महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक मामला अब एक चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गया है। जिस 24 वर्षीय युवक ने कथित पेपर लीक की जानकारी MPSC को देकर खुद को ‘व्हिसलब्लोअर’ बताया था, वही अब इस मामले में गिरफ्तार छह आरोपियों में शामिल है।

मुंबई क्राइम ब्रांच के मुताबिक, लोकगीत उर्फ गौरव पाटील खुद कथित तौर पर लीक हुआ प्रश्नपत्र हासिल कर चुका था। पुलिस का दावा है कि उसे यह पेपर उसकी प्रेमिका रुतुजा के जरिए मिला था। दोनों के रिश्ते में खटास आने और बाद में ब्रेकअप होने के बाद गौरव ने MPSC को पेपर लीक की जानकारी दी।

ब्रेकअप के बाद सामने आया पेपर लीक का राज

पुलिस के अनुसार, गौरव और रुतुजा के बीच प्रेम संबंध थे। जांच में सामने आया कि रुतुजा को परीक्षा से कुछ दिन पहले कथित तौर पर लीक हुआ प्रश्नपत्र मिला था। इसके बाद उसने परीक्षा से दो दिन पहले व्हाट्सऐप के जरिए गौरव को भी प्रश्नपत्र भेजा था।

पुलिस का कहना है कि गौरव का भाई भी परीक्षा देने वाला था। हालांकि, बाद में गौरव और रुतुजा का रिश्ता खत्म हो गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसके बाद गौरव ने MPSC को ईमेल कर परीक्षा का पेपर लीक होने की शिकायत की।

पुलिस का आरोप है कि गौरव को डर था कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद रुतुजा उसे छोड़कर आगे बढ़ जाएगी। इसी वजह से उसने पेपर लीक का मामला सामने लाने का फैसला किया।

रुतुजा ने हासिल की सातवीं रैंक

क्राइम ब्रांच के अनुसार, रुतुजा ने ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा दी और भर्ती प्रक्रिया में सातवीं रैंक हासिल की। पुलिस ने उसे मामले में नोटिस जारी किया है। क्राइम ब्रांच के डीसीपी राज तिलक रौशन ने बताया कि शुरुआत में गौरव ने MPSC से संपर्क कर पेपर लीक की जानकारी देने का दावा किया था। लेकिन जांच आगे बढ़ने पर उसके खुद इस मामले में शामिल होने की बात सामने आई।

तीन MPSC कर्मचारियों पर भी कार्रवाई

जांच के दौरान पुलिस को कथित पेपर लीक के नेटवर्क में MPSC के तीन कर्मचारियों की भूमिका का पता चला। पुलिस के मुताबिक, रुतुजा के पिता अमृत पाटील ने परीक्षा से पहले नंदुरबार निवासी बिचौलिए प्रवीण पाटील से संपर्क किया था।

पुलिस का आरोप है कि प्रवीण की पहचान MPSC के तीन कर्मचारियों से थी। इनमें सहायक अनुभाग अधिकारी विश्वेश्वर नाकाटे और गोपाल मराठे तथा अंडरसेक्रेटरी अभिजीत लेंडवे शामिल हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, प्रवीण ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए MPSC कर्मचारियों को 5 लाख रुपये दिए थे और बाद में अतिरिक्त रकम देने का वादा किया गया था। इसके बाद कथित प्रश्नपत्र अमृत ने अपनी बेटी रुतुजा को दिया।

शिकायत के बाद खुद ही पीछे हटने लगा गौरव

पुलिस के अनुसार, गौरव ने खुद को एक अभ्यर्थी का दोस्त बताते हुए MPSC को ईमेल भेजा और 22 मार्च को हुई परीक्षा का पेपर लीक होने का आरोप लगाया। उसने अपनी शिकायत को लेकर आयोग से दोबारा भी संपर्क किया।

इसी दौरान NCP (SP) विधायक रोहित पवार ने भी जुलाई के अंत में इस मामले को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया था कि नंदुरबार के एक कोचिंग संस्थान के कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से दो दिन पहले अधिकांश प्रश्नों की जानकारी मिल गई थी। इसके बाद MPSC ने मुंबई पुलिस से संपर्क किया और क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने मामले की जांच शुरू की।

जांच के शुरुआती चरण में गौरव का बयान दर्ज किया गया। पुलिस का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, गौरव को एहसास हुआ कि जांचकर्ता उस तक भी पहुंच रहे हैं। इसके बाद उसने MPSC से दोबारा संपर्क किया और अपनी शिकायत से पीछे हटने की कोशिश की। उसने दावा किया कि वह परीक्षा प्रक्रिया को लेकर भ्रमित था।

पुलिस ने कहा- ‘व्हिसलब्लोअर होता तो परीक्षा से पहले बताता’

जांचकर्ताओं का दावा है कि पेपर वास्तव में लीक हुआ था और गौरव ने भी परीक्षा से पहले उसे हासिल किया था। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, अगर गौरव वास्तव में व्हिसलब्लोअर था तो उसे परीक्षा होने से पहले ही MPSC को इसकी सूचना देनी चाहिए थी।

जांच के बाद क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट MPSC को सौंपी और मामले में FIR दर्ज की। बुधवार को छह आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

44,500 अभ्यर्थियों ने दी थी परीक्षा

ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 22 मार्च को महाराष्ट्र के छह राजस्व मंडलों में आयोजित की गई थी। इस परीक्षा के जरिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन में ग्रुप-बी के 154 राजपत्रित पदों पर भर्ती होनी थी।

करीब 44,500 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। 12 जून को परिणाम जारी हुआ, जिसमें 506 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए योग्य पाए गए। इसके बाद 22 जुलाई को 488 अभ्यर्थियों की अस्थायी मेरिट लिस्ट जारी की गई।

MPSC ने परीक्षा रद्द की, दोबारा होगी परीक्षा

क्राइम ब्रांच की जांच में पेपर लीक की पुष्टि के बाद MPSC ने ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा रद्द कर दी है। आयोग ने कहा है कि इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थियों को दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी और उनके लिए नई परीक्षा आयोजित की जाएगी।

इस पूरे मामले ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, एक ऐसे व्यक्ति का कथित पेपर लीक में आरोपी बनना, जिसने खुद आयोग के सामने शिकायत की थी, इस मामले को और भी पेचीदा बना देता है।

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