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बाल ठाकरे पुण्यतिथि: जब शिवसेना संस्थापक की कार में कानून मंत्री ने कर दिया पेशाब! पढ़ें पूरा वाकया

महाराष्ट्र के तत्कालीन कानून मंत्री एक बार नशे में काफी धुत हो गए। ठाकरे ने उन्हें अपनी कार में घर छोड़ने की पेशकश की। लेकिन, इस दौरान मंत्री का अपने ऊपर से कंट्रोल खत्म हो गया और उनका कार में ही पेशाब निकल गया।

Author Published on: November 17, 2019 11:22 AM
कुर्सी पर बैठे शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे। (फाइल फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे अक्सर अपने बेबाक अंदाज और ह्यूमर के लिए जाने जाते थे। कई बार उन्होंने अपने व्यवहार से लोगों को आश्चर्य में भी डाल दिया। उनके करीबियों ने उनके बारे में कई ऐसी बातें बताईं, जिनसे पता चलता है कि बाल ठाकरे कितने हसोड़ और दूसरों का मजाक बनाने में एक पल भी झिझकने वाले आदमी नहीं थे। ऐसी ही बात महाराष्ट्र के पूर्व कानून मंत्री के संदर्भ में है। बाल ठाकरे अक्सर लोगों को उस मंत्री जुड़ी एक घटना का जिक्र करते थे, जिसमें वह उनकी कार में ही पेशाब कर दिए थे।

बीबीसी ने अपनी एक विशेष रिपोर्ट में मशहूर पत्रकार वीर सांघवी द्वारा कहे गए एक किस्से का जिक्र किया है, जिसमें कहा गया है कि बाल ठाकरे अक्सर एक कहानी सुनाया करते थे। जिसमें एक बार रजनी पटेल की पार्टी में महाराष्ट्र के तत्कालीन कानून मंत्री शराब के नशे में इतने धुत हो गए कि ठाकरे ने उन्हें अपनी कार में छोड़ने का प्रस्ताव रखा। कार में जाते वक्त मंत्री अपने ऊपर से कंट्रोल खो दिया और ठाकरे की कार में ही उनका पेशाब निकल गया। मशहूर पत्रकार के मुताबिक इस घटना का जिक्र बाल ठाकरे अक्सर मजे लेकर सुनाया करते थे।

आगे बताया गया कि मंत्री ओबरॉय होटल की एक पार्टी में फिर मिले और वे नशे में थे। लेकिन, इस बार ठाकरे ने उन्हें लिफ्ट देने से मना कर दिया। ठाकरे कहते थे कि उन्हें अपनी कार से पेशाब की बदू निकालने में महीनों लग गए।

बाल ठाकरे का बेलाग अंदाज के बारे में तब पता चलता है, जब मणिरत्नम की फिल्म ‘बॉम्बे’ रिलीज हुई। यह मुंबई में हुए सांप्रदायिक दंगों पर आधारित थी, जिसे 1995 में रिलीज किया गया। इस मूवी में शिवसैनिकों को विशेष तौर पर दंगा करते और मुस्लिम को लूटते दिखाया गया। हालांकि, फिल्म के एक सीन में बाल ठाकरे को दंगों को लेकर दुख जताते भी दिखाया गया।

जब यह फिल्म रिलीज होने वाली थी, तब बाल ठाकरे ने इसे मुंबई में रिलीज नहीं होने देने की धमकी दी थी। उस दौरान इस फिल्म के डिस्ट्रिब्यूटर अमिताभ बच्च्न उनके पास गए और पूछा कि क्या वे शिवसैनिकों को दंगाई के रूप में दिखाने पर बुरा लगा। बाल ठाकरे ने चौंकाते हुए कहा था कि नहीं, उन्हें इस बात का बुरा लगा कि दंगों पर उनके चरित्र को दुख प्रकट करते दिखाया गया। उन्होंने कहा था कि वह किसी चीज पर दुख प्रकट नहीं करते।

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