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महाराष्ट्र में CM पर संग्राम, उद्धव के लिए पवार राजी, पर कांग्रेसी बोले- चर्चा बाकी, NCP चीफ की टिप्पणी पर नहीं दे सकते बयान

चव्हाण ने कहा कि "कई मुद्दों पर हमारे बीच सहमति बन गई है, लेकिन चर्चा कल भी जारी रहेगी। वहीं जब सीएम पद के लिए उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बनने पर सवाल किया गया तो कांग्रेस नेता ने कहा कि जो भी शरद पवार जी ने कहा है कि मैं उस बारे में कुछ नहीं कहूंगा।

Author मुंबई | Updated: November 22, 2019 9:46 PM
महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर खींचतान जारी।

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर जारी चर्चाओं के बीच आज शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं की संयुक्त बैठक हुई। इस बैठक में सरकार गठन को लेकर कोई ठोस नतीजा निकलने की उम्मीद थी, लेकिन अब सीएम पद को लेकर पेंच फंसता नजर आ रहा है। दरअसल बैठक के बाद एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा कि ‘सीएम पद के लिए उद्धव ठाकरे के नाम पर हम सभी के बीच सहमति बन गई है।’ वहीं कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि ‘तीनों पार्टियों के बीच सरकार गठन को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई।’

चव्हाण ने कहा कि “कई मुद्दों पर हमारे बीच सहमति बन गई है, लेकिन चर्चा कल भी जारी रहेगी। वहीं जब सीएम पद के लिए उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बनने पर सवाल किया गया तो कांग्रेस नेता ने कहा कि जो भी शरद पवार जी ने कहा है कि मैं उस बारे में कुछ नहीं कहूंगा। जब हमारे बीच सभी मुद्दों पर चर्चा हो जाएगी, तो हम इस पर बात करेंगे।” वहीं कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने इस पर कहा कि आज तीनों दलों की बैठक में सरकार गठन पर चर्चा हुई और यह चर्चा कल भी जारी रहेगी।

सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि यदि उद्धव ठाकरे सीएम पद नहीं संभालते हैं तो फिर पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत भी सीएम पद की रेस में शामिल हैं। संजय राउत ने अपने एक ताजा बयान में कहा है कि उद्धव ठाकरे ने सीएम बनने के लिए अपनी सहमति दे दी है।

वहीं आज की बैठक के बाद एनसीपी चीफ शरद पवार ने संकेत दिए कि शनिवार को तीनों दल संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकती हैं, जिसमें यह जानकारी दी जाएगी कि तीनों पार्टियां राज्यपाल के पास सरकार गठन का दावा पेश करने कब जाएंगी? तीनों दलों की गठबंधन सरकार का नाम महा विकास आघाडी होगा।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि एनसीपी-कांग्रेस और शिवसेना का गठबंधन अवसरवादिता है और इनकी सरकार शायद 6-7 महीने ही चल पाएगी। विचारधारा के लिहाज से अलग-अलग पार्टियां सिर्फ भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए साथ आ रही हैं।

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