Maharashtra Zilla Parishad Election Result 2026: महाराष्ट्र भर की जिला परिषदों में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी साफ तौर पर सबसे आगे निकल गई। वहीं नतीजों से यह भी पता चला कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार की पार्टी को भी काफी फायदा मिला। इन दोनों पार्टियों ने एक ही चिन्ह पर गठबंधन में ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा था।

राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक, जिला परिषद चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने 12 जिलों की 731 सीटों में से 225 सीटें जीतीं, जबकि एनसीपी को 165 सीटें मिली। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 162 सीटें हासिल कीं। एनसीपी (SP) ने 43 सीटें जीतीं। ये नतीजे एनसीपी के लिए इसलिए भी खास हैं क्योंकि ये पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के कुछ हफ्तों बाद आए हैं। उनके निधन से दोनों पार्टियों के बीच सुलह के प्रयास विफल हो गए थे।

बीजेपी ने 12 जिला परिषदों में से छह और 125 पंचायत समितियों में से 50 में जीत हासिल की और इन परिणामों से राज्य भर में खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की बढ़ती पकड़ और मजबूत होती है। इन्हें अभी तक एनसीपी और कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा, “बीजेपी ने महाराष्ट्र में नंबर एक पार्टी के रूप में अपनी स्थिति स्थापित कर ली है। जनादेश ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वीकार्यता को दर्शाता है।” उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन सहयोगी शिवसेना और एनसीपी ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है।

बीजेपी छत्रपति संभाजीनगर, सोलापुर, परभणी, सिंधुदुर्ग, सतारा और धाराशिव में जिला परिषदों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना ने रायगढ़ और रत्नागिरी में जीत हासिल की और एनसीपी ने पुणे और कोल्हापुर में जीत हासिल की।

2017 में क्या रहे थे नतीजे?

2017 के जिला परिषद चुनावों में बीजेपी ने 727 सीटों में से 141 सीटें जीतीं, जबकि एनसीपी (तत्कालीन अविभाजित) ने 217 और शिवसेना (अविभाजित) ने 148 सीटें हासिल कीं। कांग्रेस 126 सीटों पर विजयी रही, जबकि अन्य दलों ने 72 सीटें जीतीं। जिला परिषद चुनावों में कुल 23 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। 2017 के पंचायत समिति चुनावों में बीजेपी ने 125 पंचायत समितियों में से 284 सीटें जीती थीं, जहां चुनाव हुए थे।

एनसीपी के लिए क्या कारगर साबित हुआ?

पुणे में दोनों एनसीपी दलों द्वारा एक साथ चुनाव लड़ने और कम से कम 10 अन्य जिलों में सीटों के बंटवारे में कोऑर्डिनेट करने के फैसले से उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में खासतौर पर पश्चिमी महाराष्ट्र में अपने प्रदर्शन को पुनर्जीवित करने में मदद मिली है। ग्रामीण स्थानीय निकाय व्यवस्था को अजित पवार और उनके चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाले गुटों के बीच औपचारिक विलय की तैयारी के रूप में देखा जा रहा था। पवार सीनियर ने पहले कहा था कि जिला परिषद के नतीजों की घोषणा के बाद 12 फरवरी को विलय की घोषणा की जाएगी।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि अजित ने गठबंधन और विलय दोनों के लिए जोर दिया था, यह तर्क देते हुए कि वोटों के विभाजन से दोनों पार्टियों का राजनीतिक दायरा सिकुड़ रहा है, एक ऐसा आकलन जो पश्चिमी महाराष्ट्र के परिणामों से सही साबित होता दिख रहा है। शरद पवार की पार्टी के एक विधायक ने कहा, “पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व ने मिलकर चुनाव लड़ने या सीटों के बंटवारे पर आपसी सहमति बनाने का फैसला लिया था। इससे पार्टी को काफी फायदा हुआ है।”

