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‘शक्तिशाली मोदी- शाह के दबदबे’ को खत्म कर सत्ता में आए उद्धव ठाकरे, फडणवीस BJP को ले डूबे: संजय राउत

बिना किसी का नाम लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर तीखा हमला करते हुए संजय राउत ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र, दिल्ली की तरह चल रहे 'भीड तंत्र’ के आगे नहीं झुकेगा।

Author Updated: December 4, 2019 4:43 PM
शिवसेना नेता संजय राउत। (एक्सप्रेस फोटो)

Maharashtra Assembly Speaker, BJP-Shiv Sena: शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने रविवार (01 दिसंबर) को कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सत्ता हासिल करने में जल्दबाजी और ‘बचकानी टिप्पणियां’ ने महाराष्ट्र में भाजपा को ले डूबी है। यही कारण है कि फडणवीस को विपक्ष में बैठना पड़ गया। राउत ने शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में अपने ‘रोखठोक’ स्तंभ में दावा किया कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के साथ आने से महाराष्ट्र में जो हुआ वह देश को भी स्वीकार है। इस दौरान बिना किसी का नाम लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र, दिल्ली की तरह चल रहे ‘भीड तंत्र’ के आगे नहीं झुकेगा।

राउत ने बोला फडणवीस पर हमलाः ‘सामना’ में राउत ने कहा कि जरूरी यह है कि उद्धव ठाकरे शक्तिशाली ‘मोदी-शाह के दबदबे’ को खत्म कर सत्ता में आए। उन्होंने भरोसा भी जताया कि ‘यह सरकार (शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन) पांच साल तक चलेगी।’ राउत ने आगे कहा, ‘मुझे यह देखकर मजा आ रहा है कि जो लोग अजित पवार के फडणवीस के साथ गठजोड़ को शरद पवार की पहले से तय योजना बता रहे थे, वह अब महा विकास आघाडी सरकार बनने के बाद एनसीपी प्रमुख के आगे नतमस्तक हो रहे हैं।’ राज्यसभा सदस्य ने आगे कहा कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर फडणवीस ने इस तरह की ‘बचकानी टिप्पणियां’ की कि राज्य में कोई विपक्षी दल नहीं बचेगा, शरद पवार का काल खत्म हो रहा है और प्रकाश आंबेडकर का वंचित बहुजन आघाडी मुख्य विपक्षी दल होगा।’

फडणवीस की जल्दबाजी भाजपा को ले डूबी-संजय राउतः नेता संजय राउत ने फडणवीस पर हमला करते हुए कहा, ‘लेकिन वह (फडणवीस) खुद विपक्षी नेता बन गए।’ उन्होंने यह भी कहा कि फडणवीस ने पहले कहा था कि वह वापस लौटेंगे लेकिन सत्ता में आने की उनकी जल्दबाजी 80 घंटे के भीतर भाजपा को ले डूबी। राउत ने यह भी कहा, ‘जरूरत से अधिक आत्मविश्वास और उनके (फडणवीस) दिल्ली के वरिष्ठ नेताओं पर भरोसे ने उनकी राजनीति तबाह कर दी। पिछले महीने के घटनाक्रम ‘सिंहासन’ फिल्म की नई पटकथा जैसी लगती है।’ बता दें कि वह उसी नाम की 1979 में आई मराठी फिल्म का जिक्र कर रहे थे जो दिवंगत लेखक अरुण संधू के उपन्यास ‘सिंहासन ’ और ‘मुंबई दिनांक’ पर आधारित थी।

राज्यपाल पर भी साधा निशानाः मामले में बयान देते हुए राउत ने कहा कि महाराष्ट्र राज्यपाल के कार्यालय ने फडणवीस और एनसीपी नेता अजित पवार की 80 घंटे की सरकार में ‘खलनायक’ की भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, ‘राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने एक बार मुझसे कहा था कि वह संविधान की रूपरेखा के इतर जाकर कुछ भी नहीं करेंगे। लेकिन बाद में उन्होंने जल्दबाजी में देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को शपथ दिला दी। ऐसा लगता है कि ‘आलाकमान’ से मिले आदेश ने बड़ी भूमिका निभाई।’ हालांकि ‘आलाकमान’ से उन्होंने केंद्र के तरफ इशारा किया है।

राउत- गठबंधन केवल शरद पवार के वजह से संभवः अजित पवार पर बोलते हुए सजंय राउत ने कहा कि भाजपा को समर्थन देने की अजित पवार की ‘बेचैनी’ शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस को नजदीक लेकर गई और उन्होंने गठबंधन बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि इससे बगावत करने वाले एनसीपी के अन्य विधायकों पर भी दबाव बना और हर किसी के शरद पवार के पास लौटने से उनके भतीजे अजित पवार भी लौट आए। राउत ने आगे कहा, ‘अगर शरद पवार आगे नहीं आते तो यह गठबंधन कभी नहीं हो पाता।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस में हर किसी को शिवसेना से हाथ मिलाने को लेकर शंका था। राउत के अनुसार, शरद पवार ने ही सोनिया गांधी से कहा कि शिवसेना संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे के पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ मित्रता वाले संबंध थे।

हिंदी भाषी लोग भी देते हैं शिवसेना को वोट- संजयः हिंदी भाषी लोगों पर बोलते हुए राउत ने कहा कि शिवसेना ने देश में आपातकाल के बाद हुए राज्य विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था। शिवसेना ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में प्रतिभा पाटिल और प्रणब मुखर्जी की उम्मीदवारी का भी समर्थन किया था। शिवसेना नेता ने यह भी कहा, ‘मुंबई में हिंदी भाषी समुदाय भी शिवसेना को वोट देता है इसलिए पार्टी शहर के नगर निकाय चुनाव जीतती आ रही है। शरद पवार ने यह भी सोनिया गांधी को बताया।’

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