Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के लगभग एक महीने बाद एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने मार्च 2026 में नेता विपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में रोहित पवार ने अजित पवार के निधन से संबंधित दस्तावेज राहुल गांधी को दिए थे, और यह मांग की थी कि विमान दुर्घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की पहल के लिए लिए समर्थन मांगा था।

राहुल गांधी और अजित पवार के बीच यह बैठक एक घंटे से अधिक चली थी। रोहित पवार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की। बताया जा रहा है कि एक नेता ने रोहित को आश्वासन दिया, “लड़ते रहो; हमारी विचारधारा का समय अवश्य आएगा।”

बेंगलुरू में दर्ज कराई थी FIR

कुछ दिनों बाद महाराष्ट्र में विमान दुर्घटना मामले में FIR दर्ज न करा पाने के कारण रोहित कांग्रेस शासित राज्य बेंगलुरु गए और हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में शून्य एफआईआर दर्ज कराई। शून्य FIR किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज की जा सकती है, चाहे अपराध वास्तव में कहीं भी हुआ हो या कानूनी अधिकार क्षेत्र किसी भी क्षेत्र के अंतर्गत आता हो।

उस वक्त से ही अफवाहें और भी तेज हो गई हैं। युवा एनसीपी (एसपी) विधायक की कांग्रेस से बढ़ती नजदीकी तब स्पष्ट हुई जब उन्होंने गांधी जी के पुणे में आयोजित “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम के लिए सैकड़ों पोस्टर लगवाए।

रोहित पवार ने क्या-क्या कहा?

रोहित पवार ने कहा, “हमारी पार्टी के नाम में ही ‘कांग्रेस’ शब्द है; हमारी विचारधाराओं में कोई अंतर नहीं है। पवार साहब कांग्रेस में थे। वह पार्टी हमारे लिए नई नहीं है। भले ही कागजों पर हम अलग दिखते हों, लेकिन दशकों से हम सहयोगी रहे हैं। फिलहाल हम दोनों के सामने सबसे अहम काम है 2029 में राज्य और केंद्र में सत्ता में वापसी करना।” रोहित ने कहा कि उन्हें राहुल गांधी से प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में हमें विपक्ष के नेता से वंचित किया जा रहा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में वे हमारे भी नेता हैं।”

एनसीपी (एसपी) नेता ने महाराष्ट्र भर में यात्रा करके खुद को वस्तुतः राज्य के विपक्ष के नेता के रूप में स्थापित किया है। विपक्ष के पास इस पद के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है और अध्यक्ष ने अभी तक किसी को भी यह दर्जा नहीं दिया है। वे अक्सर अकेले ही सड़कों पर उतरकर बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार का विरोध कर रहे हैं और किसानों, महिलाओं, छात्रों और ठेकेदारों के मुद्दों को उठा रहे हैं।

राहुल गांधी की तरह रोहित पवार भी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बयान देते हैं और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को उठा रहे हैं। इस सप्ताह उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार को हाल ही में हुए पेपर लीक मामले पर निशाना बनाया। पुणे में सोमवार को हजारों लोगों ने भीमनवार के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन किया और प्रदर्शनकारियों को गांधी का समर्थन मिला।

रोहित पवार की राहुल गांधी से तुलना

इन सब बातों की तुलना गांधी जी से की जा रही है और कुछ हफ़्ते पहले जब यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि एनसीपी (एसपी) बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में विलय करने पर विचार कर सकती है, तो यह चर्चा भी उठी थी कि ऐसी स्थिति में रोहित खुद कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। एक वरिष्ठ राज्य कांग्रेस नेता ने कहा, “वह किसी भी तरह की अटकलों को हवा नहीं देना चाहते और राजनीतिक रूप से अविश्वसनीय नहीं दिखना चाहते।”

रोहित पवार की कांग्रेस हाई कमांड से ही नहीं बल्कि राज्य कांग्रेस और खासकर प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल से भी बढ़ती नजदीकी तब स्पष्ट हुई जब उन्होंने अपने सहयोगी को बारामती विधानसभा उपचुनाव में अपनी चाची और अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के खिलाफ चुनाव न लड़ने के लिए राजी कर लिया। उनका यह रवैया उनकी चाची और बारामती सांसद सुप्रिया सुले के बिल्कुल विपरीत है, जो राज्य कांग्रेस के प्रति अपनी आपत्तियों को खुलकर व्यक्त करती हैं।

बीजेपी ने रोहित पवार पर लगाए आरोप

बीजेपी ने विधायक रोहित पवार पर छात्रों का इस्तेमाल करके अपना राजनीतिक कद बढ़ाने का आरोप लगाया है। बीजेपी विधायक विक्रम पचपुते ने आरोप लगाया कि एनसीपी (एसपी) नेता केवल राजनीति कर रहे हैं और उन्होंने कोई नीतिगत सुझाव नहीं दिए हैं, वहीं पूर्व बीजेपी विधायक जगदीश मुलिक ने आरोप लगाया कि रोहित शर्मा द्वारा छात्रों के मुद्दों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कभी सफल नहीं होगा।

एनसाीपी नेता अमोल मातले ने कहा, “अगर बीजेपी छात्रों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास समझती है, तो यह सत्ताधारी पार्टी की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। बीजेपी को इस तरह की बचकानी टिप्पणियां करने से बचना चाहिए।” कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के अनुसार रोहित ने अपने चाचा के राजनीतिक सफर से सबक सीखा है और वह जल्द से जल्द किसी के संरक्षण के बिना अपना खुद का रास्ता बनाने के लिए उत्सुक हैं।

यह भी पढ़ें: ‘बीजेपी साम, दाम, दंड, भेद की राजनीति कर रही है’, नदीमुल हक पर ED की रेड से भड़कीं सागरिका घोष

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नदीमुल हक के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर पार्टी ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने इस छापेमारी को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए और इसे ‘गंदी राजनीति’, ‘निचले स्तर की राजनीति’ और ‘बदले की राजनीति’ करार दिया। घोष ने आरोप लगाया कि कार्रवाई का असली निशाना नदीमुल हक नहीं, बल्कि पूरी तृणमूल कांग्रेस थी। पढ़िए पूरी खबर…