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महाराष्ट्र: सीट बंटवारे पर नहीं बन रही बीजेपी-शिवसेना की बात, दोनों में हो सकता है दोस्ताना संघर्ष, सेना ने दिए 288 पर लड़ने के संकेत

सीटों की संख्या को लेकर दोनों पार्टियों के बीच पेंच फंसा है। सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों के बीच बातचीत अंतिम पड़ाव पर है। शिवसेना ने बीजेपी के 110 सीटों पर चुनाव लड़ने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।

उद्धव ठाकरे व अमित शाह।(फाइल फोटो)

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होने के साथ ही बीजेपी और शिवसेना के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर साफ खींचतान नजर आ रही है। कुछ ऐसी ही रस्साकशी साल 2014 के चुनाव में भी नजर आई थी लेकिन इस साल शिवसेना काफी आक्रामक मूड में नजर आ रही है। दरअसल, शिवसेना के आक्रामक होने का कारण यह है कि पार्टी चीफ उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को पार्टी सीएम पद का उम्मीदवार घोषित करना चाहती है। वहीं बीजेपी शिवसेना को यह पैंतरा चलने नहीं देना चाहती है। महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने पिछले महीने इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा था कि वह दोबारा सीएम बनेंगे इसमें कोई संदेह नहीं है। वहीं गृह मंत्री अमित शाह पहले ही घोषणा की थी कि देवेंद्र फडणवीस विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए दूसरे कार्याकाल के भी हकदार हैं।

सीटों की संख्या: सीटों की संख्या को लेकर दोनों पार्टियों के बीच पेंच फंसा है। सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों के बीच बातचीत अंतिम पड़ाव पर है। शिवसेना ने बीजेपी के 110 सीटों पर चुनाव लड़ने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। शिवसेना कम से कम 144 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीटें हैं। शिवसेना चाहती है कि सीटों का बंटवारा मैत्रीपूर्वक हो जाए। साल 2014 के चुनाव में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। बीजेपी को 122 सीटों पर जीत मिली थी जबकि शिवसेना को 63 सीटें हासिल हुई थी। इस बार बीजेपी की नजरें 150 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने पर है। ऐसे में दोनों पार्टियों में दोस्ताना संघर्ष हो सकता है।

पहले हो गया था समझौता: लोकसभा चुनाव से पहले तल्खियां बढ़ने की डर से अमित शाह ने उद्धव ठाकरे से उनके आवास मातोश्री पर उनसे मुलाकात की थी। हालांकि सीट के बंटवारे को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया था लेकिन यह कहा जा रहा था कि दोनों पार्टियां आपस में सीट के बंटवारे को लेकर समझौता कर लिया है और दोनों बराबर की संख्या की सीटों पर चुनाव लड़ेंगी लेकिन लोकसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद अमित शाह के सुर बदल गए और कहा कि बीजेपी की राज्य और केंद्र दोनों में लोकप्रियता अधिक है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी और शिवसेना गठबंधन को 48 सीटों में से 41 सीट पर जीत मिली थी।जिसमें बीजेपी ने 23 सीटें जीती थी और शिवसेना के हाथों 18 सीटें आई थीं। भगवा पार्टी कैंप में दोनों पार्टियों की कोशिश है कि वह ज्यादा से ज्यादा सीटें जीत सके ताकि सीएम पद की दावेदारी प्रबल हो सके।

288 सीटों पर लड़ेगी शिवसेना! सीटों के बंटवारे को लेकर अगर दोनों पार्टियों में बात नहीं बनती है तो शिवसेना अकेले 288 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। शिवसेना ने  इशारा भी कर दिया है कि वह 288 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ सकती है। सोमवार को शिवसेना बीती जुलाई में आदित्य ठाकरे ने 4000 किलोमीटर की जन आशीर्वाद यात्रा की थी और लोकसभा चुनाव में शिवसेना को वोट देने के लिए लोगों को धन्यवाद दिया था।

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