पुणे में एनसीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी

पुणे में एनसीपी 73 सदस्यीय जिला परिषद में पूर्ण बहुमत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने 40 से ज्यादा सीटें जीतीं। अंबेगांव में कुछ फ्रेंडली फाइट को छोड़कर, दोनों दलों ने एक ही चुनाव चिन्ह घड़ी पर चुनाव लड़ा। ऐसा लगता है कि इस रणनीति ने वोटों को एकजुट किया और स्पष्ट बहुमत दिलाया। हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों में मिली हार के बाद, दोनों पार्टियों के बीच बातचीत में तेजी आई और पवार परिवार के गृह क्षेत्र पुणे को टेस्टिंग ग्राउंड के तौर पर चुना गया। जनवरी में, एनसीपी (एसपी) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने घोषणा की कि दोनों पक्ष ग्रामीण स्थानीय निकाय चुनावों में एक साथ चुनाव लड़ेंगे।

कोल्हापुर में भी इसी तरह की रणनीति कारगर साबित हुई, जहां एनसीपी 68 सदस्यीय जिला परिषद में 20 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। कांग्रेस को 15, बीजेपी को 13 और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को नौ सीटें मिलीं। महायुति द्वारा जिला परिषद अध्यक्ष पद के लिए एनसीपी के उम्मीदवार का समर्थन किए जाने की संभावना है।

सांगली में हालांकि किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई, फिर भी एनसीपी के दोनों गुटों ने आपसी सहमति से तय सीटों पर चुनाव लड़ा। एनसीपी (एसपी) ने 19 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, जबकि कांग्रेस 11 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। बीजेपी को 15 सीटें मिलीं, जबकि एनसीपी ने चार सीटें जीतीं। संभावना है कि एनसीपी (एसपी) कांग्रेस के समर्थन से जिला परिषद का गठन करेगी। सतारा में भी एनसीपी ने अपने सहयोगियों के साथ समझौता बनाए रखा और 18 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी।

बीजेपी के मंत्री चन्द्रशेखर बावनकुले ने कहा कि फैसले ने पार्टी की संगठनात्मक ताकत की पुष्टि की है, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उद्धृत करते हुए, “बीजेपी का कार्यकर्ता कभी हारता नहीं या तो जीतता है या सीखता है।”

मुख्यमंत्री ने पार्टी की तैयारियों पर कड़ी नजर रखी

2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के उलट, जहां ध्रुवीकरण वाले नारे प्रमुख थे, मुख्यमंत्री फड़नवीस ने स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान गांवों, कस्बों और शहरों के विकास पर जोर दिया। सूत्रों ने बताया कि अजित पवार के निधन के बाद मुख्यमंत्री ने 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों में तय की गई 30 रैलियां रद्द कर दी, लेकिन उन्होंने पार्टी की तैयारियों पर कड़ी नजर रखी।

बीजेपी ने अपने प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण और कार्यकर्ताओं की एक टीम को जिलों के दौरे पर भेजा। चव्हाण ने कहा, “हमारे पास बूथ लेवल से लेकर राज्य लेवत तक समर्पित कार्यकर्ता हैं, चाहे वह लोकसभा सीट हो या पंचायत समिति। वे हर चुनाव में उसी जोश और लगन से काम करते हैं।” उन्होंने आगे बताया कि पार्टी ने घर-घर जाकर प्रचार किया।

एमवीए के लिए बड़ा झटका

ये नतीजे महाविकास अघाड़ी के लिए एक बड़ा झटका हैं। ऐसा इस वजह से क्योंकि कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। एमवीए मराठों की असंतोष का फायदा उठाकर बीजेपी के बढ़ते प्रभाव, खासकर पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में, को रोकने की उम्मीद कर रही थी। कांग्रेस को 731 सीटों में से केवल 55 सीटें मिलीं, जबकि शिवसेना (यूबीटी) को 43 और एनसीपी (एसपी) 26 सीटें मिलीं। बता दें कि भारतीय जनता पार्टी ने बीएमसी चुनाव में बंपर जीत हासिल की थी। इसके बाद अब रितु गायकवाड़ को मेयर का उम्मीदवार बनाया गया है। पढ़ें पूरी खबर…