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कहानी रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की, जिसके सहारे गिराई जा चुकी है कई सरकारें; जानें कहां से शुरू हुआ ये खेल

भारतीय राजनीति में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स के कई ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं, जब सरकार गिराने और बचाने के लिए विधायकों को होटल तक पहुंचाया गया है।

Maharashtra Row, Political Crisis in Shiv Sena
बुधवार को गुवाहाटी में बागी विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे। (फोटो- पीटीआई)

रिशिका सिंह

राजनीति में सत्ता हासिल करनी हो या फिर सरकार गिरानी हो, पिछले कुछ समय से रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की भूमिका काफी अहम देखी गई है। हाल के दिनों राज्यसभा चुनाव से लेकर महाराष्ट्र में सियासी संकट मामले तक रिजॉर्ट पॉलिटिक्स खूब प्रभावी है। महाराष्ट्र में शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने दावा किया है कि करीब 50 विधायकों का समर्थन उन्हें प्राप्त है। बता दें कि ये सभी विधायक असम के गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल में ठहरे हुए हैं।

हालांकि रिजॉर्ट पॉलिटिक्स भारत में किसी भी पार्टी या राज्य के लिए नई और अनोखी नहीं है। कम से कम 1980 के दशक के बाद से जैसे-जैसे गठबंधन की सरकारें देखी गईं, तब से ही रिजॉर्ट पॉलिटिक्स के उदाहरण कई बार देखे गए हैं। यह आमतौर पर यह तब अधिक देखी गई जब किसी पार्टी को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना हुआ।

रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का सहारा राज्यसभा चुनाव में भी लिया गया है। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में राजस्थान में कांग्रेस के 70 विधायकों को उदयपुर के एक रिसॉर्ट में रखा गया था। इसका फायदा भी कांग्रेस को हुआ। राज्यसभा चुनाव के नतीजों में राजस्थान की चार में से तीन सीटों पर कांग्रेस विजयी हुई, जिसे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने “लोकतंत्र की जीत” बताया।

भारतीय राजनीति में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स के कई ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं, जब सरकार गिराने और बचाने के लिए विधायकों को होटल तक पहुंचाया गया है।

जुलाई 2020: राजस्थान में कांग्रेस की सरकार पर आए संकट के बीच कांग्रेस ने राज्य के फेयरमोंट होटल में अपने विधायकों को दलबदल से रोकने के लिए ठहराया था। पायलट का समर्थन करने वाले विधायक खुद दिल्ली में थे और बाद में वे भाजपा शासित राज्य के एक रिसॉर्ट में चले गए। हालांकि अंत में सरकार नहीं गिरी और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने रहे। फिलहाल नुकसान सचिन पायलट को हुआ और उन्हें उपमुख्यमंत्री के पद से हटा दिया गया।

मार्च 2020: मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार को गिराने की कोशिशों में कांग्रेस विधायकों को बीजेपी शासित राज्य बेंगलुरु में प्रेस्टीज गोल्फ क्लब पहुंचाया गया। इससे पहले कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी पार्टी छोड़ दी थी। उनके समर्थन से शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। हालांकि सिंधिया बाद में भाजपा में शामिल हो गए और राज्यसभा भेजे गये। बता दें कि अब वो केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हैं।

2000: यह वह साल था जब बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने नीतीश कुमार को बहुमत न होने के बावजूद सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि चुनावों में लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी लेकिन नीतीश कुमार को राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए बुलाया था। ऐसे में कांग्रेस और राजद, विपक्षी दलों ने अपने कुछ सदस्यों को पटना के एक होटल में भेज दिया था। हालांकि विश्वास मत होने से पहले ही नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा दे दिया और राजद की राबड़ी देवी बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।

1984: आंध्र प्रदेश में भी 1984 में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का उदाहरण देखा गया था। जहां राज्य के वित्त मंत्री नादेंदला भास्कर राव ने कांग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री एनटीआर की सरकार को गिरा दिया था। फिल्म सुपरस्टार से नेता बने एनटीआर देश से बाहर थे और राज्यपाल ने भास्कर राव को मुख्यमंत्री बना दिया था। उस दौरान एनटीआर ने लगभग 160 विधायकों को अपने स्टूडियो में सभी सुविधाओं के साथ रखा था। हालांकि भास्कर राव अपना बहुमत साबित नहीं कर पाये और उनकी सरकार गिर गई। एनटीआर फिर से सत्ता में आ गये।

1995 के दौर में आंध्र प्रदेश में एनटीआर के दामाद एन चंद्रबाबू नायडू एनटीआर को पार्टी से निकालना चाहते थे। ऐसे एनटीआर के वफादारों को TDP को संभालने के लिए हैदराबाद के वायसराय होटल में भेजा गया था।

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