर्तमान साइट को सबसे उपयुक्त के रूप में प्रस्तावित किया गया। लेकिन तीन दिन बाद हुई एमसीजेडएमए की बैठक के कुछ मिनटों में ही पता चला कि केवल चार साइटों पर चर्चा की गई थी और वर्तमान साइट को एमओईएफ की सिफारिश की गई थी।

जानकारी के मुताबिक प्रत्येक साइट के लिए छह मापदंडों पर विचार किया गया था। जिनमें गेटवे ऑफ इंडिया से दूरी, स्थान की उपलब्धता, निर्माण की व्यवहार्यता, हेरिटेज की संरचना या स्थल, पर्यावरण शामिल थे। पीडब्लूडी के प्रस्तुतिकरण के अनुसार गेटवे ऑफ इंडिया से प्रस्तावित किमी की दूरी को 2 किमी बताया गया है। हालांकि, 2014 में पीडब्ल्यूडी ने अपने यातायात के अध्ययन में कहा कि प्रस्तावित साइट गेटवे ऑफ इंडिया से 12 किमी दूर है।

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