उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) फूट के कगार पर दिख रही है। बुधवार को यह अटकलें तब शुरू हुई जब पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने प्रतिद्वंद्वी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की कोशिश की।
ऐसे में एहतियाती कदम उठाते हुए शिवसेना यूबीटी ने एक व्हिप जारी कर अपने सांसदों को गुरुवार को दिल्ली में होने वाली संसदीय दल की बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया।
शिवसेना यूबीटी ने जारी किया व्हिप
पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा, “हमने व्हिप जारी कर संसदीय दल की बैठक बुलाई है। हमने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है। निर्वाचित प्रतिनिधियों को खरीदना और उन्हें भ्रष्ट करना लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है। इसके कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।”
सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसद ओम बिरला से औपचारिक रूप से संपर्क करने से पहले सात सांसदों का समर्थन हासिल करने की प्रतिक्षा कर रहा था, जो पार्टी के लोकसभा सांसदों के दो-तिहाई से एक अधिक है।
बंद कमरे में होगी कार्यवाही
सूत्रों ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात तभी होगी जब इस कदम समर्थन करने वाले सभी सांसद एक अलग गुट के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए पत्र पर साइन कर देंगे। एक सूत्र ने कहा, “एक प्रक्रियात्मक जरूरत है। अलग गुट बनाने के इच्छुक सभी सांसदों को हस्ताक्षरित पत्र पेश करना होगा और स्पीकर के समक्ष उपस्थित होना होगा। कार्यवाही बंद कमरे में होगी और स्पीकर मूल पार्टी के सदस्यों से भी राय ले सकते हैं। इस प्रक्रिया में समय लगेगा।”
ओमराजे निंबालकर भी बागियों में शामिल
शिवसेना (यूबीटी) के जिन सांसदों पर कड़ी नजर रखी जा रही है, उनमें उस्मानाबाद के सांसद ओमराजे निंबालकर भी शामिल हैं, जो अपने पिता पवन राजे निंबालकर की हत्या के मामले में 20 जून को आने वाले संभावित फैसले से पहले बुधवार को पुणे लौट आए हैं। एनसीपी प्रमुख सुनेत्रा पवार के भाई पद्मसिंह पाटिल इस मामले में आरोपी हैं। संजय राउत ने आरोप लगाया कि पवन राजे निंबालकर का यह राजनीतिक फैसला फैसले के परिणाम से जुड़ा हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, बागी खेमा अरविंद सावंत और अनिल देसाई को छोड़कर बाकी सभी सांसदों को अपने साथ शामिल करने की कोशिश कर रहा है। अरविंद सावंत और अनिल देसाई उद्धव ठाकरे के करीबी माने जाते हैं। नासिक के सांसद राजभाऊ वाजे के भी बागी सांसदों के साथ जुड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, वाजे ने पत्रकारों से कहा कि वे शुरू से ही उद्धव ठाकरे के साथ खड़े रहे हैं और आगे भी खड़े रहेंगे। एक सूत्र ने बताया, “अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।”
