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महाराष्ट्र की सियासत में अब संघ की एंट्री, मोहन भागवत ने BJP-Shiv Sena से इशारों-इशारों में कह दी बड़ी बात

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री का पहला टर्म शिवसेना को मिल सकता है, वहीं कांग्रेस का स्पीकर बन सकता है। इसके साथ ही मंत्रियों के चयन को लेकर खबर है कि तीन पार्टियों के विधायकों की संख्या के आधार पर मंत्रियों का चयन किया जाएगा।

Author मुंबई | Updated: November 19, 2019 3:48 PM
आरएसएस चीफ मोहन भागवत। फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस

Maharashtra, BJP Shiv Sena Stir: महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना के बीच चल रही सियासी झगड़े में अब संघ प्रमुख मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) ने अब एंट्री कर दी है। भागवत ने कहा है, ‘सब जानते हैं कि स्वार्थ बहुत खराब बात है। लेकिन अपने स्वार्थ को कोई छोड़ना नहीं चाहता है। देश का उदाहरण लीजिए या फिर व्यक्तियों का।’ मोहन भागवत ने नागपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए यह बात कही। सीएम पद को लेकर बीजेपी और संघ की तकरार के बीच भागवत का यह बयान दोनों समान विचारधाराओं के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है।

कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना बीच सहमति बनने की खबर: इसी बीच मीडिया में खबर आ रही है कि महाराष्ट्र में सरकार गठन करने की प्रक्रिया में तेजी से आगे बढ़ रही है। हालांकि अभी पूरी तरह से इस बात का खुलासा नहीं हुआ है कि कौन, किसके साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाने जा रहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के बीच न्यूनतम साझा कार्यक्रम को लेकर करीब-करीब सहमति बन गई है।

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ऐसे हो सकता है मंत्री पद का बटवारा: दरअसल बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री का पहला टर्म शिवसेना को मिल सकता है, वहीं कांग्रेस का स्पीकर बन सकता है। इसके साथ ही मंत्रियों के चयन को लेकर खबर है कि तीन पार्टियों के विधायकों की संख्या के आधार पर मंत्रियों का चयन किया जाएगा। नई सरकार किसानों के एजेंडे को लागू करेगी।

‘NDA की स्थापना करने वालों को बाहर निकाला गया’: मंगलवार को शिवसेना ने एक बार फिर बीजेपी पर निशाना साधते हुए सामना में लिखा, ‘हमें निकालने की घोषणा करने वाले को शिवसेना का ‘मर्म’ और NDA का कर्म-धर्म नहीं पता। NDA के जन्म और प्रसव पीड़ा को शिवसेना ने अनुभव किया है। भारतीय जनता पार्टी के बगल में भी कोई खड़ा नहीं होना चाहता था। जब NDA की नींव रखी गई तब आज के ‘दिल्लीश्वर’ गुदड़ी में भी नहीं रहे होंगे। जिसने NDA की स्थापना की, उसे ही बाहर निकालने की नीच घोषणा की गई।’

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