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महाराष्ट्र में दिग्गजों के बीच तिकोना मुकाबला

मुंबई। सोमवार को खत्म हुए महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव प्रचार के बाद अब स्थिति स्पष्ट हो गई है। युति और आघाड़ी की टूट के बाद ज्यादातर जगहों पर पंचकोणीय लड़ाई की उम्मीद जताई जा रही थी। प्रचार खत्म होने के बाद कमजोर उम्मीदवार चुनौती देते नहीं दिखाई दे रहे हैं इसलिए मुख्य मुकाबला भारतीय जनता […]

Author Updated: October 15, 2014 10:18 AM

मुंबई। सोमवार को खत्म हुए महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव प्रचार के बाद अब स्थिति स्पष्ट हो गई है। युति और आघाड़ी की टूट के बाद ज्यादातर जगहों पर पंचकोणीय लड़ाई की उम्मीद जताई जा रही थी। प्रचार खत्म होने के बाद कमजोर उम्मीदवार चुनौती देते नहीं दिखाई दे रहे हैं इसलिए मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना और कांग्रेस के बीच होगा। इस तिरंगे मुकाबले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) पश्चिम महाराष्ट्र में इन्हें टक्कर देगी। तिरंगे मुकाबले में कई नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।

पिछले दो दशकों से आघाड़ी और युति की टक्कर होती थी और मुकाबला आमने-सामने का होता था। इस बार चारों प्रमुख पार्टियों के अपने दम पर लड़ने के बाद विधानसभा चुनाव दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस, भाजपा, शिवसेना, राकांपा, बहुजन समाज पार्टी और मनसे जैसी प्रमुख पार्टियों के अलावा भारिप बहुजन महासंघ, शेतकरी कामगार पार्टी, आॅल इंडिया मजलिस ए इत्तहादुल मुसलमीन (आइएमआइ) ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

जिन विधानसभा क्षेत्रों पर दिलचस्प मुकाबला होना है उसमें सबसे आगे है दक्षिण कर्हाड, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने पुराने कांग्रेसी नेता विलासराव पाटील उडांलकर हैं, जो बगावत करके निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। 1980 से चुनाव नहीं हारनेवाले उंडालकर को राष्ट्रवादी कांग्रेस ने टिकट देने का प्रस्ताव रखा था, मगर उन्होंने इनकार कर दिया। यहां राकांपा के टिकट से खड़े हुए राजेंद्र सिंह यादव ने अंतिम समय में बगावत कर चव्हाण को समर्थन दे दिया। भाजपा ने अतुल भोसले और शिवसेना ने राज्यपाल डी वाय पाटील के बेटे अजिंक्य पाटील को खड़ा किया है। यादव के चव्हाण से मिलने के बाद चव्हाण का पलड़ा भारी हो गया है।

राकांपा के गढ़ बारामती से उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के सामने कांग्रेस ने पूर्व विधायक विजय मोरे के बेटे आकाश मोरे (कांग्रेस)और भाजपा ने बाला साहेब गावड़े को खड़ा किया है। यहां पवार के खिलाफ गन्ना किसानों को लेकर आंदोलन कर चुकी स्वाभिमानी शेतकरी संगठना के राजू शेट्टी ने पवार विरोधी जमीन तैयार की है। भाजपा ने राजू शेट्टी की पार्टी से गठबंधन किया है इसलिए मुख्यमंत्री अजित पवार की राह कठिन हो गई है।

दक्षिण पश्चिम नागपुर से भाजपा के देवेंद्र फडणवीस के लिए जीतना ज्यादा मुश्किल नहीं है। उन्हें साफ छवि के कारण मुख्यमंत्री के दावेदार के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। कभी भाजपा के लिए काम कर चुके विनोद गुडघे के बेटे प्रफुल्ल गुडघे को कांग्रेस ने टिकट दिया है। राकांपा ने पूर्व नगरसेवक दिलीप पनकुले को उनके खिलाफ उतारा है। सेना ने भाजपा के पूर्व नगरसेवक के भाई पंजू तोतवानी को टिकट दिया है।

पूर्व गृह मंत्री और राकांपा नेता आरआर पाटील तासगांव-कवठेमाल से छठी बार चुनाव लड़ रहे हैं। सांगली, मिरज, गत भाजपा के पास है और अब उसे पाटील का तासगांव और पतंगराव कदम का पलुस भी चाहिए। गठबंधन के दौरान भाजपा शिवसेना से गंगापुर, पनवेल, भुसावल के साथ तासगांव भी चाहती थी। भाजपा ने पाटील के खिलाफ पूर्व राज्यमंत्री अजीत घोरपड़े को खड़ा किया है। कांग्रेस ने धनगर समाज के उम्मीदवार को खड़ा कर पाटील को चुनौती दी है। स्वाभिमानी ने शिवसेना के बागी महेश खराड़े को पाटील के खिलाफ उतारा है।

येवला से लड़ रहे राकांपा नेता छगन भुजबल के खिलाफ मनसे ने उम्मीदवार नहीं दिया है। कांग्रेस ने उनके खिलाफ निवृति लहरे को, सेना ने संभाजी पवार को, भाजपा ने शिवाजी मानकर को और बसपा ने पौलद अहिरे को उतार कर छगन भुजबल की नींद उड़ा दी है।

राकांपा के एक और स्थापित नेता जयंत पाटील को इस्लामुर में घेरने के लिए भाजपा, शिवसेना और स्वाभिमानी ने निर्दलीय उम्मीदवार अभिजीत पाटील को समर्थन देकर पाटील की राह मुश्किल कर दी है। सोलापुर मध्य से खड़ी पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की बेटी प्रणति शिंदे को भी कड़ी चुनौती मिल रही है। पांच बार नगरसेवक, सोलापुर के मेयर और कभी शिंदे के वफादार रहे महेश कोठे को शिवसेना ने उनके खिलाफ उतारा है।

गोपीनाथ मुंडे के निधन के बाद मराठवाड़ा में कोई ताकतवर नेता भाजपा के पास नहीं रहा। इसलिए वह मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे का कद बढ़ाकर वहां के ओबीसी मतों को अपने पाले में करना चाहती है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंकजा का प्रचार कर उनकी राह आसान कर दी है। राह आसान तो अशोक चव्हाण की पत्नी अमिता चव्हाण की भी नजर आ रही है जो भोकर से चुनाव लड़ रही हैं।

इनके अलावा भाजपा के टिकट पर लड़ रहे विनोद तावड़े, मंगल प्रभात लोढा, राकांपा के बागी विजयकुमार गावित और बबनराव पाचपुते, शिवसेना के बागी नेता राम कदम, कांग्रेस के नेता राधाकृष्ण विखेपाटील, राजेंद्र दर्डा, अमित देशमुख, पतंगराव कदम, सुरुप सिंह नाईक, कृपाशंकर सिंह, राकांपा नेता गणेश नाइक, जीतेंद्र आव्हाड, नवाब मलिक, सुनील तटकरे, शिवसेना नेता और जेल से चुनाव लड़ रहे जलगांव शहर विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार सुरेश जैन की हार-जीत पर भी लोगों की निगाहें लगी हैं।

 

 

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