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महाराष्ट्र सरकार में ‘खटपट’ के बीच बोले Congress नेता-…तो CM उद्धव ठाकरे को देना पड़ जाएगा इस्तीफा

सरकार में मतभेदों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यशवंतराव गदख ने भी अपने ताजा बयान में कहा है कि यदि ऐसा ही चलता रहा, तो उद्धव ठाकरे को जल्द ही इस्तीफा देना पड़ सकता है।

Author Edited By नितिन गौतम मुंबई | Updated: January 13, 2020 3:47 PM
महाराष्ट्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यशवंतराव गदख। (image source-facebook)

महाराष्ट्र में शिवसेना- कांग्रेस और एनसीपी की गठबंधन सरकार को सत्ता में आए ज्यादा वक्त नहीं बीता है, लेकिन कई मुद्दों को लेकर इस गठबंधन सरकार में मतभेद उभर चुके हैं। पहले संशोधित नागरिकता कानून के मुद्दे पर शिवसेना और कांग्रेस के बीच नाराजगी बढ़ी, तो इसके बाद सावरकर के मसले पर भी शिवसेना और कांग्रेस के मतभेद हो चुके हैं। इन मतभेदों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता यशवंतराव गदख ने भी अपने ताजा बयान में कहा है कि यदि ऐसा ही चलता रहा, तो उद्धव ठाकरे को जल्द ही इस्तीफा देना पड़ सकता है।

महाराष्ट्र के नेवासा में रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता यशवंतराव गदख ने कहा कि ‘यदि तुम्हारें (कांग्रेस और एनसीपी) मंत्री, इसी तरह सरकार बंगलों और पोर्टफोलियो के बंटवारे को लेकर सरकार के कामकाज में बाधा डालते रहेंगे, तो मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को मजबूरन अपना इस्तीफा सौंपना पड़ेगा।’

कांग्रेस नेता का बयान ऐसे वक्त आया है, जब महाराष्ट्र में मंत्री पद बंटवारे को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। शिवसेना कोटे से सरकार में राज्यमंत्री बनाए गए अब्दुल सत्तार ने पद मिलने के कुछ दिन बाद ही इस्तीफा दे दिया था। वहीं कई अन्य नेता भी अपने पोर्टफोलियो से नाखुश बताए जा रहे हैं।

कांग्रेस कोटे से भूकंप पुनर्वसन मंत्री बनाए गए विजय वेदेट्टीवार भी खफा नजर आ रहे हैं। हालात ये हैं कि पोर्टफोलियो बंटवारे के बावजूद अभी तक उन्होंने अपना कार्यभार नहीं संभाला है। ऐसी खबरें भी हैं कि महाराष्ट्र सरकार असंतुष्ट नेताओं को खुश करने के लिए 7 मंत्रालयों के गठन पर विचार कर रही है। गौरतलब है कि सरकार गठन के 32 दिन बाद महाराष्ट्र में पहला कैबिनेट विस्तार हुआ था, जिसमें कुल 36 नए मंत्रियों ने शपथ ली थी।

इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर के कई मुद्दों पर भी शिवसेना और कांग्रेस के बीच असहमति नजर आयी है। खासकर संशोधित नागरिकता कानून के मसले पर लोकसभा में शिवसेना और कांग्रेस का स्टैंड अलग-अलग रहा था। शिवसेना ने जहां बिल का समर्थन किया था, वहीं कांग्रेस इसके विरोध में थी। सावरकर के मुद्दे पर भी शिवसेना और कांग्रेस नेताओं के बीच नाराजगी देखने को मिली है। यही वजह है कि महाराष्ट्र सरकार में गठन के बाद से ही थोड़ी ‘खटपट’ जारी है।

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