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Maharashtra: पांच साल बाद महाराष्ट्र को मुस्लिम मंत्री मिले, तीन को कैबिनेट रैंक दिया गया

महाराष्ट्र के 2019 विधान सभा चुनाव में 10 मुस्लिम विधायक चुन कर आए है, वही 2014 नौ विधायक चुने गए थे। भाजपा के साथ मिलकर 1995 में सरकार बनाने वाली शिवसेना ने पार्टी के एकमात्र मुस्लिम विधायक साबिर शेख को 1995 में कैबिनेट मंत्री बनाया था।

एनसीपी नेता नवाब मलिक, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल में पांच साल बाद किसी मुस्लिम नेता को मंत्री बनाया गया है। महाराष्ट्र की उद्वव सरकार में चार मुस्लिम प्रतिनिधियों को मंत्री बनने का मौका मिला है। इनमें तीन कैबिनेट और एक राज्य मंत्री शामिल है। सोमवार को एनसीपी के नवाब मलिक और हसन मुश्रीफ और कांग्रेस के असलम शेख को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। शिवसेना के अब्दुल सत्तार ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली।

चार मुस्लिम प्रतिनिधि को मंत्री बनाया गया: गौरतलब है कि यह राज्य की कैबिनेट में अब तक के सबसे ज्यादा मुस्लिम प्रतिनिधि को मंत्री बनाया गया है। 2004 में दिवंगत सीएम विलासराव देशमुख की अगुवाई वाली सरकार में तीन मुस्लिम मंत्री थे, जिन्होंने कैबिनेट रैंक हासिल की। हालांकि, उच्चतम मुस्लिम प्रतिनिधित्व देशमुख के कार्यकाल में 1999 और 2003 के बीच में था, जिसमें कुल सात मंत्री थे, केवल दो को कैबिनेट मंत्री बने थे।

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1960 से 2014 तक कुल 64 मुस्लिम मंत्री हुए हैं: बता दें कि जब महाराष्ट्रा राज्य के रूप में 1960 में अस्तित्व में आया तो राज्य की आबादी का 11.5 प्रतिशत मुस्लिम थे। पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली सरकार में किसी भी मुस्लिम नेता को मंत्री नहीं बनाया गया था। महाराष्ट्र के 2019 विधान सभा चुनाव में 10 मुस्लिम विधायक चुन कर आए है, वही 2014 नौ विधायक चुने गए थे। भाजपा के साथ मिलकर 1995 में सरकार बनाने वाली शिवसेना ने पार्टी के एकमात्र मुस्लिम विधायक साबिर शेख को 1995 में कैबिनेट मंत्री बनाया था। इस बार, पार्टी ने अब्दुल सतार को एक एमओएस रैंक आवंटित किया है। 1960 से 2014 तक कुल 64 मुस्लिम मंत्री हुए हैं, जिनमें 31 कैबिनेट मंत्री और 33 एमओएस शामिल हैं।

राज्य में अल्पसंख्यक खुद को सत्ता से कर रहे हैं दूर: कई अन्य अल्पसंख्यक समूहों ने राज्य में खुद को सत्ता केंद्रों से अलग कर लिया है। प्रभावशाली पारसी समुदाय का 1995 के बाद से राज्य सरकार में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, जबकि 1978 के बाद से सरकार में कोई ईसाई प्रतिनिधि नहीं है। जबकि जैने समाज से राजेंद्र पाटिल को शिवसेना की तरफ से मंत्री बनाया गया है।

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