महाराष्ट्र विधानसभा में हाल ही में महाराष्ट्र धर्म रक्षा अधिनियम कानून पास हुआ है। इस कानून के तहत पहली एफआईआर पुणे शहर पुलिस ने दर्ज की है। पहला मामला 22 साल के व्यक्ति के खिलाफ दर्ज किया गया। उस पर आरोप है कि उसने अपनी नाबालिग ‘पत्नी’ से उसका धर्म बदलने के लिए कहा।

इस मामले के कुछ दिन बाद पुलिस ने इसी नए कानून के तहत दूसरा मामला दर्ज किया। इसमें एक ब्रिटिश नागरिक और OCI कार्डधारक पर आरोप लगाया गया कि वह धार्मिक सभाओं के दौरान लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करने की कोशिश कर रहा था।

महाराष्ट्र में कब से लागू हुआ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम?

महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम , 2026 को 31 जुलाई को अधिसूचित किया गया और यह 1 अगस्त से लागू हो गया। पुलिस ने बताया कि उत्तर प्रदेश के रहने वाले 22 वर्षीय युवक के खिलाफ पहली एफआईआर 5 अगस्त को दर्ज की गई थी, जिसने कथित तौर पर एक नाबालिग लड़की से धर्म परिवर्तन करने के लिए कहा। जिसके साथ वह रिश्ते में था।

वरिष्ठ निरीक्षक अमोल मोरे ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उस व्यक्ति के खिलाफ अधिनियम की धारा 3 और 9(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। धारा 3 किसी व्यक्ति को जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन, गलतबयानी, बल, धमकी या अनुचित प्रभाव सहित किसी भी माध्यम से धर्म परिवर्तन करने या धर्म परिवर्तन का प्रयास करने या धर्म परिवर्तन में सहायता करने या उकसाने से प्रतिबंधित करती है।

धारा 9(2) में सात साल तक के कारावास और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। जहां धारा 3 के तहत अपराध में नाबालिग शामिल है।

पुलिस ने बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के प्रावधानों का भी सहारा लिया है। जिसकी वजह है कि पीड़िता नाबालिग है। मोरे ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी और नाबालिग लड़की उत्तर प्रदेश के एक ही गांव के रहने वाले हैं। अधिकारी ने बताया कि दोनों के बीच संबंध बने और बाद में वे कर्नाटक और फिर पुणे चले गए। पुलिस का आरोप है कि उस व्यक्ति ने नाबालिग को धर्म परिवर्तन करने के लिए उकसाया। एफआईआर और जांच से उन परिस्थितियों और साधनों का पता चलेगा जिनका इस्तेमाल धर्म परिवर्तन के प्रयास के लिए किया गया था।

दूसरी एफआईआर

एक अधिकारी ने बताया कि ओसीआई कार्डधारक प्रार्थना सभाओं और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होता था, लेकिन उसे आवश्यक अनुमति के बिना उपदेश देने या धार्मिक प्रवचन देने की अनुमति नहीं थी। पुलिस ने कथित गतिविधियों के आधार पर नए कानून के तहत मामला दर्ज किया है।

यह अधिनियम जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन, गलतबयानी, बल प्रयोग, धमकी या अनुचित प्रभाव के माध्यम से धर्मांतरण को प्रतिबंधित करता है। इसमें विवाह या विवाह के वादे से जुड़े धर्मांतरण से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं। इसके तहत धर्मांतरण करने के इच्छुक व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देना अनिवार्य है और कथित रूप से धर्मांतरित व्यक्ति के निर्दिष्ट रिश्तेदारों द्वारा शिकायत दर्ज करने की अनुमति है।

यह कानून धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति पर यह साबित करने का दबाव भी डालता है कि धर्मांतरण स्वेच्छा से हुआ था। इसमें नाबालिगों, महिलाओं, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्यों और मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों से जुड़े मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है।

इस कानून को महाराष्ट्र विधानसभा ने इस साल की शुरुआत में पारित किया था और बाद में राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद 31 जुलाई को राज्य सरकार द्वारा इसे अधिसूचित किया गया था। जब यह विधेयक पेश किया गया था, तब इसने एक राजनीतिक बहस छेड़ दी थी। सत्ताधारी महायुति गठबंधन ने इसका समर्थन किया था, जबकि कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और समाजवादी पार्टी ने इसका विरोध किया। हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) ने विधेयक का समर्थन किया था।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध ढाबों पर चलेगा बुलडोजर, महाराष्ट्र सरकार ने दिया 60 दिन का अल्टीमेटम

महाराष्ट्र सरकार ने नेशनल हाईवे के किनारे बने अवैध ढाबों, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक ढांचों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। राज्य सरकार ने शहरी निकायों को 60 दिनों के भीतर नेशनल हाईवे की राइट ऑफ वे (ROW) यानी सरकार द्वारा अधिग्रहित और आरक्षित जमीन पर बने सभी नए और पुराने बिना लाइसेंस वाले ढांचों को हटाने और गिराने का निर्देश दिया है। साथ ही इस क्षेत्र में नए ढाबे, खाने-पीने की दुकानें या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाने पर भी रोक लगा दी गई है। पढ़ें पूरी खबर।