ताज़ा खबर
 

महाराष्ट्रः इधर चल रही थी बॉम्बे HC में बेल पर सुनवाई, उधर, स्टेन स्वामी ने अस्पताल में तोड़ दिया दम

स्टेन स्वामी के निधन पर विपक्षी दलों के नेताओं ने दुख जताया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने फादर स्टेन स्वामी के निधन पर दुख जताते हुए सोमवार को कहा कि वह न्याय और मानवीयता के हकदार थे।

स्टेन स्वामी (फाइल फोटो)

एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी पादरी स्टेन स्वामी का मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। स्वामी का जिस अस्पताल में उपचार चल रहा था, उसके एक अधिकारी ने बंबई उच्च न्यायालय को सोमवार को इसकी सूचना दी। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा स्वामी की एक याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें 29 मई को तलोजा जेल से निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

सोमवार को अदालत में उनकी जमानत याचिका को लेकर सुनवाई चल ही रही थी कि इस बीच उनके निधन की सूचना अस्पताल के डॉक्टरों के द्वारा दिया गया। बताते चलें कि स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी यूएपीए के तहत की गयी थी। होली फैमिली अस्पताल के निदेशक डॉ इयान डिसूजा ने अदालत को बताया कि रविवार तड़के स्वामी को दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। लेकिन उनके हालात में कोई सुधार नहीं हो पाया और उनका निधन हो गया।

फादर स्टेन ने बगाइचा नामक एक संगठन की स्थापना की थी। जो आदिवासियों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित एक संगठन है, इस संगठन के माध्यम से माओवादियों के नाम पर होने वाले आदिवासी युवाओं पर जुल्म के खिलाफ कार्य किया जाता है।

विपक्षी दलों ने जताया दुख: स्टेन स्वामी के निधन पर विपक्षी दलों के नेताओं ने दुख जताया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने फादर स्टेन स्वामी के निधन पर दुख जताते हुए सोमवार को कहा कि वह न्याय और मानवीयता के हकदार थे। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा, ‘‘फादर स्टैन स्वामी को विनम्र श्रद्धांजलि। कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक व्यक्ति जिसने जीवन भर गरीबों-आदिवासियों की सेवा की और मानव अधिकारों की आवाज बना, उन्हें मृत्यु की घड़ी में भी न्याय एवं मानव अधिकारों से वंचित रखा गया।’’

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी ने सोमवार को कहा कि वह फादर स्टैन स्वामी के निधन से दुखी और आक्रोशित हैं। येचुरी ने ट्वीट किया, ‘‘फादर स्टैन स्वामी के निधन से बहुत दुखी और आक्रोशित हूं। वह एक पादरी और सामाजिक कार्यकर्ता थे जिन्होंने कमजोरों की अथक सहायता की। अधिकनायकवादी गैर कानूनी गतिविधियां नियंत्रक अधिनियम (यूएपीए) के तहत उन्हें हिरासत में लिया गया और आमनवीय व्यवहार किया गया, जबकि उन पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ था।’’

Next Stories
1 रद्द की गई IT Act की धारा 66ए के तहत लोगों पर अभी भी हैं केस, बोला SC- ये हैरान करने वाला
2 मुकेश अंबानी के छोटे बेटे को बड़ी जिम्मेदारी, ग्रीन एनर्जी कारोबार के लिए उतारी गई दो कंपनियों के बनाए गए निदेशक, जानें- अब तक क्या कर रहे थे काम
3 TMC में शामिल हुए प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी, बहन शर्मिष्ठा ने फैसले को बताया दुखद
ये पढ़ा क्या?
X