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Maharashtra New DGP: आतंकी हमले के वक्त RDX से भरा बैग उठाकर भागे, जानिए कौन हैं नक्सलियों से लेकर आतंकियों तक से लोहा लेने वाले वरिष्ठ IPS हेमंत नगराले

हेमंत नगराले, महाराष्ट्र कैडर के 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। जिन्हें कि महाराष्ट्र के डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

महाराष्ट्र के डीजीपी हेमंत नगराले।

हेमंत नगराले, महाराष्ट्र कैडर के 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। जिन्हें कि महाराष्ट्र के डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। हेमंत नगराले कई सारे पुरस्कारों से सम्मानित हैं। जिनमें राष्ट्रपति पुलिस मेडल, विशेष सेवा पदक और आंतरिक सुरक्षा पदक भी शामिल हैं।

मुंबई आतंकी हमले के दौरान भूमिका: 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर हुए घातक आतंकी हमले के दौरान उन्होंने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। नगराले ने आरडीएक्स से भरे एक बैग को देखा और बम निरोधक दस्ते के आने से पहले उसे सुरक्षित स्थान पर ले गए। नगराले ने चार पुलिसकर्मियों के साथ ताज होटल में प्रवेश किया और कई घायल और मृत व्यक्तियों को निकालने में मदद की और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय किया और पुलिसकर्मियों को तैनात किया। स्टाफ की मदद से नगराले ने होटल ताज के शॉपिंग प्लाजा के अंदर फंसे सैकड़ों लोगों को बचाया।

शिक्षा: नगराले ने अपनी छठीं क्लास तक की पढ़ाई राज्य के चंद्रापुर जिले से ही की थी। फिर उन्होंने आगे की स्कूलिंग नागपुर से की। उनके पास बीई BE (मकैनिकल) और मास्टर ऑफ फाइनेंस मैनेजमेंट की डिग्रियां भी हैं।

पहली तैनाती: एक आईपीएस अधिकारी के तौर पर उनकी पहली तैनाती 1989-92 के बीच नक्सल प्रभावित चंद्रापुर जिले में ही हुई थी। इसके बाद वे सोलापुर के डीसीपी 1992 से 1994 के बीच रहे। न्यू कमिश्नरेट ऑफ सोलापुर को बनाने में उनका योगदान रहा है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद सोलापुर में हुए दंगों में कानून व्यवस्था संभाले जाने को लेकर उनकी जमकर तारीफ हुई थी।

रत्नागिरी के एसपी (1994-1996) रहते हुए उन्होंने दाभोल पावर कॉरोपोरशन से जुड़े भूमि अधिग्रहण के मामले को भी संभाला था। 1996-1998 में उन्होंने एसपी सीआईडी क्राइम रहते हुए MPSC पेपर लीक मामले की भी जांच की। नगराले ने कुख्यात अंजनाबाई गवित बच्चे के अपहरण के मामले को सुलझाया था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।

सीबीआई में सेवा दे चुके हैं: इसके अलावा नगराले ने CBI (मार्च 1998- सितंबर 2002) के लिए काम किया। उन्हें बैंकिंग और फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों की जांच के लिए एसपी नियुक्त किया गया था। बाद में वे सीबीआई में डीआईजी भी रहे। सीबीआई में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने केतन पारेख घोटाला, माधोपुर बैंक घोटाला और हर्षद मेहता घोटाला जैसे मामलों की जांच की। तेलगी स्टांप पेपर घोटाले मामले में एसएस पुरी के स्टाफ ऑफिसर के रूप में उनकी सेवाओं के लिए सराहना की गई थी।

2007 से 2008 तक उन्हें मुंबई में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया था और उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में सांप्रदायिक अशांति को संभाला था। जून 2008-अगस्त 2010 तक उन्हें विशेष IGP और निदेशक (सतर्कता और सुरक्षा MSEDCL ) में तैनात किया गया था। उनके कार्यकाल में बिजली चोरी के मामलों में कमी देखी गई।

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