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बीजेपी दफ्तर की बात आई तो सीएम देवेंद्र फडणवीस ने किया नियमों में बदलाव!

कोर्ट ने मुंबई म्यूनिसिपैलिटी कॉरपोरेशन को जवाहरलाल नेहरु गार्डन से सरकारी कार्यालयों और अवैध कब्जे को हटाने का निर्देश दिया। उस वक्त यहां मौजूद भाजपा कार्यालय को हटाने के बजाए सिर्फ तोड़कर छोटा कर दिया गया था।

बीते मार्च माह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई के नए डेवलेपमेंट प्लान का ऐलान करते हुए कहा था कि सरकार मुंबई में सार्वजनिक खुली जगहों जैसे पार्क इत्यादि के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। लेकिन सिर्फ 6 महीने बाद ही सरकार ने अपने ही बनाए इस नियम की अनदेखी कर दी है! नियमों की यह अनदेखी दक्षिणी मुंबई में स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय को फायदा पहुंचाने के लिए की गई है। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इससे इंकार किया है। दरअसल 22 सितंबर को सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने डेवलेपमेंट प्लान में बड़ा बदलाव करते हुए एक प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस प्रस्ताव के तहत “यदि किसी सार्वजनिक खुली जगह पर पहले से ही कंस्ट्रक्शन मौजूद है और वह मुंबई के नए डेवलेपमेंट प्लान के दायरे में नहीं आ रहा है, तो संबंधित अथॉरिटीज की इजाजत से उस कंस्ट्रक्शन को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।”

अहम बात ये है कि भाजपा का प्रदेश मुख्यालय जो कि 72000 वर्ग फीट में पार्क जवाहरलाल नेहरु गार्डन के एक हिस्से में स्थित है, उसे सरकार के नए प्रस्ताव से सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। बता दें कि साल 2013 में जवाहरलाल नेहरु गार्डन उस वक्त सुर्खियों में आया था, जब स्थानीय निकायों जैसे नरीमन प्वाइंट-चर्चगेट सिटीजन एसोसिएशन (NPCCA) ने इस पार्क को कब्जों से मुक्त कराने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। मार्च, 2017 में NPCCA की यह मुहिम रंग लायी और कोर्ट ने मुंबई म्यूनिसिपैलिटी कॉरपोरेशन को जवाहरलाल नेहरु गार्डन से सरकारी कार्यालयों और अवैध कब्जे को हटाने का निर्देश दिया। उस वक्त यहां मौजूद भाजपा कार्यालय को हटाने के बजाए सिर्फ तोड़कर छोटा कर दिया गया था। भाजपा के टॉप नेताओं का दावा है कि संबंधित अथॉरिटीज से इजाजत लेने के बाद ही ऐसा किया गया था।

अब सरकार ने 22 सितंबर को दिए अपने नए प्रस्ताव में जो प्रावधान किया है, उसके बाद सार्वजनिक जगहों पर मौजूद ‘टॉलरेटेड’ कंस्ट्रक्शन को संबंधित अथॉरिटीज की इजाजत से सुरक्षित कर दिया है। वहीं देवेंद्र फडणवीस ने ‘टॉलेरेटेड स्ट्रक्चर’ के क्लॉज को नए डेवलेपमेंट प्लान में शामिल करने के आरोपों से साफ इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि भाजपा प्रदेश मुख्यालय का दो तिहाई हिस्सा पहले ही तोड़ा जा चुका है और अब सिर्फ वही हिस्सा बचा है, जिसकी इजाजत कोर्ट ने दी थी। भाजपा मुख्यालय पहले से ही कोर्ट के आदेश से सुरक्षित है और उसे नया क्लॉज बनाकर फिर से सुरक्षित करने की कोई जरुरत नहीं है।

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