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बाल ठाकरे के 30 साल पहले वाले अंदाज में दिखे उद्धव ठाकरे, सरकारी आवास से पहुंचे मातोश्री, रास्ते में दिखा समर्थकों का हुजूम

उद्धव ठाकरे कोरोना संक्रमित पाए गये है। ऐसे में मातोश्री जाते समय वो अपनी कार में अकेले थे। वहीं उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे, उनके बेटों, आदित्य ठाकरे और तेजस के साथ, एक अलग कार में मातोश्री पहुंची।

Uddhav Thackeray, Maharashtra news

योगेश नाइक

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक उठापटक के बाद शिवसेना प्रमुख और राज्य के सीएम उद्धव ठाकरे अपने पिता बाल ठाकरे के 30 साल पहले वाले अंदाज में दिखे। उन्होंने फेसबुक लाइव पर दिए अपने संबोधन में कहा कि अगर कोई विधायक सामने से आकर कहेगा तो वे सीएम पद से अपना इस्तीफा दे देंगे। बता दें कि बुधवार की रात सीएम उद्धव ने अपना सरकारी आवास वर्षा छोड़कर मातोश्री पहुंचे।

उनके सरकारी आवास छोड़ने के दौरान रास्ते में उनके समर्थकों का हुजूम दिखा। गौरतलब है कि सीएम आवास से मातोश्री पहुंचने में आम तौर पर लगभग 15-20 मिनट लगते हैं लेकिन बुधवार की देर शाम उद्धव ठाकरे को एक घंटा चार मिनट का समय लगा। उन्होंने रास्ते में समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया।

पिता के अंदाज में दिखे उद्धव: बता दें कि महाराष्ट्र में सियासी संकट के बीच उद्धव ठाकरे अपने पिता बाल ठाकरे के 30 साल पहले वाले अंदाज में दिखे। दरअसल जुलाई, 1992 में भी शिवसेना में विरोध के सुर उठे थे। उस दौरान बाला साहेब ठाकरे और उनकी कार्यशैली पर शिवसेना के ही एक पुराने साथी माधव देशपांडे ने सवाल उठा दिए थे। देशपांडे ने बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे और बेटे उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाया था कि दोनों ही पार्टी के मामलों में काफी दखलअंदाजी कर रहे हैं।

विरोध के सुर उठते देख बाल ठाकरे ने सामना में अपने तेवर में एक लेख में कहा, “अगर एक भी शिवसैनिक मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ खड़ा हो और ये कह दे कि आपकी वजह से हमने शिवसेना छोड़ी या आपने हमें चोट पहुंचाई, तो मैं एक पल के लिए भी शिवसेना प्रमुख के रूप में बने रहने के लिए तैयार नहीं हूं।”

बाल ठाकरे के उस लेख का ऐसा असर हुआ कि शिवसेना भवन के बाहर बाल ठाकरे के लाखों शिव सैनिकों की भीड़ जमा हो गई। उनके पार्टी छोड़ने के ऐलान से लोग सारे विरोधों को भुलाकर उन्हें मनाने में लग गये कि पार्टी बाल ठाकरे के बिना नहीं चल सकती। उस घटना के बाद से शिवसेना की कमान जबतक बाल ठाकरे के हाथों में रही, तबतक पार्टी में विरोध के सुर देखने को नहीं मिले।

ऐसे ही कुछ हालात अब तीस साल बाद उद्धव ठाकरे के सामने बने हैं। पार्टी के ही बागी विधायक एकनाथ शिंदे की वजह से महाराष्ट्र सरकार में संकट पैदा हो गया है। उन्होंने दावा किया है कि शिवसेना के कुल 55 में से 30 से अधिक विधायकों का समर्थन उन्हें मिला है। ऐसे में संजय राउत ने भी अपने एक ट्वीट से महाराष्ट्र विधानसभा भंग होने का संकेत दिया था।

हालांकि बुधवार को अपने एक संबोधन में उद्धव ठाकरे ने अपने पिता के अंदाज में अपने इस्तीफे की पेशकश की। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे भले ही इस्तीफे की बात कर रहे हों लेकिन इसके पीछे उनका मकसद, पार्टी को मजबूत करना है।

क्या कहा उद्धव ने: सोशल मीडिया के माध्यम से उद्धव ठाकरे ने कहा, “शिवसेना ने हिंदुत्व नहीं छोड़ा है। यह हमारी सांस में है। हिंदुत्व के लिए शिवेसना ने क्या किया है, यह बताने का समय अभी नहीं है। बालासाहेब के हिंदुत्व को मैं आगे ले जाने की कोशिश कर रहा हूं।” उद्धव ने कहा कि जो विधायक नाराज हैं, वे मेरे पास आएं और मुझसे बात करें। मैं मुख्यमंत्री पद क्या शिवसेना अध्यक्ष का पद भी छोड़ने के लिए तैयार हूं। मैं आपके साथ आने तैयार हूं।

गौरतलब है कि बुधवार की रात उद्धव ठाकरे 10.44 बजे सरकारी आवास से ‘मातोश्री’ पहुंचे। ठाकरे ने रास्ते में पांच बार अपनी कार से हाथ मिलाया और पार्टी कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया और उनके समर्थन को स्वीकार किया। इस दौरान समर्थकों ने ‘उद्धव तुम आगे बढ़ो हम तुम्हारे साथ हैं’ के नारे लगाए। एक महिला कार्यकर्ता ने रोते हुए कहा, “हम इस चुनौती से भी लड़ेंगे और इससे आगे निकलेंगे।”

बता दें कि उद्धव ठाकरे कोरोना संक्रमित पाए गये है। ऐसे में मातोश्री जाते समय वो अपनी कार में अकेले थे। वहीं उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे, उनके बेटों, आदित्य ठाकरे और तेजस के साथ, एक अलग कार में मातोश्री पहुंची। इस दौरान महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे ने भी समर्थकों को जीत को विक्ट्री का साइन दिखाया।

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