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महाराष्ट्र में पिछड़ों, एससी-एसटी वोटों पर है अमित शाह की नजर, पांच साल में डेढ़ गुना बढ़ी रिजर्व सीटों पर जीत

आंकड़ों के मुताबिक 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 44 फीसदी ओबीसी मतदाताओं से वोट किया और शिवसेना को 31 फीसदी। वहीं, कांग्रेस 14 और एनसीपी को 7 फीसदी ओबीसी मतदाताओं ने वोट दिया।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (फोटो सोर्स: पीटीआई)

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी-शिवसेना गठबंधन 2019 लोकसभा चुनाव जैसा ऐतिहासिक प्रदर्शन दोहराने की कोशिश में लगा है। प्रदेश की सभी जातियों को लुभाने के पार्टी हर स्तर पर अपने कैंपेन को धार देने की जुगत में लगी है। मंगलवार को महाराष्ट्र के बीड़ में आयोजित दशहरा रैली को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदेश की ओबीसी जातियों पर विशेष फोकस किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओबीसी कमिशन बनाकर पिछड़ी जातियों के कल्याण के लिए वह काम किया, जो 70 सालों से किसी अन्य सरकारों ने नहीं किया। वैसे महाराष्ट्र के चुनावी रणनीति में बीजेपी ओबीसी के साथ-साथ एससी/एसटी को भी शामिल किए हुए है। 2019 लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक पार्टी को सवर्ण जातियों का भरपुर साथ है ही, उसे सिर्फ पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों को अपने प्रति इनटैक्ट करना है।

दअरसल वर्तमान विधानसभा चुनाव में बीजेपी का इलेक्टोरल अर्थमेटिक्स कई मायनों में बाकी राजनीतिक दलों के मुकाबले काफी मजबूत दिखाई दे रहा है। शिवसेना के साथ मिलकर बीजेपी ने 2014 विधानसभा चुनाव में 47.2% वोट हासिल किए थे। उस दौरान इनके खाते में 288 सीटों में 185 सीटें हाथ आई थीं। जबकि, 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र से बीजेपी-शिवसेना को 51% मत हासिल हुए थे। एनडीए ने महाराष्ट्र में एक तरह से सफाया करते हुए राज्य की 48 लोकसभा सीटों में से 41 पर विजय हासिल की थी। सबसे खास बात यह कि बीते पांच सालों में इस गठबंधन को रिजर्व सीटों पर मिलने वाली जीत में डेढ़ गुना वृद्धि हुई है।

बीजेपी-शिवसेना गठबंधन हर मोर्चे पर जातिगत वोटों को भी साधने में कामयाब रहा है। इन दलों ने कांग्रेस और एनसीपी के भी वोट बैंक में सेंध लगाई है। वहीं, 2018 में अस्तीत्व में आई प्रकाश अंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन अगड़ी (VBA) भी अब दलित मतदाताओं को कांग्रेस से दूर कर रही है। साथ ही साथ बीजेपी के साथ भी सटे दलित मतदाता इस पार्टी के साथ अपना भविष्य देख रहे हैं। ऐसे में बीजेपी ने जातिगत वोट के लिहाज से ओबीसी पर ज्यादा तवज्जो देती हुई दिखाई दे रही है।

अगर जातिगत लिहाज से बात करें तो महाराष्ट्र की सवर्ण जातियों में बीजेपी का जनाधार काफी मजबूत है। 2019 लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक 63 फीसदी जातियों ने बीजेपी को वोट दिया था और 21 फीसदी का वोट शिवसेना को मिला था। जबकि, इस तबके से कांग्रेस 7 और एनसीपी महज 6 फीसदी वोट मिले थे। ओबीसी जातियों में भी बीजेपी और शिवसेना ने जबरदस्त पैठ बनाई है। आंकड़ों के मुताबिक 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 44 फीसदी ओबीसी मतदाताओं से वोट किया और शिवसेना को 31 फीसदी। वहीं, कांग्रेस 14 और एनसीपी को 7 फीसदी ओबीसी मतदाताओं ने वोट दिया।

बीजेपी-शिवसेना का जनाधार मराठा वोटरों में भी खूब दिखाई दिया है। बीजेपी को 20 और शिवसेना को 39 फीसदी मराठा वोटरों ने वोट किया। हालांकि, इस तबके में एनसीपी ने अपना प्रभाव कायम रखते हुए 28 फीसदी वोट हासिल किए। जबकि कांग्रेस के खाते में 9 फीसदी मत थे। हालांकि, दलित जातियों में बीजेपी को कम वोट मिले लेकिन कांग्रेस और एनसीपी की तुलना में ज्यादा ही वोट मिले। 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 18 फीसदी और शिवसेना को 12 फीसदी दलित मतदाताओं ने वोट किया। जबकि, एनसीपी को 11 और कांग्रेस 13 फीसदी इस तबके से वोट मिले। हां, अन्य के खाते में 45 फीसदी मत जरूर आए।

कांग्रेस और एनसीपी के लिए 2019 में भी मुस्लिम वोट बैंक एक बड़ी भूमिका में जरूर रहा। कांग्रेस को 56 और एनसीपी को 30 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं ने वोट किया। जबकि बीजेपी को 9 और शिवसेना को इस तबके से सिर्फ 4 प्रतिशत ही वोट मिले।

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