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पलट गए देवेंद्र फडणवीस: जो करते थे आरक्षण खत्म करने का दावा, अब आरक्षण के पक्ष में उतरे

मराठा और मुसलिमों को नौकरी व शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण देने के पूर्ववर्ती आघाड़ी सरकार के फैसले की चुनाव प्रचार के दौरान देवेंद्र फडणवीस ने खुलकर आलोचना की थी। उनका कहना था कि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने आरक्षण देने का फैसला चुनाव में राजनीतिक फायदे के मद्देनजर लिया है। इसलिए अगर उनकी […]

Author November 16, 2014 08:50 am
आरक्षण खत्म करने का दावा करने वाले फडणवीस अब आरक्षण के पक्ष में

मराठा और मुसलिमों को नौकरी व शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण देने के पूर्ववर्ती आघाड़ी सरकार के फैसले की चुनाव प्रचार के दौरान देवेंद्र फडणवीस ने खुलकर आलोचना की थी। उनका कहना था कि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने आरक्षण देने का फैसला चुनाव में राजनीतिक फायदे के मद्देनजर लिया है। इसलिए अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो मराठा और मुसलिमों को दिया जानेवाला आरक्षण खत्म कर दिया जाएगा। मगर शुक्रवार को अदालती निर्देश के बाद अपनी भूमिका बदलते हुए फडणवीस ने कहा कि उनकी सरकार मराठा आरक्षण के लिए हर संभव कोशिश करेगी। इसके लिए शनिवार सर्वदलीय बैठक बुलाकर मुख्यमंत्री फडणवीस ने मराठा आरक्षण सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश की।

मानव संसाधन मंत्री विनोद तावडे की आरक्षण पर तुरंत बैठक करने की मांग के बाद शनिवार को फडनवीस ने सुबह उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इनमें कानूनी विभाग के सचिव और वरिष्ठ विधिवेत्ता के साथ आरक्षण के मुद्दे पर सलाह ली गई। मराठा आरक्षण के रास्ते में आई कानूनी अड़चनों पर सलाह के बाद मुख्यमंत्री ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस सर्वदलीय बैठक में भाग लेने के बाद कांग्रेस के पूर्व मंत्री नसीम खान ने कहा कि मराठा और मुसलिम आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सरकार सभी पार्टियों के सहयोग से एक समिति का गठन करने जा रही है। जबकि शिव संग्राम पार्टी के प्रमुख विनायक मेटे ने बैठक के बाद कहा कि सरकार ने सभी दलों को आश्वासन दिया है कि आरक्षण पर हाई कोर्ट के अंतरिम स्थगन के बाद वह अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में जाएगी।

मगर इससे पहले आरक्षण को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी था। शिव सेना ने मराठा आरक्षण पर लगी अदालती रोक को आघाड़ी सरकार का पाप बताया। शिव सेना नेता दिवाकर रावते ने कहा कि मराठा आरक्षण गैर कानूनी था। कांग्रेस को मराठा समाज को आरक्षण देना ही नहीं था। कांग्रेस को डर था कि मुसलिमों को आरक्षण देने से मराठा समुदाय कांग्रेस से दूर हो जाएगा।

शिवसेना के अलावा कांग्रेस ने भी मराठा आरक्षण पर अदालती रोक के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। कांग्रेस नेता नारायण राणे ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने अदालत में ठीक तरह से मराठा आरक्षण का पक्ष नहीं रखा क्योंकि उनकी अध्यक्षता में बनी समिति ने संविधान और कानूनों का ध्यान रखकर निर्णय लिया था। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि अगली सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से स्वतंत्र तौर पर याचिका दायर की जाएगी। उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सरकार की है। राकांपा के प्रमुख शरद पवार ने कहा कि समाज के सभी घटकों का विकास हो इसलिए मराठा आरक्षण पर सरकार को ही कोई रास्ता निकालना पड़ेगा।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूववर्ती आघाड़ी सरकार ने सरकारी नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों में मराठा समाज को 16 और मुसलिमों को पांच फीसद आरक्षण दिया था। यह सर्वोच्च न्यायालय के 50 फीसद से ज्यादा आरक्षण न देने के फैसले के खिलाफ था। लिहाजा सामाजिक कार्यकताओं और गैर सरकारी संगठनों ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर फैसला देते हुए शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने सरकारी नौकरियों में मराठा और मुसलिम आरक्षण पर रोक लगा दी। साथ ही कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में मुसलिमों को दिया जा रहा पांच फीसद आरक्षण जारी रहेगा।

 

 

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