महाराष्ट्र ने शनिवार को घर-घर जाकर हाउस लिस्टिंग और आवास जनगणना अभियान (Housing Census exercise) शुरू किया जो 14 जून तक चलेगा। यह अभियान 2027 की जनगणना की तैयारियों का हिस्सा है। जनगणना अभियान के तहत सरकारी अधिकारी उनके दरवाजे पर दस्तक देते हुए दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में निवासियों के लिए यह जानना जरूरी है कि उनके घर आने वाले अधिकारी असली हैं या कोई फ्रॉड। यह जांच करने का एक सरल तरीका है QR Code

महाराष्ट्र में नागरिकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए, अधिकारियों ने जनगणना कर्मियों और पर्यवेक्षकों द्वारा ले जाए जाने वाले पहचान पत्रों और नियुक्ति पत्रों पर क्यूआर कोड आधारित सत्यापन प्रणाली (QR code-based verification system) शुरू की है।

अपने दरवाजे पर आए अधिकारी की पहचान कैसे करें?

जनगणना अधिकारी अगर आपके घर आते हैं तो नागरिक उनकी वास्तविक पहचान वेरिफाई कर सकते हैं। पुणे के नगर जनगणना अधिकारी विजय लांडगे ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “यह जानने के लिए कि अधिकारी वास्तविक जनगणना अधिकारी है या नहीं, नागरिक उनके नियुक्ति पत्र और आधिकारिक पहचान पत्र की जांच कर सकते हैं। उन्हें इन दस्तावेजों पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करना होगा और स्कैन से तुरंत साफ हो जाएगा कि व्यक्ति अधिकृत जनगणना अधिकारी है या नहीं । ”

देश भर में इसी तरह की योजनाओं के तहत जनगणना 2027 के गणनाकर्ताओं के लिए क्यूआर कोड-आधारित पहचान पत्र जारी किए जाएंगे ताकि निवासियों को यह सत्यापित करने में मदद मिल सके कि उनके दरवाजे पर कौन है। यह कदम देशभर में साइबर फ्रॉड में बढ़ोत्तरी के जवाब में उठाया गया है। जालसाज तेजी से सरकारी अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधियों के रूप में खुद को पेश कर रहे हैं। यह फ्रॉड जाली दस्तावेजों, नकली पहचान पत्रों और डिजिटल वेरिफिकेशन का इस्तेमाल करके नागरिकों को धोखा दे रहे हैं और उनसे धोखाधड़ी कर रहे हैं।

अधिकारियों ने निवासियों को जालसाजों से सावधान रहने की चेतावनी दी है। जनगणना अधिकारी विजय ने कहा, “जनगणना के वैध अधिकारी कभी भी गोपनीय जानकारी (जनगणना प्रश्नों की सूची के अलावा) की मांग नहीं करेंगे, न ही वे किसी भी प्रकार का पैसा मांगेंगे।” ऐसी कोई भी मांग होने पर निवासियों को सलाह दी जाती है कि वे तुरंत घटना की सूचना दें।

बंगाल सरकार ने 3 आईपीएस अधिकारियों को किया सस्पेंड

आरजी कर बलात्कार-हत्या मामले की जांच में लापरवाही के आरोप में बंगाल सरकार ने तीन आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इस मामले में तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल, तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (उत्तर) अभिषेक गुप्ता और पुलिस उपायुक्त (मध्य) इंदिरा मुखर्जी को निलंबित किया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें