कंगना रनौत पर भड़के नवाब मलिक, बोले- ऐसे बयान से पहले गांजा पीती हैं, वापस ले लेना चाहिए पद्मश्री

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि लगता है कि मोहतरमा मलाणा क्रीम (हिमाचल में उगने वाली ख़ास तरह की हशीश) लेकर ज़्यादा बोल रही हैं। मलाणा क्रीम का डोज़ ज़्यादा हो गया है।

कंगना रनौत के आजादी भीख में मिलने वाले बयान को लेकर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक ने उनको गिरफ्तार करने की मांग की है। (एक्सप्रेस फोटो)

आजादी को लेकर दिए गए विवादित बयान की वजह से फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत चौतरफा आलोचनाओं से घिरी हुई है। अब एनसीपी नेता व महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने भी कंगना के आजादी वाले बयान को लेकर हमला बोला है और कहा है कि ऐसे बयान से पहले वे गांजा पीती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि उनसे पद्मश्री वापस ले लेना चाहिए।

शुक्रवार को कंगना रनौत के देश की आजादी भीख में मिलने वाले बयान पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि हम उनके इस बयान की कठोर निंदा करते हैं। कंगना रनौत ने स्वाधीनता सेनानियों का अपमान किया है। केंद्र सरकार को कंगना रनौत से पद्मश्री वापस ले लेना चाहिए और उनको गिरफ्तार करना चाहिए।  

आगे महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि लगता है कि मोहतरमा मलाणा क्रीम (हिमाचल में उगने वाली ख़ास तरह की हशीश) लेकर ज़्यादा बोल रही हैं। मलाणा क्रीम का डोज़ ज़्यादा हो गया है इसलिए उल-जुलूल की बातें कर रहीं हैं। नवाब मलिक के साथ ही कई पार्टियों के नेता भी कंगना के इस बयान को लेकर उनकी आलोचना कर चुके हैं। आम आदमी पार्टी ने भी मुंबई पुलिस से शिकायत कर इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

बता दें कि हाल ही में पद्म पुरस्कार से सम्मानित की गईं कंगना रनौत ने पिछले दिनों एक टीवी चैनल पर आयोजित कार्यक्रम में रानी लक्ष्मी बाई सहित कई स्वतंत्रता सेनानियों का नाम लेते हुए कहा था कि ये लोग जानते थे कि खून बहेगा। लेकिन ये हिंदुस्तानी खून नहीं होगा। वह आजादी नहीं थी बल्कि भीख थी। जो आजादी मिली है वह 2014 में मिली है।

कंगना के इस बयान पर भाजपा सांसद वरुण गांधी ने भी आपत्ति जताई थी। वरुण गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि कभी महात्मा गांधी जी के त्याग और तपस्या का अपमान, कभी उनके हत्यारे का सम्मान और अब शहीद मंगल पांडे से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों का तिरस्कार। इस सोच को मैं पागलपन कहूं या फिर देशद्रोह?

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