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NCP में शरद और अजित पवार में फिर ठनी, भतीजा लगवा रहे भगवा झंडा, चाचा बोले- पार्टी का निर्णय नहीं

Maharashtra Assembly Poll 2019: अजित पवार के फैसले के पीछे सियासी वजहें हैं। माना जा रहा है कि पार्टी भगवा झंडा के सहारे मराठों को आकर्षित करना चाह रही है जो खिसक कर बीजेपी-शिवसेना की तरफ जा चुके हैं।

Author मुंबई | Updated: September 19, 2019 2:54 PM
एनसीपी चीफ शरद पवार (दाएं) और उनके भतीजे अजित पवार (बाएं), पार्टी के एक कार्यक्रम में। ( एक्सप्रेस फोटो)

Maharashtra Assembly Poll 2019:  राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) चीफ शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार के बीच एक बार फिर मतभेद उजागर हुए हैं। जूनियर पवार ने चुनावी रैलियों में दो-दो झंडे लहराने का निर्देश पार्टी कार्यकर्ताओं को दिया है, जबकि सीनियर पवार (शरद पवार) का कहना है कि पार्टी ने ऐसा कोई फैसला नहीं किया है। पिछले महीने 23 अगस्त को महाराष्ट्र के परभनी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अजित पवार ने कहा था कि अब से पार्टी के सभी कार्यक्रमों में दो-दो झंडे लहराए जाएंगे। इनमें से एक झंडा पार्टी का होगा जो तिरंगे के बीच घड़ी निशान वाला है और दूसरा झंडा भगवा होगा, जिसके ऊपर मराठा किंग छत्रपति शिवाजी महाराज की तस्वीर होगी। माना जा रहा है कि अजित पवार की यह कोशिश पार्टी के सॉफ्ट हिन्दुत्व की ओर इशारा है।

इधर, शरद पवार ने कहा है कि दो झंडे लागू करने का निर्णय पार्टी ने नहीं लिया है, बल्कि अजित पवार ने व्यक्तिगत तौर पर इसका फैसला किया है। बता दें कि अजित पवार पार्टी में बड़ी हैसियत रखते हैं। पहले भी ऐसे कई मौके आए हैं, जब अजित पवार की बात को शरद पवार ने काटा हो। कई बार तो अजित पवार के बयान की वजह से पार्टी को शर्मिंदा भी होना पड़ा है।

साल 2013 में अजित पवार ने महाराष्ट्र में सूखा पीड़ित किसानों की हड़ताल पर कहा था कि जब बारिश नहीं हो रही है तो वो पानी कहां से लाएंगे, पेशाब करके डैम तो नहीं भर सकते न? इसके बाद शरद पवार को ट्वीट कर माफी मांगनी पड़ी थी। अजित पवार उस वक्त महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री थे, जबकि शरद पवार केंद्र सरकार में कृषि मंत्री थे। साल 2014 में भी कांग्रेस से गठबंधन करने पर दोनों पवार के बीच मतभेद उभरे थे। हालांकि दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था।

इस बीच अजित पवार के फैसले के पीछे सियासी वजहें हैं। माना जा रहा है कि पार्टी भगवा झंडा के सहारे मराठों को आकर्षित करना चाह रही है जो खिसक कर बीजेपी-शिवसेना की तरफ जा चुके हैं। मराठा वोट बैंक पहले एनसीपी का ही वोट बैंक रहा है लेकिन हाल के दिनों में जब से राज्य के सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने मराठों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण देने का फैसला किया है, तब से मराठों का झुकाव बीजेपी की तरफ होने लगा है। इसके अलावा पार्टी बीजेपी और शिवसेना के हिन्दुत्व और राष्ट्रवादी छवि की भी काट के तौर पर खुद को भी हिन्दुत्ववादी और राष्ट्रवादी पार्टी साबित करने की होड़ में लगी है। एनसीपी इसके लिए शिवाजी महाराज की तस्वीर इस्तेमाल करना चाह रही है।

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