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कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए हर्षवर्धन पाटिल, फडणवीस बोले- 5 साल से कोशिश कर रही थी बीजेपी

हर्षवर्धन पाटिल ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ से उनकी समस्याओं का समाधान करने में असफल रहने के बाद उन्होंने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया।

Maharashtra, BJP, NCP, Congress, Ganesh Naik, Harshvardhan Patil, CM, CM Devendra Fadnavis, Chief minister, sonia Gandhi, Maharashtra assambly election, india news, Hindi news, news in Hindi, latest news, today news in Hindiभाजपा में शामिल होने के मौके पर कांग्रेस नेता हर्षवर्धन पाटिल (बाएं) और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस। (फोटोः प्रदीप दास)

महाराष्ट्र विधासभा चुनाव से पहले विपक्षी दल कांग्रेस और एनसीपी को एक और बड़ा झटका लगा है। एनसीपी नेता गणेश नाइक और कांग्रेस के नेता हर्षवर्धन पाटिल बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। इन दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में भाजपा का दामन थामा।

गणेश नाइक को नवी मुंबई की राजनीति में कद्दावर नेता माना जाता है। नाइक  अपने समर्थकों व परिवार के सदस्यों के साथ भगवा पार्टी से जुड़ गए हैं। इस मौके पर नाइक ने कहा कि मैंने हमेशा से लोगों के लिए काम किया है न कि अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए। मुझे यह महसूस हुआ कि कई परियोजनाएं हकीकत में तब ही बदल सकती हैं जब इन्हें बेहतर नेतृत्व मिले। मुझे विश्वास है कि मुख्यमंत्री और मैं नवी मुंबई को और बेहतर बना सकते हैं।

कांग्रेस नेता हर्षवर्धन पाटिल के भाजपा में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि भाजपा पिछले पांच साल से पाटिल को पार्टी में शामिल करने का प्रयास कर रही थी। मुंबई में आयोजित एक समारोह में सीएम ने कहा कि हम उन्हें (पाटिल को) इंदापुर सीट से मैदान में उतारेंगे।

इससे पहले बुधवार को पाटिल ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ से उनकी समस्याओं का समाधान करने में असफल रहने के बाद उन्होंने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया। इंदापुर में रैली के बाद सोनिया गांधी ने मुझे फोन किया था। उन्होंने कहा था कि वह मेरी समस्याओं को समझती हैं… उन्होंने कहा था कि मैं कोशिश करती हूं… लेकिन कुछ भी नहीं हुआ।

पाटिल ने कहा कि मैं लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मिला था। उन्होंने कहा था कि वह कुछ करेंगे… इसके बाद मैं कांग्रेस नेताओं वेणुगोपाल, पृथ्वीराज चव्हाण, अशोक चव्हाण, बालासाहेब विखे पाटिल से मिले लेकिन वे सभी असहाय दिखे।

एक सहयोगी ने बताया कि इंदापुर में मीटिंग के बाद कांग्रेस और एनसीपी का पाटिल से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं हो पा रहा था। वह सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के संपर्क में थे। इसके बाद वह भाजपा में शामिल होने का अपना मन बना चुके थे।

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