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अपनी पार्टी से बड़े धोखे के बाद भी अजित पवार के खिलाफ क्यों नहीं गई NCP? जानिए

शिवसेना नेता संजय राउत ने भी कहा है कि 'शरद पवार को समझने के लिए कई जन्म लेने पड़ेंगे।' चर्चा के दौरान ये बात भी उठी कि भाजपा की तरफ से शरद पवार के खिलाफ भी कोई बयानबाजी नहीं की गई है।

ajit pawarशरद पवार के साथ अजित पवार। (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र में भाजपा सरकार गिर चुकी है और देवेंद्र फडणवीस सीएम और अजित पवार डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं इस पूरे घटनाक्रम में एक बात ध्यान देने वाली ये है कि अजित पवार ने पार्टी के विरुद्ध जाकर इतना बड़ा कदम उठाया और बगावत की, लेकिन अभी तक भी एनसीपी की तरफ से अजित पवार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है और अभी भी उन्हें मनाने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं एनसीपी के नेताओं ने मीडिया में भी अजित पवार के खिलाफ कोई कठोर बात भी नहीं की गई।

ऐसे में यह सवाल उठना स्वभाविक है कि एनसीपी की तरफ से अजित पवार के प्रति इतनी उदारता क्यों बरती गई? टीवी चैनल टीवी9 भारतवर्ष पर एक कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि एनसीपी के नेता अभी भी अजित पवार के संपर्क में हैं। अभी टीवी चैनलों के हवाले से खबर आयी है कि ट्राइडेंट होटल में होने वाली तीनों दलों की संयुक्त बैठक में अजित पवार शामिल हो सकते हैं। इस पर कार्यक्रम में मौजूद पैनलिस्ट यशवंत देशमुख ने कहा कि कोई भी ये बात मानने के लिए तैयार नहीं है कि अजित पवार ने जो भी किया, वो शरद पवार की सहमति के बगैर किया।

पैनलिस्ट ने कहा कि शरद पवार की राजनीति में इतना कुछ हो चुका है कि उन्हें अभी भी महाराष्ट्र की राजनीति का चाणक्य कहा जाता है। जब न्यूज एंकर ने सवाल किया कि क्या आप ये कहने की कोशिश कर रहे हैं कि अजित पवार ने जो किया वो शरद पवार की सहमति से किया? इस पर पैनलिस्ट ने कहा कि यदि ये बात आप टीवी, कैमरे बंद करके किसी भी शिवसेना या कांग्रेस के नेता से पूछेंगे, तो वो भी यही कहेंगे कि इनका कोई भरोसा नहीं है।

पैनलिस्ट ने इस बात का भी जिक्र किया कि शिवसेना नेता संजय राउत ने भी कहा है कि ‘शरद पवार को समझने के लिए कई जन्म लेने पड़ेंगे।’ चर्चा के दौरान ये बात भी उठी कि भाजपा की तरफ से शरद पवार के खिलाफ भी कोई बयानबाजी नहीं की गई है। केन्द्रीय मंत्री रामदास अठावले तो ये भी कहते रहे कि नरेंद्र मोदी और शरद पवार तो अच्छे दोस्त हैं, तो वह अजित पवार के सिर पर हाथ क्यों नहीं रख देते।

यशवंत देशमुख ने अपने तर्क के समर्थन में ये भी कहा कि पांच साल पहले जब विधानसभा में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था, तब शरद पवार और उनकी पार्टी एनसीपी ने भाजपा को बिना किसी शर्त के समर्थन दिया था।

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