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Maharashtra की राजनीति पर बोले कुमार विश्वास- ‘क्या अब 5 साल दर्दभरी शेर-ओ-शायरी सुनाएंगे संजय राउत’

Maharashtra Govt Formation BJP Devendra Fadnavis: संजय राउत ने कहा कि अजित पवार ने शिवसेना की पीठ में छुरा घोंपा है। सरकार बनाने के लिए बीजेपी से हाथ मिलाना विश्वासघात है। वहीं कुमार विश्वास ने राउत के बयान के बाद चुटकी ली है।

कुमार विश्वास और संजय राउत फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

Maharashtra Govt Formation BJP Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र में रातोंरात हुए बड़े राजनीतिक उलटफेर में बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। उनके साथ एनसीपी के अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। इस घटनाक्रम के बाद शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने शनिवार को कहा कि एनसीपी नेता अजित पवार ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए बीजेपी से हाथ मिला कर शिवसेना की पीठ में छुरा घोंपा है। जिसके बाद कवि कुमार विश्वास ने संजय राउत पर तंज कसा है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि यानि अब शेर-ओ-शायरी सिर्फ़ हम लोग के लिए बख्श दी जाएगी?

क्या बोले कुमार विश्वास:
महाराष्ट्र में शिवसेना की सरकार बनाने के मंसूबे को तगड़ा झटका लगने के बाद संजय राउत की शेरो शायरी को लेकर कुमार विश्वास ने चुटकी ली है। उन्होंने ट्वीट में लिखा- यानी अब शेर-ओ-शायरी सिर्फ़ हम लोग के लिए बख्श दी जाएगी? या पूरे पांच  साल दर्द और बदले के शेर सुनने पड़ेंगे?

संजय राउत का बयान: शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने शनिवार को कहा, ‘‘अजित पवार ने शिवसेना की पीठ में छुरा घोंपा है। सरकार बनाने के लिए भाजपा से हाथ मिलाना विश्वासघात है।’’ इसके बाद उन्होंने ने कहा, ‘‘अजित पवार के फैसले में एनसीपी प्रमुख शरद पवार की मंजूरी नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि शरद पवार और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे जल्द ही एक संयुक्त प्रेसवार्ता करेंगे।

राजनीतिक उलटफेर: महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के तौर पर एक बार फिर बीजेपी के देवेंद्र फड़णवीस की वापसी के साथ ही महीने भर से चल रहे राजनीतिक गतिरोध का नाटकीय रूप से अंत हो गया। एनसीपी नेता अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल सुबह करीब साढ़े सात बजे एक समारोह में दोनों को शपथ दिलायी। गौरतलब है कि शिवसेना पर पिछले महीने विधानसभा चुनाव में लोगों के जनादेश का अपमान करने का आरोप लगाते हुए फड़णवीस ने कहा, ‘‘लोगों ने हमें स्पष्ट जनादेश दिया था लेकिन शिवसेना ने नतीजों के बाद अन्य दलों के साथ गठबंधन करने की कोशिश की जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लगा। महाराष्ट्र को स्थायी सरकार की जरूरत है न कि ‘खिचड़ी’ सरकार की।’’   

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