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Maharashtra Elections: 40 सीटों पर बागियों की टेंशन, कम मतदान और कृषि संकट समेत ये मुद्दे बिगाड़ सकते हैं BJP का खेल!

Maharashtra Elections: एक पूर्व नौकरशाह ने बताया, 'हालांकि भाजपा ने चुनाव में बड़े पैमाने पर खुद को बचाव की स्थिति में लाकर कांग्रेस-राकांपा संगठन को हतोत्साहित कर दिया है, मगर उसे शिवसेना और कई क्षेत्रों में भाजपा के बागियों के चलते विरोध का सामना करना पड़ रहा है।'

Author नई दिल्ली | Published on: October 21, 2019 1:08 PM
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस।

Maharashtra Elections 2019: महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना गंठबधन बुरी तरह से घिरे विपक्ष पर बढ़त बनाते हुए दिख रहा हैा। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है प्रदेश में 40 सीटों पर बागी भगवा गठबंधन को प्रभावित कर सकते हैं। प्रदेश में आज यानी सोमवार (21 अक्टूबर, 2019) को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो रहा है, जहां 8.97 करोड़ मतदाता 288 निर्वाचन क्षेत्रों के 3,237 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे।

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक प्रदेश के एक पूर्व नौकरशाह ने बताया, ‘हालांकि भाजपा ने चुनाव में बड़े पैमाने पर खुद को बचाव की स्थिति में लाकर कांग्रेस-राकांपा संगठन को हतोत्साहित कर दिया है, मगर उसे शिवसेना और कई क्षेत्रों में भाजपा के बागियों के चलते विरोध का सामना करना पड़ रहा है।’

टीओआई में छपी खबर के मुताबिक राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव में सत्तासीन गठबंधन कृषि संकट के चलते चिंतित होगा। इसके अलावा प्रशासन द्वारा राज्य के कुछ हिस्सों में हाल ही में आई बाढ़ से निपटने या पीएमसी बैंक घोटाले के कारण और आर्थिक मंदी के कारण खासा चिंता का विषय हो सकता है। भाजपा की एक चिंता कम मतदान भी है, चूंकि अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनाव में थकान के चलते मुंबई, पुणे और अन्य शहरों में मतदान प्रतिशत में कमी देखने को मिल सकती है।

बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में एक रैली को संबोधन के दौरान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात को जाहिर कर चुके हैं। रैली के दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘गुजरात और गोवा ना जाएं। और ना ही पुणे में अपने रिश्तेदारों से मिलने की सोचें। सोमवार को अपने निकटतम मतदान केंद्रों की लाइनों में लगे और वोट डालें।’

एक राजनीतिक विशेषज्ञ के मुताबिक, ‘चुनावी बयानबाजी के कारण, चुनाव अभियान मुख्य रूप से प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एनसीपी लीडर शरद पवार के आसपास केंद्रित था। चुनाव के दौरान फडणवीस ने जहां मतदाताओं का ध्यान तकनीक और देशभक्ति की ओर आकर्षित करने की कोशिश की। वहीं एनसीपी लीडर पवार ने नेहरूवादी युग और सामूहिक राजनीति की वकालत की।’ उल्लेखनीय है कि फडणवीस और पवार ने प्रदेश में खूब चुनाव प्रचार किया।

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