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महाराष्ट्र: NCP को दोहरा झटका, शिवाजी के वंशज उदयनराज भोसले बीजेपी में होंगे शामिल, भास्कर जाधव शिवसेना के हुए

दयनराज शनिवार को दिल्ली पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी ज्वॉइन कर सकते हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: September 13, 2019 6:43 PM
एनसीपी नेता उदयनराज भोसले और एनसीपी चीफ शरद पवार। फोटो: इंडियन एक्सप्रेस

महाराष्ट्र में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी नेता उदयनराज भोसले बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज उदयनराज शनिवार (14 सितंबर 2019) को दिल्ली पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी ज्वॉइन कर सकते हैं। मीडिया में जारी खबरों के मुताबिक वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ दिल्ली पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि बीजेपी में शामिल होने का फैसले लेने से पहले उन्होंने पार्टी नेताओं के साथ काफी विचार-विर्मश किया।

वहीं एनसीपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र विधानपरिषद के सभापति रामराजे निंबालकर के भी बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। उधर गंगानगर से पार्टी विधायक भास्कर जाधव गुरुवार को शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में शिवसेना का दामन थामा। बता दें कि इससे पहले बुधवार को एनसीपी नेता गणेश नाइक और कांग्रेस के नेता हर्षवर्धन पाटिल बीजेपी में शामिल हुए थे। इन दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में भाजपा का दामन थामा था।

एनसीपी के नेताओं के बीजेपी में शामिल होने से पार्टी चीफ शरद पवार अकेले पड़ते जा रहे हैं। हाल ही में जब उनसे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इसपर सवाल किए गए तो वह भड़क गए थे। एनसीपी चीफ प्रेस कॉन्फ्रेंस से उठकर जाने लगे थे लेकिन किसी तरह उन्हें मनाया गया। बता दें कि एनसीपी और कांग्रेस विधानसभा चुनाव में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ सकते हैं।

गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर शरद पवार और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच बैठक भी हो चुकी है। एक तरफ जहां बीजेपी चुनाव से पहले विश्वास से भरी नजर आ रही है तो दूसरी तरफ कांग्रेस और एनसीपी में जोश की कमी नजर आ रही है। पार्टी नेताओं का चुनाव से पहले साथ छोड़ना दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती है। बहरहाल दोनों ही दल किसी न किसी तरह नेताओं को पार्टी में बनाए रखना चाहेंगे।

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