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महाराष्ट्र: 24 साल में सिर्फ 3% वोट शेयर ही बढ़ा पाई शिवसेना, बीजेपी ने लगा दी 5 गुना लंबी छलांग, 1989 में पहली बार दोनों में हुआ था गठबंधन

Maharashtra Assembly Election 2019: एनडीए सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी के शासन के प्रभाव का फायदा उठाने के लिए चुनाव को छह महीने के लिए टाल दिया। लेकिन 1999 के चुनाव में शिवसेना 69 सीटों पर खिसक गई लेकिन वोट फीसद17.33 प्रतिशत रहा।

Author नई दिल्ली | Updated: September 21, 2019 9:35 PM
1989 में पहली बार शिवसेना और बीजेपी ने लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन किया था। (फाइल फोटो)

Maharashtra Assembly Election 2019:  पिछले 24 सालों में बीजेपी के साथ गठबंधन में शिवसेना का राजनीतिक सफर देखें तो संतोषजनक ही रहा है। इन सालों में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने सिर्फ 3.09 प्रतिशत का ही वोट शेयर बढ़ा पाई है और साथ ही पार्टी अपने खाते में 21 सीटें ही और जोड़ पाई है। वहीं बीजेपी ने गजब की छलांग लगाई है। बीजेपी ने 16.37 प्रतिशत का वोट शेयर जोड़ा है और 1990 से लेकर 2014 तक अपने हिस्से में 8 सीटें भी जोड़ी हैं। साल 2014 में एक अपवाद यह था कि बीजेपी और शिवसेना साथ चुनाव नहीं लड़े थे।

शनिवार को दोनों पार्टियों को लेकर कयास लगाए जाने लगे जब चुनाव की तारीख की घोषणा की गई। देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि दोनों पार्टियां साथ चुनाव लड़ेगी और सीटों का बंटवारा दोनों पार्टियों के बीच सहमति से होगा। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के अक्टूबर महीने की 21 तारीख को होना है। महाराष्ट् की 288 सीटों पर चुनाव एक ही चरण में होने हैं। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने भी गठबंधन पर जोर दिया।

1989 में पहली बार शिवसेना और बीजेपी ने लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन किया था। इसके अलावा दोनों पार्टियों ने मिलकर विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन बनाए रखने का फैसला किया था। 1990 के विधानसभा चुनावों में, शिवसेना ने 117 सीटों पर और भाजपा ने 117 सीटों पर चुनाव लड़ा। चुनाव परिणाम में शिवसेना को 15.94 प्रतिशत वोटों के साथ 52 सीटें मिली।वहीं भाजपा के हिस्से में 10.71 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 42 सीटें आई। इस दौरान कांग्रेस बड़ी पार्टी रही और बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफल हुई। एनसीपी का तब अस्तित्व ही नहीं था। साल 1999 में यह कांग्रेस से अलग होकर शरद पवार के नेतृत्व में नई पार्टी बनी। 1995 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद कट्टर हिंदुत्व वाली छवि के साथ बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन सत्ता में आया।

कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। शिवसेना आगे रही और 73 सीटें जीती और वोट शेयर 16.39 प्रतिशत रहा। वहीं बीजेपी दूसरे नंबर पर रही बीजेपी के पास 65 सीटें हाथ लगीं और 12.80 प्रतिशत वोट शेयर रहा। शिवसेना के वरिष्ठ नेता मनोहर जोशी मुख्यमंत्री बने और बीजेपी के गोपीनाथ मुंडे उप मुख्यमंत्री बने और 6 महीने चुनाव से पहले शिवसेना ने जोशी की जगह नारायण राणे को जिम्मेदारी सौंपी।1999 में तस्वीर कुछ और रही, मुख्यमंत्री पद के लिए बीजेपी और शिवसेना के बीच कलह के चलते दोनों को नुकसान उठाना पड़ा।

एनडीए सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी के शासन के प्रभाव का फायदा उठाने के लिए चुनाव को छह महीने के लिए टाल दिया। लेकिन 1999 के चुनाव में शिवसेना 69 सीटों पर खिसक गई लेकिन वोट फीसद17.33 प्रतिशत रहा। वहीं बीजेपी भी 56 सीटों पर आ गई लेकिन वोट प्रतिशत बढ़कर 14.56 प्रतिशत हो गया। विलासराव देशमुख मुख्यमंत्री बने और कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन में पहली बार सरकार बनी। हालांकि, शिवसेना ने बड़ी पार्टी होने के नाते राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद को बरकरार रखा। 2004 और 2009 में हुए लगातार विधानसभा चुनावों में शिवसेना और बीजेपी एक साथ चुनाव लड़ते दिखे, जो कांग्रेस-एनसीपी की राजनीतिक ताकत पर कब्जा करने में असमर्थ रहे।

हालांकि, भाजपा की सीटों और वोटों की हिस्सेदारी 2004 में 54 सीटों पर स्थिर रही और 13.67 प्रतिशत वोट शेयर रहा। वहीं शिवसेना ने 62 सीटें जीतीं और 19.97 प्रतिशत वोट शेयर पार्टी के खाते में गया। साल 2009 में बीजेपी की सीटों की संख्या लुढ़कर 46 पर आ गई और वोट प्रतिशत 14.02 रहा। वहीं सेना को इस साल 45 मिली और वोट शेयर 16.02 प्रतिशत रहा। 2009 में बीजेपी शिवसेना से एक सीट आगे रही और इसके साथ ही शिवसेना की बड़े भाई वाली छवि को भी बीजेपी ने हटा फेंका।

साल 2014 में बीजेपी को बड़ा फायदा देखने को मिला। लोकसभा चुनाव के छह महीने बाद ही मोदी फैक्टर के साथ बीजेपी ने कमाल किया। सीटों को लेकर दोनों पार्टियों के बीच बात नहीं बनी और दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया। शिवसेना 150 से कम सीटों पर लड़ने के लिए राजी नहीं थी जिसके चलते दोनों पार्टियों के बीच बात नहीं बन पाई। बीजेपी चाहती थी कि शिवसेना 147 सीटों पर ही चुनाव लड़े। बीजेपी अन्य छोटी पार्टियों को 14 सीटों में निपटाना चाहती थी लेकिन बात नहीं बन सकी। चुनाव के परिणाम बीजेपी के लिए चमत्कार से कम नहीं थे।

पार्टी ने अकेले अपने दम पर 122 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी और बीजेपी का वोट शेयर भी 27.08 प्रतिशत रहा। वहीं शिवसेना को सिर्फ 63 सीटों से संतोष करना पड़ा और वोट शेयर भी 19.03 प्रतिशत रहा। वहीं कांग्रेस को 42 सीटों पर जीत मिली जबकि एनसीपी को 41 सीट मिली। अन्य छोटी पार्टियां और क्षेत्रीय दल 20 सीटों में सिमटकर रह गए।

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