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महाराष्ट्र: एक महीने में 38 लोगों ने छोड़ी कांग्रेस-एनसीपी, पांच महीने पुराने पैटर्न से बीजेपी-शिवसेना को मिल सकती हैं 230 सीटें

Maharashtra Assembly Election 2019: अप्रैल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में राज्य की 48 सीटों में से 41 पर बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने कब्जा जमाया है जबकि कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को मात्र छह सीटें मिली थीं। इनमें से भी एनसीपी के एक सांसद अब शिव सेना में शामिल हो चुके हैं।

अमित शाह और उद्धव ठाकरे। (फाइल फोटो)

Maharashtra Assembly Election 2019: महाराष्ट्र और हरियाणा में विधान सभा चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है। इसके साथ ही दोनों राज्यों में हार-जीत की संभावनाओं पर चर्चा भी जोर पकड़ने लगी है। फिलहाल इन दोंनों राज्यों में बीजेपी की सरकार है। हरियाणा में बीजेपी अपने दम पर जबकि महाराष्ट्र में शिव सेना के साथ गठबंधन सरकार है। माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में फिर दोनों दल गठबंधन के तहत असेंबली चुनाव लड़ेंगे। अगर ऐसा होता है तो इस गठबंधन को 230 सीटें मिलने के आसार हैं। यह आंकलन पांच महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव के पैटर्न के आधार पर किया गया है।

अप्रैल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में राज्य की 48 सीटों में से 41 पर बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने कब्जा जमाया है जबकि कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को मात्र छह सीटें मिली थीं। इनमें से भी एनसीपी के एक सांसद अब शिव सेना में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की ताकत अब 42 सांसदों की हो गई है। राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि इन 42 सांसदों को अगर विधान सभा सीटों के लिहाज से गिना जाय तो आंकड़ा 230 को पार कर सकता है।

महाराष्ट्र विधान सभा में 288 सीटें हैं। 2014 के चुनाव में बीजेपी ने 122 जबकि शिवसेना ने 63 सीटों पर जीत हासिल की थी। उस वक्त दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। माना जा रहा है कि अब जब दोनों पार्टियां एकसाथ मिलकर चुनाव लड़ेंगी तब सीटों का आंकड़ा 185 (2014 में दोनों को मिलाकर) से आगे बढ़ सकता है क्योंकि राज्य में कांग्रेस और एनसीपी के 38 ताकतवर नेता पिछले एक महीने में पार्टी छोड़कर बीजेपी या शिवसेना में शामिल हुए हैं। इससे बीजेपी-शिवसेना गठबंधन मजबूत हुआ है। इसके अलावा फडणवीस सरकार ने एनसीपी के बड़े वोट बैंक मराठों को रिझाने के लिए आरक्षण का कार्ड फेंका है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की छवि, खुद पीएम मोदी का करिश्माई चुनावी चेहरा और बीजेपी के सांगठनिक ताकत के बल पर बीजेपी को भरोसा है कि संघ की कार्यस्थली वाले राज्य में फिर से वापसी कर सकेगी। 2014 के विधान सभा चुनाव में बीजेपी को अकेले 27.8 फीसदी जबकि शिव सेना को 19.3 फीसदी वोट मिले थे। इन दोनों दलों ने 260 और 282 सीटों पर चुनाव लड़ा था।

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