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मुख्यमंत्री पद के लिए महाराष्ट्र भाजपा में अभी से शुरू हो गई खींचतान

गणेश नंदन तिवारी मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नतीजों के सार्वजनिक होने तक कांग्रेस में पृथ्वीराज चव्हाण, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में अजीत पवार और शिवसेना में उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने को लेकर किसी भी तरह का विरोध नजर नहीं आता है। मगर भाजपा में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के लिए रस्साकशी शुरू हो गई है। […]

गणेश नंदन तिवारी

मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नतीजों के सार्वजनिक होने तक कांग्रेस में पृथ्वीराज चव्हाण, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में अजीत पवार और शिवसेना में उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने को लेकर किसी भी तरह का विरोध नजर नहीं आता है। मगर भाजपा में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के लिए रस्साकशी शुरू हो गई है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस और भाजपा के प्रमुख नेता एकनाथ खड़से के नाम मुख्यमंत्री पद के लिए उछलने के बाद बुधवार को पंकजा मुंडे ने कहा कि जनता चाहती है कि वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठें। भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा ने अपने विधानसभा क्षेत्र परली में वोट डालने के बाद कहा कि लोगों की भावना थी कि मुंडे साहब को मुख्यमंत्री बनना चाहिए। शायद मुझे उनका आशीर्वाद है और जनभावना भी यही है। मगर मैंने कभी दावा नहीं किया है कि मुझे मुख्यमंत्री बनना चाहिए। मुख्यमंत्री के रूप में पंकजा मुंडे के नाम की चर्चा चालीसगांव में तब शुरू हुई थी, जब चुनाव प्रचार कर रही पंकजा की संघर्ष यात्रा यहां पहुंची थी। इस यात्रा में विधान परिषद में विपक्ष के नेता विनोद तावडे ने कहा था कि जीतने के बाद पंकजा मुंडे मुख्यमंत्री बनेंगीं। इसके बाद ही एकनाथ खड़से ने भी खुल कर मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा ठोंका था। अब पंकजा के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में खुल कर शामिल होने से भाजपा में अंदरुनी खींचातानी शुरू हो गई है।

पंकजा की साफगोई के बाद मुख्यमंत्री पद की होड़ पर सफाई देते हुए फडणवीस ने कहा कि उन्होंने कभी मुख्यंत्री पद के लिए अपना नाम नहीं लिया। फडणवीस के मुताबिक उनका कहना था कि वे जो काम करेंगे, वह सूबे में भाजपा का मुख्यमंत्री बनाने के लिए उनका योगदान होगा और मैंने अपना काम कर दिया है।

देवेंद्र फडणवीस को तो महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव शुरू होने के पहले ही नागपुर से मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया जाने लगा था। इसके लिए ‘केंद्र में नरेंद्र राज्य में देवेंद्र’ का घोष वाक्य भी लगातार दोहराया जा रहा था। फडणवीस की छवि ईमानदार नेता की है और उन्होंने दक्षिण पश्चिम नागपुर से चुनाव लड़ा है, जिसे भाजपा की सुरक्षित सीट माना जाता है। आम तौर पर यह माना जाता है कि विदर्भ के नेताओं के सामने हमेशा नितिन गडकरी की चुनौती रही है। हालांकि इस समय नितिन गडकरी केंद्र में हैं और मुख्यमंत्री पद की होड़ में नजर नहीं आते हैं।

एकनाथ खड़से भी ढाई दशक से राजनीति में सक्रिय हैं। भाजपा उनकी उपेक्षा नहीं कर सकती है क्योंकि खड़से अनुभवी हैं। वित्त सहित कई विभागों के मंत्री रह चुके खड़से ने मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के संकेत देने शुरू कर दिए हैं। उनको मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में पार्टी के कितने नेता आगे आते हैं, इस पर ही सब कुछ निर्भर होगा।

दूसरी ओर कांग्रेस को बहुमत मिलने या सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की स्थिति में पृथ्वीराज चव्हाण ही फिर से मुख्यमंत्री होंगे। साफ छवि के पृथ्वीराज चव्हाण दिल्ली से महाराष्ट्र की राजनीति में आदर्श घोटाले के बाद आए। कांग्रेस अगर सबसे बड़ी पार्टी बनती है तो चव्हाण का नाम मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे आगे होगा। इस विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने भी इसी आधार वोट मांगे हैं।

अजीत पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सबसे विवादास्पद नेता हैं। उन पर सिंचाई घोटाले में भ्रष्टाचार करने के आरोप लगते रहे हैं। मगर इस समय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शरद पवार के बाद अजीत पवार ही सबसे ताकतवर नेता माने जाते हैं। चुनाव के दौरान राष्ट्रवादी ने भी अजीत पवार को ही मुख्यमंत्री का दावेदार बना कर वोट मांगे हैं।

उद्धव ठाकरे विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री बनने की अपनी चाह को सार्वजनिक कर चुके हैं। अगर एक चायवाला प्रधानमंत्री बन सकता है तो मैं मुख्यमंत्री क्यों नहीं, यह कहने वाले उद्धव ठाकरे शिवसेना के दिवंगत नेता बाल ठाकरे के पुत्र हैं। शिवसेना का चुनाव प्रचार उन्होंने अकेले अपने दम पर किया। उनकी पार्टी में उद्धव के मुख्यमंत्री बनने को लेकर किसी भी तरह का मतभेद नजर नहीं आता है।

 

 

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